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अखिल भारतीय मुशायरे में कई नामचीन हस्तियों की रचनाओं पर झूमे श्रोता
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Mon, 25 Apr 2016 11:26 PM IST
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शेर पढ़ते राहत इदौरी।
- फोटो : अमर उजाला
बढ़कर एक रचनाएं और नाते पाक पढ़कर वाहवाही लूटी। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कवि डॉ. राहत इंदौरी ने अपनी रचना में सभी का खून शामिल है यहां की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदोस्तां थोड़ी है सुनाया। इसके पहले भी कई जाने माने कवियों और शायरों ने रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद सबसे पहले
कलीम दानिश कानपुरी ने नाते पाक पढ़ा। इसके बाद शबाना शबा ने इस तबाही में मुझे तेरी रजा लगती है, काम आती है दवा और न दुआ लगती है रचना सुनाई। शिराज तनवीर ने बुंदेलखंड के हालातों का अपनी कविता के माध्यम से बखान किया और पढ़ा, घास की रोटियां खाने में ताज्जुब कैसा, भूख पागल हो तो पत्थर भी नहीं छोड़ती। शायर शरीफ शाहवाज ने
इस तरह अजमते किरदार चली जाएगी, सर बचाओगे तो दस्तार चली जाएगी रचना सुनाई। इस पर उन्होंने काफी तालियां बटोरीं। कवि अर्जुन सिंह चांद की रचनाओं पर भी श्रोता झूम उठे। कमल हादवी ने मेरे वालिद को जब भी मेरा बेटा याद करता है तो लगता है फरिश्ते को फरिश्ता याद करता है, सुनाया। इसके अलावा उन्होंने हवा से कह दो यूं खुद को आजमाके
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दिखाए, बहुत चिराग बुझाती है, एक जलाकर दिखाए। इस रचना पर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। शबीना अदीब, जौहर कानपुरी ने गजल और गीत के माध्यम से सम्मेलन को नई दिशा दी। सबसे अंत में जाने माने शायर डॉ. राहत इंदौरी मंच पर आए तो उनका तालियों के साथ जोरदार स्वागत किया गया। उन्होंने श्रोताओं की मंशा को भांपकर सुनाया, सभी का
खून है शामिल यहां की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदोस्तां थोड़ी है। इसके बाद उन्होंने सुनाया, लोग हर मोड़ पर रुक-रुककर संभलते क्यों हैं, इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं। इस पर उन्हें खूब तालियां मिलीं। इसके बाद तो उन्होंने अपने अंदाज में कई शेर और रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम का संचालन शायर शफीकुर्रहमान कश्फी, शायर नदीम फारुख ने
किया। कार्यक्रम में कृपाशंकर द्विवेदी बच्चू महाराज, एएसपी शक ील अहमद, पूर्व पालिकाध्यक्ष विजय चौधरी, अजहर बेग, नूर अफसर, शफीक खान, फीरोज, यूसुफ अंसारी, परवेज, संजू दुबे, अनवर बाबू, चांद बाबू, मुन्ना, हसीब, मुजीब, विवेक यादव आदि मौजूद रहे।
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कलीम दानिश कानपुरी ने नाते पाक पढ़ा। इसके बाद शबाना शबा ने इस तबाही में मुझे तेरी रजा लगती है, काम आती है दवा और न दुआ लगती है रचना सुनाई। शिराज तनवीर ने बुंदेलखंड के हालातों का अपनी कविता के माध्यम से बखान किया और पढ़ा, घास की रोटियां खाने में ताज्जुब कैसा, भूख पागल हो तो पत्थर भी नहीं छोड़ती। शायर शरीफ शाहवाज ने
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इस तरह अजमते किरदार चली जाएगी, सर बचाओगे तो दस्तार चली जाएगी रचना सुनाई। इस पर उन्होंने काफी तालियां बटोरीं। कवि अर्जुन सिंह चांद की रचनाओं पर भी श्रोता झूम उठे। कमल हादवी ने मेरे वालिद को जब भी मेरा बेटा याद करता है तो लगता है फरिश्ते को फरिश्ता याद करता है, सुनाया। इसके अलावा उन्होंने हवा से कह दो यूं खुद को आजमाके
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दिखाए, बहुत चिराग बुझाती है, एक जलाकर दिखाए। इस रचना पर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। शबीना अदीब, जौहर कानपुरी ने गजल और गीत के माध्यम से सम्मेलन को नई दिशा दी। सबसे अंत में जाने माने शायर डॉ. राहत इंदौरी मंच पर आए तो उनका तालियों के साथ जोरदार स्वागत किया गया। उन्होंने श्रोताओं की मंशा को भांपकर सुनाया, सभी का
खून है शामिल यहां की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदोस्तां थोड़ी है। इसके बाद उन्होंने सुनाया, लोग हर मोड़ पर रुक-रुककर संभलते क्यों हैं, इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं। इस पर उन्हें खूब तालियां मिलीं। इसके बाद तो उन्होंने अपने अंदाज में कई शेर और रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम का संचालन शायर शफीकुर्रहमान कश्फी, शायर नदीम फारुख ने
किया। कार्यक्रम में कृपाशंकर द्विवेदी बच्चू महाराज, एएसपी शक ील अहमद, पूर्व पालिकाध्यक्ष विजय चौधरी, अजहर बेग, नूर अफसर, शफीक खान, फीरोज, यूसुफ अंसारी, परवेज, संजू दुबे, अनवर बाबू, चांद बाबू, मुन्ना, हसीब, मुजीब, विवेक यादव आदि मौजूद रहे।