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पांच साल को पति चुना है, परमानेंट निकाह नही...
अमर उजाला जालौन
Updated Sun, 19 Mar 2017 12:12 AM IST
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गल्ला मंडी में होली मिलन समारोह में काव्य पाठ करते कवि।
- फोटो : अमर उजाला
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रंगपंचमी पर गल्ला मंडी समिति के तत्वावधान में राधाकृष्ण मंदिर गल्ला मंडी में कवि गोष्ठी और होली मिलन समारोह आयोजित किया गया। कवियों ने अपनी रचनाओं के रंग से लोगों को सराबोर कर दिया। किसी ने राजनीति पर कटाक्ष किया तो किसी ने वर्तमान परिवेश पर। कविताएं सुनकर लोग मंत्रमुग्ध हो गए। जमकर ठहाके लगाए। इस दौरान एक-दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं।
रंगोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत कोेंच के कवि सरस की वाणी वंदना से हुई। इसके बाद भक्ति व शृंगार की रचना पढ़ी, मैं समय के चक्र सा चलता रहा, रोज आता, रोज मैं ढलता रहा। साथ में कुरान, गीता रख सकूं ख्वाव मेरी आंखों में पलता रहा। इसके बाद खकसीस से आए हास्य व्यंग के कवि करीम खां करीम ने अपने हास्य व्यंगों से लोटपोट कर दिया। कृपाराम कृपालु ने काव्य पाठ किया कि तुम्हें हमारी चाह नहीं तो हमको भी परवाह नहीं है, पांच साल को पति चुना है, परमानेंट निकाह नहीं है।
इसके बाद प्रदीप महेश्वरी ने कई मुक्तक सुनाए। संचालन विनोद गौतम ने किया। सुनाया कि फिर आए सुहाने दिन,दिवाने दिन। वीरेंद्र तिवारी, ओमनारायन गेड़ा ने भी काव्य पाठ किया। अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता यज्ञदत्त त्रिपाठी ने की। राजीव महेश्वरी, संजीव, अनूप महेश्वरी, संजीव दुबे, मुकेश दीवौलिया, ब्रजकिशोर राजपूत, राघवेंद्र सिंह परिहार भी मौजूद रहे।
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रंगोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत कोेंच के कवि सरस की वाणी वंदना से हुई। इसके बाद भक्ति व शृंगार की रचना पढ़ी, मैं समय के चक्र सा चलता रहा, रोज आता, रोज मैं ढलता रहा। साथ में कुरान, गीता रख सकूं ख्वाव मेरी आंखों में पलता रहा। इसके बाद खकसीस से आए हास्य व्यंग के कवि करीम खां करीम ने अपने हास्य व्यंगों से लोटपोट कर दिया। कृपाराम कृपालु ने काव्य पाठ किया कि तुम्हें हमारी चाह नहीं तो हमको भी परवाह नहीं है, पांच साल को पति चुना है, परमानेंट निकाह नहीं है।
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इसके बाद प्रदीप महेश्वरी ने कई मुक्तक सुनाए। संचालन विनोद गौतम ने किया। सुनाया कि फिर आए सुहाने दिन,दिवाने दिन। वीरेंद्र तिवारी, ओमनारायन गेड़ा ने भी काव्य पाठ किया। अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता यज्ञदत्त त्रिपाठी ने की। राजीव महेश्वरी, संजीव, अनूप महेश्वरी, संजीव दुबे, मुकेश दीवौलिया, ब्रजकिशोर राजपूत, राघवेंद्र सिंह परिहार भी मौजूद रहे।
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