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जैन, बौद्ध और सिख धर्म सभी सनातन परंपरा की ही अभिव्यक्तियां : चंपतराय
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उरई। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने सोमवार को कहा कि भारतवर्ष की विविध धार्मिक परंपराएं हमारी सनातन संस्कृति की महानता और सहिष्णुता का प्रतीक हैं। जैन, बौद्ध और सिख धर्म यह सभी सनातन परंपरा की ही विविध अभिव्यक्तियां हैं। जिन्हें अलग नहीं बल्कि एक ही सांस्कृतिक मूल की शाखाएं मानकर अपनाया जाना चाहिए।
बृज कुंवर देवी एल्ड्रिच पब्लिक स्कूल में चल रहे विश्व हिंदू परिषद के शिक्षा वर्ग के दौरान चंपतराय पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म कोई संकुचित परिभाषा नहीं, बल्कि यह एक व्यापक जीवन-दृष्टि है, जो मानव मात्र को दिव्यता से जोड़ने का प्रयास करती है। जैन धर्म आत्मा की शुद्धता, अहिंसा और तपस्या को जीवन का आधार मानता है।
भगवान ऋषभदेव को वेदों में वेदज्ञ पुरुष और प्रथम तीर्थंकर के रूप में स्वीकारा गया है। बौद्ध धर्म, जो करुणा और ज्ञान की प्रेरणा से उदित हुआ, पुनर्जन्म और मोक्ष जैसे सिद्धांतों में सनातन संस्कृति से जुड़ा है। वहीं सिख धर्म, जो गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं पर आधारित है, सेवा, एकेश्वरवाद और मानवता के प्रति समर्पण के सनातन मूल्यों की ही प्रतिध्वनि है।
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कार्यक्रम के दूसरे चरण में उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद समाज में समरसता, शिक्षा, नारी सम्मान, आर्थिक स्वावलंबन और जाति-भेद से ऊपर उठकर एकजुटता के लिए कार्य कर रही है। संस्कृति और परंपरा की रक्षा के साथ-साथ आधुनिक युग की चुनौतियों का सामना कर संगठित समाज का निर्माण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इस अवसर पर विहिप क्षेत्र संगठन मंत्री गजेंद्र, वर्गाधिकारी देवेंद्र मिश्रा, प्रांत सह मंत्री अभिनव दीक्षित, अवधेश भदौरिया, जिला मंत्री आचार्य तेजस, जिला प्रचार-प्रसार प्रमुख रमाकांत सोनी उपस्थित रहे।
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बृज कुंवर देवी एल्ड्रिच पब्लिक स्कूल में चल रहे विश्व हिंदू परिषद के शिक्षा वर्ग के दौरान चंपतराय पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म कोई संकुचित परिभाषा नहीं, बल्कि यह एक व्यापक जीवन-दृष्टि है, जो मानव मात्र को दिव्यता से जोड़ने का प्रयास करती है। जैन धर्म आत्मा की शुद्धता, अहिंसा और तपस्या को जीवन का आधार मानता है।
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भगवान ऋषभदेव को वेदों में वेदज्ञ पुरुष और प्रथम तीर्थंकर के रूप में स्वीकारा गया है। बौद्ध धर्म, जो करुणा और ज्ञान की प्रेरणा से उदित हुआ, पुनर्जन्म और मोक्ष जैसे सिद्धांतों में सनातन संस्कृति से जुड़ा है। वहीं सिख धर्म, जो गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं पर आधारित है, सेवा, एकेश्वरवाद और मानवता के प्रति समर्पण के सनातन मूल्यों की ही प्रतिध्वनि है।
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कार्यक्रम के दूसरे चरण में उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद समाज में समरसता, शिक्षा, नारी सम्मान, आर्थिक स्वावलंबन और जाति-भेद से ऊपर उठकर एकजुटता के लिए कार्य कर रही है। संस्कृति और परंपरा की रक्षा के साथ-साथ आधुनिक युग की चुनौतियों का सामना कर संगठित समाज का निर्माण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इस अवसर पर विहिप क्षेत्र संगठन मंत्री गजेंद्र, वर्गाधिकारी देवेंद्र मिश्रा, प्रांत सह मंत्री अभिनव दीक्षित, अवधेश भदौरिया, जिला मंत्री आचार्य तेजस, जिला प्रचार-प्रसार प्रमुख रमाकांत सोनी उपस्थित रहे।