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बच्चों की विकलांगता ने छीन ली खुशियां

Wed, 29 Jun 2016 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, जालौन
अमर उजाला ब्यूरो, जालौन Updated Wed, 29 Jun 2016 11:51 PM IST
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Disability snatched the happiness of children
विकलांग बच्चों के साथ डीएम कार्यालय से लौटता परिवार। - फोटो : अमर उजाला

खुशहाल जीवन जी रहे दंपति की बदकिस्मती तो देखिए कि तीन बेटे मसकुलर डसट्रफी(मासपेशियों में दुर्विकास) रोग से निशक्त हो गए तो एक सड़क दुर्घटना में। इतना ही नहीं निगम की नौकरी भी छूट गई और गांव में सरकार की जो सुवधिाएं मिल रही थी उस पर भी ब्रेक लग गया।

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इससे दंपति परेशान हो गया और बुधवार को जिला प्रशासन के सामने अपने बच्चों के साथ पहुंचा और पूरी दास्तां सुनाई। इस पर जिलाधिकारी ने लोहिया आवास के साथ 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले निशक्त लड़कों को पेंशन दिलाने का भरोसा दिया।
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गौरतलब हो कि माधौगढ़ क्षेत्र के गोरा चिरइया गांव निवासी सुशील कुमार व उसकी पत्नी शांति देवी बदकिस्मती पर आंसू बहा रहे है। सबसे पहले बड़ा बेटा सूर्या जन्म के चार साल बाद मांसपेशियों में दुर्विकास का शिकार हो गया। इसके बाद प्रशांत व हिमांशु भी चपेट में आ गया और धीरे-धीरे कमजोर होने लगे।
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अब स्थिति यह है कि दो बच्चे तो उठ बैठ भी नहीं पा रहे है। बदकिस्मती ने इसके बाद भी पीछा नहीं छोड़ा सबसे छोटा बेटा अनुज एक सड़क हादसे में विकलांग हो गया। परेशान दंपति बुधवार को जिलाधिकारी संदीप कौर से मिला।

डीएम ने उसकी हालत को देखते हुए तत्काल रायफल क्लब से पांच हजार रुपये और अपनी जेब से भी पांच हजार रुपये की आर्थिक मदद दी। लोहिया आवास, अंत्योदय कार्ड बनवाने का भरोसा दिया। इसी के साथ सीएमओ को जांच कर सभी के विकलांग प्रमाण पत्र बनाने के निर्देश दिए है। उन्होंने दंपति को भरोसा दिया कि हर संभव मदद दिलाएंगी।
इंसेट-
जाबकार्ड भी हो गया निरस्त
सुशील को मृतक आश्रित कोटा से हथकरघा निगम उरई में सेल्समैन की नौकरी मिली थी। किस्मत साथ नहीं थी लिहाजा वह भी जाती रही। गांव में मेहनत मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करने लगा। इस दौरान उसका जॉब कार्ड बन गया, लेकिन उसे भी निरस्त कर दिया गया। राशन की सूची से भी नाम काट दिया गया। विकलांग बच्चों का प्रमाण पत्र भी नहीं बन सका। बड़ा बेटा पेंशन पाने की उम्र का है फिर भी पेंशन नहीं मिल रही।


आनुवांशिक होती है बीमारी
जिला अस्पताल के सर्जन डा.एसके तिवारी का कहना है कि मांसपेशियों में दुर्विकास रोग आनुवांशिक होता है। इसमें मांसपेशियां कमजोर होती चली जाती है और एक समय काम करना बंद कर देती है। ग्रोथ रुक जाती है। इससे पीड़ित की जान को भी खतरा रहता है और उपचार नियमित न कराया गया तो जान का जोखिम रहता है।

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