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एसडीएम से की गंदगी की शिकायत
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कोंच। वसंत पंचमी के अवसर पर वागीश्वरी साहित्य परिषद् के तत्वावधान में स्थानीय बड़ा मील में राज्य स्तरीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें बाहर से आए कवियों ने सम सामयिक रचनाएं सुना श्रोताओं को आनंदित किया।
कवि सम्मेलन में कु. सृष्टि शर्मा ने वाणी वंदना प्रस्तुत की। झांसी से आए कवि वैभव दुबे ने पोखर न बन सके जलधि तो द्वेष अगाध कर बैठेे, खद्योत सूर्य सम हो न सके तो ये अपराध कर बैठेे रचना सुनाई। लखनऊ के कवि डॉ. बलराम सिंह राष्ट्रवादी ने रचना फिजाओं में परिंदा भी जहां परवाज करता है, जहां सूरज दिनों में रात में चंदा चमकता है सुनाई। संचालन कर रहे झांसी के अर्जुन सिंह चांद ने कहा सत्य पर झूठ का आचरण हो गया, मैला मैला सा अंत:करण हो गया। गढकुंडार से आए कवि रामनिवास ने आध्यात्मिक स्पर्श देते हुए रचना पाठ किया। विवेक बरसैंया गुरसरांय, कवयित्री पूजा तोमर ने श्रृंगार रस की रचना सुनाई। कवि संजीव दुबे झांसी ने क्रांतिकारी रचना आस्तीन के सांपों को सहन नहीं कर सकता हूं सुनाकर वाहवाही लूटी।
इस दौरान नरेंद्र मोहन मित्र, संतोष तिवारी सरल, भास्कर सिंह माणिक्य, नंदराम भावुक, दिनेश मानव, डॉ. हरिमोहन गुप्त, संजीव सरस, संजय, अरुण कुमार वाजपेयी, मोहनदास नगाइच, सुनीलकांत तिवारी, मुन्ना, राजेंद्र निगम, सत्यार्थ पाठक, हरिश्चंद्र तिवारी, नरोत्तम दास स्वर्णकार, साकेत शांडिल्य, राघवेंद्र तिवारी, केके यादव, दिनेश सोनी, प्रह्लाद सोनी, किशोर सिंह यादव, विजय रावत, पंकज तिवारी, नरसिंह गहरवार, मौैजूद रहे। आनंद शर्मा अखिल ने कवियों का स्वागत करते हुए आभार जताया। डॉ. एलआर श्रीवास्तव, ब्रजेंद्र मयंक आदि भी मंचस्थ रहे। संस्था अध्यक्ष ओंकारनाथ पाठक की अध्यक्षता, सुरेशचंद्र गुप्ता के मुख्य अतिथि रहे।
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कवि सम्मेलन में कु. सृष्टि शर्मा ने वाणी वंदना प्रस्तुत की। झांसी से आए कवि वैभव दुबे ने पोखर न बन सके जलधि तो द्वेष अगाध कर बैठेे, खद्योत सूर्य सम हो न सके तो ये अपराध कर बैठेे रचना सुनाई। लखनऊ के कवि डॉ. बलराम सिंह राष्ट्रवादी ने रचना फिजाओं में परिंदा भी जहां परवाज करता है, जहां सूरज दिनों में रात में चंदा चमकता है सुनाई। संचालन कर रहे झांसी के अर्जुन सिंह चांद ने कहा सत्य पर झूठ का आचरण हो गया, मैला मैला सा अंत:करण हो गया। गढकुंडार से आए कवि रामनिवास ने आध्यात्मिक स्पर्श देते हुए रचना पाठ किया। विवेक बरसैंया गुरसरांय, कवयित्री पूजा तोमर ने श्रृंगार रस की रचना सुनाई। कवि संजीव दुबे झांसी ने क्रांतिकारी रचना आस्तीन के सांपों को सहन नहीं कर सकता हूं सुनाकर वाहवाही लूटी।
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इस दौरान नरेंद्र मोहन मित्र, संतोष तिवारी सरल, भास्कर सिंह माणिक्य, नंदराम भावुक, दिनेश मानव, डॉ. हरिमोहन गुप्त, संजीव सरस, संजय, अरुण कुमार वाजपेयी, मोहनदास नगाइच, सुनीलकांत तिवारी, मुन्ना, राजेंद्र निगम, सत्यार्थ पाठक, हरिश्चंद्र तिवारी, नरोत्तम दास स्वर्णकार, साकेत शांडिल्य, राघवेंद्र तिवारी, केके यादव, दिनेश सोनी, प्रह्लाद सोनी, किशोर सिंह यादव, विजय रावत, पंकज तिवारी, नरसिंह गहरवार, मौैजूद रहे। आनंद शर्मा अखिल ने कवियों का स्वागत करते हुए आभार जताया। डॉ. एलआर श्रीवास्तव, ब्रजेंद्र मयंक आदि भी मंचस्थ रहे। संस्था अध्यक्ष ओंकारनाथ पाठक की अध्यक्षता, सुरेशचंद्र गुप्ता के मुख्य अतिथि रहे।
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