{"_id":"5e5d539d8ebc3eeb1c0132f9","slug":"medical-college-got-mbbs-fourth-year-recognition-orai-news-knp5481894173","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेडिकल कालेज को एमबीबीएस चौथे वर्ष की मिली मान्यता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेडिकल कालेज को एमबीबीएस चौथे वर्ष की मिली मान्यता
विज्ञापन
वार्ता करते राजकीय मेडिकल कालेज उरई के प्राचार्य डी नाथ व अन्य
- फोटो : ORAI
उरई। राजकीय मेडिकल कालेज को एमबीबीएस अंतिम वर्ष की मान्यता मिल गई है। कई बार एमसीआई की टीम ने निरीक्षण किया था पर मान्यता नहीं दी थी। 23 जनवरी को टीम ने निरीक्षण किया और मान्यता की संस्तुति कर दी। इसके बाद एमसीआई के बोर्ड और गवर्नर्स ने मान्यता दे दी। इसे लेकर खुशी का माहौल है। जिले के लिए इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है।
बता दें कि राजकीय मेडिकल कालेज की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी। जबकि एमबीबीएस के पहले बैच की पढ़ाई 2013 से शुरू हुई थी। तब से एमसीआई ने निरीक्षण कर दूसरे और तीसरे चरण की मान्यता तो दे दी थी लेकिन चौथे चरण की मान्यता के लिए संसाधन न होने पर अपनी मुहर नहीं लगाई थी। 23 जनवरी को एमसीआई की टीम ने मेडिकल कालेज का निरीक्षण किया था। जिसमें डायग्नोसिस सर्विस, किचन, लाउंड्री, छात्रों की शिक्षा प्रशिक्षण व्यवस्था, मरीजों की सुविधाओं समेत 14 प्रकार की सेवाओं की गहराई से जांच की थी। छात्रों, मरीजों, तीमारदारों और प्राध्यापकों से कई बिंदुओं पर चर्चा की थी। इसके बाद टीम ने अपनी रिपोर्ट एमसीआई के महासचिव, बोर्ड और गवर्नर्स को सौंप दी थी।
वहां से एमबीबीएस चौथे वर्ष की मान्यता प्रदान की गई है। सोमवार को पत्रकारों से वार्ता में मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. द्विजेंद्र नाथ ने बताया कि मान्यता मिलने के बाद यहां सुविधाएं बढ़ेगी और इसका लाभ छात्रों के साथ साथ जिले के लोगों को भी होगा। यह जिले के लिए उपलब्धि जैसा है। इसके लिए डीएम के साथ साथ जनप्रतिनिधियों ने भी सहयोग किया। इस दौरान डा.मनोज वर्मा, डा. डीएस चौधरी, डा. जितेंद्र मिश्रा, डा. अनूप अवस्थी, डा. शैलेश वर्मा, डा. प्रशांत निरंजन, डा. पीसी पुरोहित, डा. अरुण आदि मौजूद रहे। प्राचार्य डा. नाथ ने कहा कि यहां से न्यूरोलाजी डिपार्टमेंट के बांदा स्थानांतरण बारे में उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं है। हालांकि यहां इतनी जगह है कि कई डिपार्टमेंट स्थापित हो सकते है। जल्द ही प्लास्टिक सर्जरी समेत कई डिपार्टमेंट यहां होंगे। यहां संसाधन बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे है। इसका लाभ जिले के लोगों को मिलेगा।
विज्ञापन
अब एमडी और एमएस की मान्यता की तैयारी
प्राचार्य डा. नाथ ने बताया कि अब उनका लक्ष्य एमडी एवं एमएस के लिए मान्यता लाने का है। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शासन स्तर से पत्राचार कर दिया गया है। जो कमियां है, उन्हें दूर किया जा रहा है ताकि टीम के आने पर किसी तरह की दिक्कत न हो और परास्नातक कोर्स की मान्यता मिल सके।
विज्ञापन
बता दें कि राजकीय मेडिकल कालेज की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी। जबकि एमबीबीएस के पहले बैच की पढ़ाई 2013 से शुरू हुई थी। तब से एमसीआई ने निरीक्षण कर दूसरे और तीसरे चरण की मान्यता तो दे दी थी लेकिन चौथे चरण की मान्यता के लिए संसाधन न होने पर अपनी मुहर नहीं लगाई थी। 23 जनवरी को एमसीआई की टीम ने मेडिकल कालेज का निरीक्षण किया था। जिसमें डायग्नोसिस सर्विस, किचन, लाउंड्री, छात्रों की शिक्षा प्रशिक्षण व्यवस्था, मरीजों की सुविधाओं समेत 14 प्रकार की सेवाओं की गहराई से जांच की थी। छात्रों, मरीजों, तीमारदारों और प्राध्यापकों से कई बिंदुओं पर चर्चा की थी। इसके बाद टीम ने अपनी रिपोर्ट एमसीआई के महासचिव, बोर्ड और गवर्नर्स को सौंप दी थी।
विज्ञापन
वहां से एमबीबीएस चौथे वर्ष की मान्यता प्रदान की गई है। सोमवार को पत्रकारों से वार्ता में मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. द्विजेंद्र नाथ ने बताया कि मान्यता मिलने के बाद यहां सुविधाएं बढ़ेगी और इसका लाभ छात्रों के साथ साथ जिले के लोगों को भी होगा। यह जिले के लिए उपलब्धि जैसा है। इसके लिए डीएम के साथ साथ जनप्रतिनिधियों ने भी सहयोग किया। इस दौरान डा.मनोज वर्मा, डा. डीएस चौधरी, डा. जितेंद्र मिश्रा, डा. अनूप अवस्थी, डा. शैलेश वर्मा, डा. प्रशांत निरंजन, डा. पीसी पुरोहित, डा. अरुण आदि मौजूद रहे। प्राचार्य डा. नाथ ने कहा कि यहां से न्यूरोलाजी डिपार्टमेंट के बांदा स्थानांतरण बारे में उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं है। हालांकि यहां इतनी जगह है कि कई डिपार्टमेंट स्थापित हो सकते है। जल्द ही प्लास्टिक सर्जरी समेत कई डिपार्टमेंट यहां होंगे। यहां संसाधन बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे है। इसका लाभ जिले के लोगों को मिलेगा।
विज्ञापन
अब एमडी और एमएस की मान्यता की तैयारी
प्राचार्य डा. नाथ ने बताया कि अब उनका लक्ष्य एमडी एवं एमएस के लिए मान्यता लाने का है। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शासन स्तर से पत्राचार कर दिया गया है। जो कमियां है, उन्हें दूर किया जा रहा है ताकि टीम के आने पर किसी तरह की दिक्कत न हो और परास्नातक कोर्स की मान्यता मिल सके।