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Jalaun News: जब पीडीए में सवर्णों के लिए जगह नहीं तो सपा में क्यों रहें
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फोटो - 12 कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी।
- फोटो : credit
उरई। कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी के भाजपा में शामिल होने से जिले की सियासत में हलचल तेज हो गई है। सपा की पीडीए राजनीति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा। गौरीगंज में भाजपा की सदस्यता ग्रहण करते हुए उन्होंने कहा, “जब पीडीए में हम सवर्णों के लिए जगह ही नहीं है तो फिर हम समाजवादी पार्टी में क्यों रहें।” उनके इस बयान के बाद कालपी विधानसभा के जातीय समीकरणों और संभावित चुनावी रणनीति को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसी कार्यक्रम में विधायक राकेश प्रताप सिंह और अभय प्रताप सिंह ने भी भाजपा की सदस्यता ली।
करीब 3.65 लाख मतदाताओं वाली कालपी विधानसभा में पाल और दलित समाज की संख्या सर्वाधिक बताई जा रही है। उपलब्ध स्थानीय आंकड़ों के मुताबिक, पाल समाज के करीब 70 हजार और दलित समाज के 80 हजार मतदाता हैं। ठाकुर 55 हजार, ब्राह्मण 40 हजार, यादव 35 हजार और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 28 हजार बताई जाती है। कुशवाहा, बनिया, निषाद और अन्य समुदाय भी चुनावी समीकरण में अहम हैं।
भाजपा के लिए सवर्ण मतदाताओं के साथ गैर-यादव पिछड़े और दलित वर्गों में स्वीकार्यता बढ़ाना चुनौती होगी। वहीं, सपा के सामने पीडीए के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को एकजुट रखने की परीक्षा होगी। बसपा की मौजूदगी और दलित मतों का संभावित बंटवारा भी मुकाबले को प्रभावित कर सकता है। (संवाद)
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ठाकुर मतदाताओं की नाराजगी चुनौती
विनोद चतुर्वेदी के सामने भाजपा में अपनी पकड़ मजबूत करने के साथ स्थानीय असंतोष दूर करने की चुनौती रहेगी। क्षेत्र के ठाकुर मतदाताओं की नाराजगी की चर्चा उनके लिए मुश्किल पैदा कर सकती है। ऐसे में भाजपा संगठन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभाव के साथ स्थानीय नेतृत्व की भूमिका भी अहम होगी।
जिले की माधौगढ़ विधानसभा सीट पर 2022 के चुनाव का उदाहरण भी राजनीतिक चर्चाओं में है। उस चुनाव में भाजपा के मूलचंद्र निरंजन ने सपा प्रत्याशी राघवेंद्र सिंह को हराया था। स्थानीय आकलन में योगी आदित्यनाथ की चुनावी सभा को भी अहम माना जाता है। हालांकि, माधौगढ़ के समीकरणों को कालपी पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।
पुराने दावेदारों को साधना होगा
विनोद चतुर्वेदी की भाजपा में एंट्री से कालपी में टिकट की दावेदारी को लेकर भी चर्चा तेज है। यदि पार्टी उन्हें उम्मीदवार बनाती है तो पुराने दावेदारों को साधना और संगठन में संतुलन बनाए रखना अहम होगा। ब्राह्मण, अन्य सवर्ण, गैर-यादव पिछड़े और दलित मतदाताओं के बीच समर्थन बढ़ाने के लिए उन्हें स्थानीय स्तर पर अपनी स्वीकार्यता साबित करनी होगी। फिलहाल भाजपा में उनकी एंट्री से चुनावी चर्चाओं को जरूर गति मिली है, लेकिन इसका वास्तविक असर प्रत्याशी चयन, स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं के रुख से ही स्पष्ट होगा।
कालपी में जातिवार मतदाताओं का अनुमान
पाल 70 हजार, दलित 80 हजार, ठाकुर 55 हजार, यादव 35 हजार, मुस्लिम 28 हजार, ब्राह्मण 40 हजार, कुशवाहा 20 हजार, बनिया 15 हजार, निषाद 10 हजार और अन्य जातियां 20 हजार। कुल मतदाता करीब 3.65 लाख बताए गए हैं। ये जातिवार आंकड़े स्थानीय अनुमान पर आधारित हैं, आधिकारिक आंकड़े नहीं।
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करीब 3.65 लाख मतदाताओं वाली कालपी विधानसभा में पाल और दलित समाज की संख्या सर्वाधिक बताई जा रही है। उपलब्ध स्थानीय आंकड़ों के मुताबिक, पाल समाज के करीब 70 हजार और दलित समाज के 80 हजार मतदाता हैं। ठाकुर 55 हजार, ब्राह्मण 40 हजार, यादव 35 हजार और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 28 हजार बताई जाती है। कुशवाहा, बनिया, निषाद और अन्य समुदाय भी चुनावी समीकरण में अहम हैं।
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भाजपा के लिए सवर्ण मतदाताओं के साथ गैर-यादव पिछड़े और दलित वर्गों में स्वीकार्यता बढ़ाना चुनौती होगी। वहीं, सपा के सामने पीडीए के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को एकजुट रखने की परीक्षा होगी। बसपा की मौजूदगी और दलित मतों का संभावित बंटवारा भी मुकाबले को प्रभावित कर सकता है। (संवाद)
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ठाकुर मतदाताओं की नाराजगी चुनौती
विनोद चतुर्वेदी के सामने भाजपा में अपनी पकड़ मजबूत करने के साथ स्थानीय असंतोष दूर करने की चुनौती रहेगी। क्षेत्र के ठाकुर मतदाताओं की नाराजगी की चर्चा उनके लिए मुश्किल पैदा कर सकती है। ऐसे में भाजपा संगठन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभाव के साथ स्थानीय नेतृत्व की भूमिका भी अहम होगी।
जिले की माधौगढ़ विधानसभा सीट पर 2022 के चुनाव का उदाहरण भी राजनीतिक चर्चाओं में है। उस चुनाव में भाजपा के मूलचंद्र निरंजन ने सपा प्रत्याशी राघवेंद्र सिंह को हराया था। स्थानीय आकलन में योगी आदित्यनाथ की चुनावी सभा को भी अहम माना जाता है। हालांकि, माधौगढ़ के समीकरणों को कालपी पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।
पुराने दावेदारों को साधना होगा
विनोद चतुर्वेदी की भाजपा में एंट्री से कालपी में टिकट की दावेदारी को लेकर भी चर्चा तेज है। यदि पार्टी उन्हें उम्मीदवार बनाती है तो पुराने दावेदारों को साधना और संगठन में संतुलन बनाए रखना अहम होगा। ब्राह्मण, अन्य सवर्ण, गैर-यादव पिछड़े और दलित मतदाताओं के बीच समर्थन बढ़ाने के लिए उन्हें स्थानीय स्तर पर अपनी स्वीकार्यता साबित करनी होगी। फिलहाल भाजपा में उनकी एंट्री से चुनावी चर्चाओं को जरूर गति मिली है, लेकिन इसका वास्तविक असर प्रत्याशी चयन, स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं के रुख से ही स्पष्ट होगा।
कालपी में जातिवार मतदाताओं का अनुमान
पाल 70 हजार, दलित 80 हजार, ठाकुर 55 हजार, यादव 35 हजार, मुस्लिम 28 हजार, ब्राह्मण 40 हजार, कुशवाहा 20 हजार, बनिया 15 हजार, निषाद 10 हजार और अन्य जातियां 20 हजार। कुल मतदाता करीब 3.65 लाख बताए गए हैं। ये जातिवार आंकड़े स्थानीय अनुमान पर आधारित हैं, आधिकारिक आंकड़े नहीं।