फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jalaun News ›   Indian history needs revision

भारतीय इतिहास को संशोधन की जरूरत

Sun, 10 Apr 2016 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
अमर उजाला ब्यूरो, उरई Updated Sun, 10 Apr 2016 11:31 PM IST
विज्ञापन
Indian history needs revision
अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित करते कार्यक्रम के सह संयोजक - फोटो : अमर उजाला
भारतीय इतिहास संकलन समिति कानपुर प्रांत का प्रथम अधिवेशन रविवार को शहर के सिटी सेंटर में हुआ। इसमें बुंदेलखंड के कई जनपदों के इतिहासकारों ने सहभागिता कर इतिहास के संशोधन की वकालत की। कहा गया कि मौजूदा इतिहास में मूल्यों का अभाव है। इतिहास देखने की प्रकृति भारतीय नहीं है। यही वजह है कि अंग्रेजी में जो लिखा है उसमें भगत सिंह
विज्ञापन


को क्रांतिकारी के बजाए आतंकवादी बताया गया है। इतिहास देखने की दृष्टि शौर्य और सम्मान वाली होनी चाहिए। मन के दुर्योधन को मारकर इतिहास को नए सिरे से प्रकाश के बीच देखना होगा।  अधिवेशन क ा शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके बाद इतिहासकारों ने कहा कि इतिहास किसी भारतीय ने नहीं लिखा इसलिए इसमें
विज्ञापन


भारतीय मूल्यों को स्थान नहीं मिला है। हमारे देश की पराक्रम, शौर्य को भी दूसरी नजर से देखा गया है। मुख्य अतिथि बुंदेलखंड विवि झांसी के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि हर भारतीय को मन के दुर्योधन को मारकर इतिहास को नए सिरे से देखना हेागा। इतिहास हमें अतीत और वर्तमान को जोड़ता है। इतिहास के पुनर्लेखन व पुन: प्रस्तुतिकरण पर जोर भी
विज्ञापन
विज्ञापन


दिया। मुख्य वक्ता डॉ. बाल मुकुंद पांडेय ने इतिहास संकलन पर कहा कि वामपंथी विचार के इतिहास को संशोधित कर एक ऐसे इतिहास को स्थापित करना होगा जो वास्तविकता को सामने रखे। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भाषा में जिस इतिहास को लिखा गया है उसमें मूल्यों की अनदेखी के साथ देश के शौर्य व पराक्रम की भी अनदेखी की गई। उन्होंने इतिहास संकलन

पर नए सिरे से विचार करने का आह्वान भी किया। संयोजक डॉ. प्रयागनारायण त्रिपाठी ने कहा कि बुंदेलखंड के इतिहास के लिए सभी इतिहासकारों को समर्पण भाव से काम करना होगा। ओमपाल, डॉ. शारदा अग्रवाल, डॉ. राजेश चंद्र पांडेय, रामेश्वर प्रसाद त्रिपाठी ने भी विचार रखे। अधिवेशन के दूसरे सत्र में तकनीकी विषय पर जोरदार चर्चा हुई। इसमें विशेषज्ञों ने अपने


शोधपत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के सह संयोजक अभय द्विवेदी ने अतिथियों को सम्मानित किया। इस मौके पर डॉ. सलिल तिवारी, डॉ. विनोद कुमार अहिरवार, हरदत्त द्विवेदी, डॉ. डीके सिंह, राजाराम व्यास, डॉ. नीलम मुकेश, डॉ. राजेंद्र पुरवार, रामशंकर द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed