फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jalaun News ›   Doctors are on strike, attendants have glucose bottles in their hands

Jalaun News: डॉक्टर हड़ताल पर, तीमारदारों के हाथ में ग्लूकोज की बोतल

Fri, 23 Aug 2024 02:01 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन Updated Fri, 23 Aug 2024 02:01 AM IST
विज्ञापन
Doctors are on strike, attendants have glucose bottles in their hands
उरई। सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों को काम पर लौटने की सलाह देकर सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाने का आश्वासन दिया है। वहीं, उरई मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर लगातार हड़ताल पर हैं। रोजाना विरोध-प्रदर्शन कर अपने लिए सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। उन्होंने नुक्कड़ नाटक कर मरीजों को भी कोलकाता घटना से रूबरू कराया। कई दिन की हड़ताल से मरीजों को भी परेशानी हो रही है। उन्हें इलाज देरी से मिल पा रहा है।
विज्ञापन

कोलकाता में जूनियर डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी की घटना के बाद लगातार देश में विरोध जारी है। डॉक्टर रोजाना अलग-अलग ढंग से विरोध दर्ज करवाकर कोलकाता घटना पर कठोर कार्रवाई और अपनी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। गुरुवार को मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों और छात्र छात्राओं ने विरोध-प्रदर्शन किया। पहले नारेबाजी की और कोलकाता घटना पर न्याय की मांग की। इसके बाद नुक्कट नाटक के जरिए उन्होंने कोलकाता घटना के साथ अन्य घटनाओं की जानकारी दी। छात्राओं ने जो हकीकत बयां की तो उसे देखकर मरीज भी भावुक हो गए।
विज्ञापन



डॉक्टरों की मांग
डॉ. रेनू ने बताया कि डॉक्टरों की सुरक्षा जब नहीं हो पा रही है तो कैसे किसी का इलाज हो पाएगा। अगर अभी कोई कदम नहीं उठाए गए तो अपराधी बढ़ते चले जाएंगे। जब तक न्याय नहीं मिल जाएगा, तब तक विरोध जारी रहेगा। डॉ. शगुन मिश्रा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में भी महिला डॉक्टर खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं। कई बार यहां पर भी मारपीट, छेड़छाड़ की घटना हो चुकी हैं। इसलिए हर हाल में सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट लागू होना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


इलाज के लिए परेशान हो रहे मरीज
उरई। डॉक्टरों का लगातार विरोध जारी है। जिससे स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर भी असर साफ दिख रहा है। मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर व स्टाफ काम पर नहीं लौट रहा है। जिससे लगातार मरीज भी परेशान हो रहे हैं। पर्चा बनवाने के लिए दो बजे तक मरीजों की भीड़ जमा हो रही है। जो इमरजेंसी में मरीज आ रहे हैं। उन्हें भी लेट इलाज मिल पा रहा है। बेड नहीं मिलने से मरीजों को स्ट्रेचर पर ही इलाज करवाना पड़ रहा है। मरीजों को भर्ती करवाने के लिए परिजनों को घंटों इंतजार करने पड़ रहा है। रोजाना ओपीडी और आभा ओपीडी के माध्यम से करीब 900 से एक हजार के बीच मरीज दिखाने के लिए पहुंच रहे हैं।

परिजनों की बात
रामचरण ने बताया कि उनके भाई का पैर टूट गया है। इलाज के लिए आए तो एक घंटे से अभी इलाज तो कोई नहीं मिल पाया है। एक्सरे होने के लिए भेजा है। किसी डॉक्टर ने नहीं देखा है। बताया गया कि डॉक्टर हैं नहीं, इस लिए इलाज में देरी होगी। सिलेश ने बताया कि उनकी माता मालती देवी की तबीयत खराब हुई है। इलाज के लिए आए तो भर्ती नहीं किया गया है। बोतल चढ़ाने के लिए हाथ में दे दी है। स्टाफ ने बताया कि अभी बेड खाली नहीं है। स्टॉफ कम होने से परेशानी हो रही है।


वर्जन-
मरीजों को इलाज के लिए किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो रही है। सीनियर डॉक्टरों के साथ बैठक लगातार हो रही है। जो इलाज के लिए पूरा सहयोग कर रहे हैं। मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए प्रबंध किए गए हैं। -अरविंद त्रिवेदी, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज उरई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed