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भोर भयो छठ मइया, जागा हो जागो जागो...
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छठ पूजा के दौरान सूर्य निकलने के इंतजार में खड़े बिहारी समाज के लोग।
- फोटो : ORAI
उरई। चार दिवसीय छठ पूजा के अंतिम दिन रविवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर बिहारी व पूर्वांचल के लोगों ने छठ पर्व मनाया। रामकुंड पर सैकड़ों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने उत्साह व आस्था के साथ सूर्य को अर्घ्य दिया। अर्घ्य देते वक्त बच्चे आतिशबाजी छुड़ाकर डांस करते रहे। महिलाओं ने छठ संबंधित गीत भोर भयो छठ मइया, जागा हो जागो जागो। भाग्य जगा दो, दुख संताप मिटा दो। रऊआ से हाथ जोड़ी, जल्दी निकली हे सूर्य देव। उगा हो सूरज देव, भइला अरग के बेर। केला फरेला धवद से, सुग्गा मंडराय, चल चल सखी छठ मइया के केर पुजनवा, चल चस सखीया हो लेले कशईली पानवा, जैसे गीत गाए।
चार दिवसीय छठ पूजा का रविवार को आखिरी दिन था। सुबह चार बजे से ही बड़ी संख्या में बिहारी एवं पूर्वांचल के लोग छठ पूजा करने के लिए रामकुंड पर पूजा सामग्री, बांस की बनी टोकरी, सूप, हल्दी, अदरक, नीबू, ईख, मूली, गाय का दूध, सुपारी, पान का पत्ता, केला, नारियल, सेब, अनार, अमरूद, सिंघाड़ा, शरीफा, मुसम्मी आदि लेकर पहुंच गए और सूर्योदय का इंतजार करने लगी। जैसे ही लालिमा लिए सूर्य देव के दर्शन हुए तो सभी के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई। महिलाओं ने प्रार्थना की कि हे सूर्यदेव आप ऐसे ही पूरे जगत को प्रकाशमान करते रहें। परिवार के सभी बड़े बुजुर्गों व बच्चों को खुशहाल बनाए रखें। इसके बाद सभी ने एक दूसरे को प्रणाम कर प्रसाद ग्रहण किया।
छठ पूजा समिति के अध्यक्ष संजय साहनी बताते है कि छठ पूजा के लिए शुद्ध मन व वचन का होना जरूरी है। इसमें किसी प्रतिमा या मंदिर की आवश्यकता नहीं होती है। बल्कि प्रकृति, सूर्य, भूमि व जल की पूजा होती है। प्रकृति से सभी के स्वस्थ व समृद्धि की कामना की जाती है। संजीव साहनी ने बताया कि कार्तिक मास की छठी को मनाया जाने वाला यह पर्व समाज को एकजुट होने की प्रेरणा देता है। आज सूर्य पूजा के बाद यह व्रत समाप्त हो गया। इस दौरान संजीव साहनी, अमन, सुमन, श्वेता, हर्षिता, मनीषा, डिंपल, आराधना, मीना, दीनानाथ, नित्यप्रकाश, तारकेश्वर, डा. राजीव सिंह, मुन्नी, मंजू, कंचन, हेमंत, इंदु, सीमा, शिवकुमार, सुधाकर, शैलेंद्र, हरिओम, ओपी श्रीवास्तव, वेदप्रकाश, अंकित, शिवकुमार, सुशील आदि मौजूद रहे।
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चार दिवसीय छठ पूजा का रविवार को आखिरी दिन था। सुबह चार बजे से ही बड़ी संख्या में बिहारी एवं पूर्वांचल के लोग छठ पूजा करने के लिए रामकुंड पर पूजा सामग्री, बांस की बनी टोकरी, सूप, हल्दी, अदरक, नीबू, ईख, मूली, गाय का दूध, सुपारी, पान का पत्ता, केला, नारियल, सेब, अनार, अमरूद, सिंघाड़ा, शरीफा, मुसम्मी आदि लेकर पहुंच गए और सूर्योदय का इंतजार करने लगी। जैसे ही लालिमा लिए सूर्य देव के दर्शन हुए तो सभी के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई। महिलाओं ने प्रार्थना की कि हे सूर्यदेव आप ऐसे ही पूरे जगत को प्रकाशमान करते रहें। परिवार के सभी बड़े बुजुर्गों व बच्चों को खुशहाल बनाए रखें। इसके बाद सभी ने एक दूसरे को प्रणाम कर प्रसाद ग्रहण किया।
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छठ पूजा समिति के अध्यक्ष संजय साहनी बताते है कि छठ पूजा के लिए शुद्ध मन व वचन का होना जरूरी है। इसमें किसी प्रतिमा या मंदिर की आवश्यकता नहीं होती है। बल्कि प्रकृति, सूर्य, भूमि व जल की पूजा होती है। प्रकृति से सभी के स्वस्थ व समृद्धि की कामना की जाती है। संजीव साहनी ने बताया कि कार्तिक मास की छठी को मनाया जाने वाला यह पर्व समाज को एकजुट होने की प्रेरणा देता है। आज सूर्य पूजा के बाद यह व्रत समाप्त हो गया। इस दौरान संजीव साहनी, अमन, सुमन, श्वेता, हर्षिता, मनीषा, डिंपल, आराधना, मीना, दीनानाथ, नित्यप्रकाश, तारकेश्वर, डा. राजीव सिंह, मुन्नी, मंजू, कंचन, हेमंत, इंदु, सीमा, शिवकुमार, सुधाकर, शैलेंद्र, हरिओम, ओपी श्रीवास्तव, वेदप्रकाश, अंकित, शिवकुमार, सुशील आदि मौजूद रहे।

रामकुंड में छठ पूजा के दौरान उगते सूर्य को अर्ध्य देते बिहारी समाज के लोग।- फोटो : ORAI
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