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कालनेमियों से सावधान रहें हिंदू : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
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कोंच। ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शनिवार को कोंच पहुंचे। उन्होंने 81 दिवसीय गविष्टि यात्रा के तहत गोसंरक्षण और सनातन संस्कृति पर अपने विचार रखे। शंकराचार्य ने हिंदू समाज से असली और नकली हिंदुओं की पहचान करने का आह्वान किया। उन्होंने सनातन परंपरा की मूल भावना के विपरीत बयान देने वालों से सावधान रहने को कहा। ऐसे लोगों को उन्होंने कालनेमि बताया और समाज को सतर्क रहने का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने गोमाता को राष्ट्र माता का दर्जा देने की मांग की और गोहत्या पर संत समाज के सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी।
मार्कंडेयश्वर तिराहे के समीप आयोजित स्वागत कार्यक्रम में शंकराचार्य ने कहा कि गाय हिंदू समाज के लिए केवल एक पशु नहीं, बल्कि माता के समान पूजनीय है। उन्होंने सनातन परंपरा में गाय के विशेष महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गविष्टि यात्रा का उद्देश्य गोमाता की रक्षा, संवर्धन और सनातन संस्कृति के संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करना है। गोहत्या और बूचड़खानों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि निरपराध गायों की हत्या होती रहे और संत समाज मौन बैठा रहे, यह संभव नहीं है। उन्होंने गोसंरक्षण के लिए जनजागरण के साथ आवश्यक होने पर सड़कों पर उतरने की बात कही। मीडिया से बातचीत में उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने सभी आरोपों को असत्य माना है।
शंकराचार्य ने कहा कि सनातन परंपरा में गाय का विशेष महत्व है। इसलिए उसे राष्ट्र माता का दर्जा दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि गविष्टि यात्रा गोरखपुर से शुरू हुई है। इसका मुख्य लक्ष्य गोमाता की रक्षा और सनातन संस्कृति का संवर्धन है। संत समाज गोहत्या के खिलाफ सक्रिय रहेगा।
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कार्यक्रम में अनिल वैद, प्रतिपाल सिंह गुर्जर, जमींपाल सिंह गुर्जर, राघवेंद्र तिवारी, प्रदीप मिश्रा, उज्ज्वल तिवारी, संजय रावत, प्रमोद शुक्ला, श्याम मोहन रिछारिया उपस्थित रहे।
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मार्कंडेयश्वर तिराहे के समीप आयोजित स्वागत कार्यक्रम में शंकराचार्य ने कहा कि गाय हिंदू समाज के लिए केवल एक पशु नहीं, बल्कि माता के समान पूजनीय है। उन्होंने सनातन परंपरा में गाय के विशेष महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गविष्टि यात्रा का उद्देश्य गोमाता की रक्षा, संवर्धन और सनातन संस्कृति के संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करना है। गोहत्या और बूचड़खानों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि निरपराध गायों की हत्या होती रहे और संत समाज मौन बैठा रहे, यह संभव नहीं है। उन्होंने गोसंरक्षण के लिए जनजागरण के साथ आवश्यक होने पर सड़कों पर उतरने की बात कही। मीडिया से बातचीत में उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने सभी आरोपों को असत्य माना है।
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शंकराचार्य ने कहा कि सनातन परंपरा में गाय का विशेष महत्व है। इसलिए उसे राष्ट्र माता का दर्जा दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि गविष्टि यात्रा गोरखपुर से शुरू हुई है। इसका मुख्य लक्ष्य गोमाता की रक्षा और सनातन संस्कृति का संवर्धन है। संत समाज गोहत्या के खिलाफ सक्रिय रहेगा।
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कार्यक्रम में अनिल वैद, प्रतिपाल सिंह गुर्जर, जमींपाल सिंह गुर्जर, राघवेंद्र तिवारी, प्रदीप मिश्रा, उज्ज्वल तिवारी, संजय रावत, प्रमोद शुक्ला, श्याम मोहन रिछारिया उपस्थित रहे।