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दामाद को मारने के लिए दौड़ा ससुर, पुलिस ने बचाया
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महेंद्र से पूछताछ करती पुलिस
- फोटो : ORAI
एट/कोटरा। कोटरा के छिरावली गांव में दो बच्चियों की उसकी मां के हाथों हुई हत्या के मामले में उस वक्त थोड़ा तनाव हो गया, जब घटना की जानकारी पाकर महेंद्र का ससुर शिवनाथ कोंच से गांव पहुंचा तो भीड़ के सामने ही आग बबूला होकर वह अपने दामाद को मारने के लिए दौड़ पड़ा।
किसी तरह पुलिस और ग्रामीणों ने उसे पकड़कर अलग किया। शिवनाथ चिल्ला रहा था, महेंद्र के कारण ही उसकी बिटिया की जिंदगी बर्बाद हो गई। उसकी दोनों बच्चियां हमेशा के लिए उससे जुदा हो गई। वहीं महेंद्र का कहना है कि दोपहर के वक्त भी शिवनाथ का फोन उसके मोबाइल पर आया था, जिसमें वह गाली गलौज कर रहा था। पत्नी कुछ दिन पहले ही दो महीने तक मायके रहकर आई थी और अब दोबारा जाने की जिद कर रही थी।
खुद भी जान देना चाहती थी प्रतिमा
दोनों बच्चियों को मौत की नींद सुलाने के बाद उनकी मां प्रतिमा ने भी आत्महत्या की कोशिश की थी। जिसके चलते ही उसने अपना सिर दीवार की बजाए पत्थर की चक्की पर पटका था ताकि उसके प्राण निकल सके लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
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दोनों बच्चियों को कंधे पर घुमाते थे बाबा
दोनों बच्चियों माही और रोशनी की मौत से पिता महेंद्र के अलावा उनके बाबा कुंवर भी खासे दुखी थे। बाबा ने बताया कि दोनों उनकी लाड़ली थी और रोज सुबह वे उन दोनों को अपने कंधों पर बैठाकर घुमाते थे।
अब किसके सहारे जीवन बिताएगा
दीवार से सिर टिकाकर बिलखते महेंद्र की जुबां से सिर्फ इतना ही निकल रहा था कि फूल सी बेटियां अब रही नहीं, प्रतिमा का भी आगे क्या होगा पता नहीं। ऐसे में वह अब किसके सहारे और कैसे जीएगा।
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किसी तरह पुलिस और ग्रामीणों ने उसे पकड़कर अलग किया। शिवनाथ चिल्ला रहा था, महेंद्र के कारण ही उसकी बिटिया की जिंदगी बर्बाद हो गई। उसकी दोनों बच्चियां हमेशा के लिए उससे जुदा हो गई। वहीं महेंद्र का कहना है कि दोपहर के वक्त भी शिवनाथ का फोन उसके मोबाइल पर आया था, जिसमें वह गाली गलौज कर रहा था। पत्नी कुछ दिन पहले ही दो महीने तक मायके रहकर आई थी और अब दोबारा जाने की जिद कर रही थी।
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खुद भी जान देना चाहती थी प्रतिमा
दोनों बच्चियों को मौत की नींद सुलाने के बाद उनकी मां प्रतिमा ने भी आत्महत्या की कोशिश की थी। जिसके चलते ही उसने अपना सिर दीवार की बजाए पत्थर की चक्की पर पटका था ताकि उसके प्राण निकल सके लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
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दोनों बच्चियों को कंधे पर घुमाते थे बाबा
दोनों बच्चियों माही और रोशनी की मौत से पिता महेंद्र के अलावा उनके बाबा कुंवर भी खासे दुखी थे। बाबा ने बताया कि दोनों उनकी लाड़ली थी और रोज सुबह वे उन दोनों को अपने कंधों पर बैठाकर घुमाते थे।
अब किसके सहारे जीवन बिताएगा
दीवार से सिर टिकाकर बिलखते महेंद्र की जुबां से सिर्फ इतना ही निकल रहा था कि फूल सी बेटियां अब रही नहीं, प्रतिमा का भी आगे क्या होगा पता नहीं। ऐसे में वह अब किसके सहारे और कैसे जीएगा।

घटना के बाद घर के बाहर लगी भीड़ मौजूद पुलिस बल- फोटो : ORAI

ति महेंद्र- फोटो : ORAI