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हर साल जून में ही क्यों टूटता है पुल

Mon, 20 Jun 2016 11:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
अमर उजाला ब्यूरो, उरई Updated Mon, 20 Jun 2016 11:01 PM IST
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Every year in June, the bridge breaks even
जर्जर पुल
कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग-86 पर स्थित यमुना का पुल हर वर्ष जून के महीने में ही क्षतिग्रस्त हो जाता है। इसे लेकर अब यह आशंका प्रबल होती जा रही है कि कहीं इसके पीछे कोई बड़ा खेल तो नहीं है। वास्तव में ओवरलोड वाहनों की आवाजाही से पुल क्षतिग्रस्त हो रहा है या इसे जानबूझकर क्षतिग्रस्त किया जा रहा है। वैसे भी इस रूट पर बड़ी संख्या में मौरंग भरे ट्रकों का आना जाना लगा रहता है
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जिसमें से अधिकतर अवैध रूप से मौरंग को ओवरलोड कर यहां से गुजरते हैं।  सूत्रों की मानें तो इस सब के पीछे मौरंग माफिया का बड़ा खेल चल रहा है। मौरंग माफिया ठीक बरसात के पूर्व पुल को क्षतिग्रस्त कर कानपुर क्षेत्र में मौरंग की भारी कमी पैदा कर देते हैं। फिर ग्राहकों से पुल के टूटने का हवाला देते हुए और लंबा चक्कर लगाने की बात कहकर कानपुर की ओर ही डंप किए हुए मौरंग को
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लगभग दुगुने दामों पर बेच देते हैं। सूत्रों की माने तो इस बार भी मौरंग माफिया की ओर से यमुना नदी के दूसरी तरफ कानपुर की ओर दो महीने पहले से ही बड़े पैमाने पर हजारों ट्रक बालू डंप की जा चुकी है। ऐसे में इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की भी जरूरत है। हालांकि प्रशासनिक अधिकारी इस बारे में खुल कर बोलने को तैयार नहीं हैं।
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ऐसे होता है खेल
हर वर्ष अप्रैल से हमीरपुर से कानपुर की ओर बड़े पैमाने पर मौरंग डंप करने का काम शुरू कर दिया जाता है। इसकेे बाद ओवरलोड ट्रक को पुल पर खड़ा करके जैक चढ़ा दिया जाता है। इससे पुल की स्लैब टूटती है। इसके बाद पुल टूट जाता है। इस दौरान इस बात का ध्यान रखा जाता है कि पुल एकदम न टूटने पाए। साथ ही पुल टूटने की घटना लोगों को स्वाभाविक लगे।

ध्यान देने वाले वाली बात
-यमुना केे पहले बना बेतवा पुल ज्यादा पुराना है, फिर भी यह क्यों नहीं टूटता जबकि ओवरलोड ट्रक पहले इसे ही पार करते हैैं।
-यदि पुल के निर्माण में खामी है तो पुल बनाने वाली कंपनी पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।
-यदि केवल ट्रक ओवरलोडिंग का मामला है तो प्रशासन ट्रकों का चालान क्यों नहीं करता।
-हर बार बारिश के ठीक पहले ही क्योें टूट जाता है पुल।

कब-कब टूटा पुल
घटना                             तारीख
पहली बार 2009 में             14 जून
दूसरी बार 2011                10 जून
तीसरी बार 2013                21 जून
चौथी बार 2015                 19 जून            
पांचवी बार 2016                19 जून


वर्जन
पुलों के कृत्रिम रूप से खराब करने की बात हमारे संज्ञान में नहीं है। वैसे कालपी और हमीरपुर के पुल 70-80 के दशक के पुल है। इनके डिजाइन पुराना हो चुका है और इस डिजाइन पर अब नए पुल बनने बंद हो चुके हैं। पुलों के खराब होने की दशा में प्रशासन का प्रेसर रहता है कि जल्द से जल्द इन पुलों को चालू कराया जाए। ऐेसे में मात्र रिपेयर का काम ही हो पाता है। वैसे इन पुलाें को कम से कम छह महीने तक बंद कर नए ढांचे और डिजाइन के साथ बनाने की जरूरत है। तब जाकर अगले कुछ वर्षों तक इनपर आवाजाही सामान्य रह सकेगी।  
                                                      बीएन तिवारी, जनसंपर्क अधिकारी

                                                          राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण
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