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‘पंचायतों के रिक्त पदों पर जल्द भर्तियां हों’

Jalaun Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
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उरई (जालौन)। ग्राम पंचायतों में रिक्त पदों पर भर्तियां न होने और काम के बढ़ते दबाव को लेकर ग्राम विकास अधिकारी संघ की बैठक हुई। शनिवार को जालौन ब्लाक में हुई बैठक में संघ के जिला संयुक्त मंत्री हरीश राठौर ने कहा कि जिले में 105 ग्राम विकास अधिकारियों के मुकाबले महज 53 कर्मचारी ही कार्य का संचालन कर रहे है। नतीजतन एक एक कर्मचारी को 12 से 18 ग्राम पंचायतों का विभिन्न योजनाओं का काम देखना पड़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि जिले में वीडीओ के 52 पद रिक्त है। कर्मचारियों को ग्राम्य विकास की कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन करना पड़ता है, लेकिन एक व्यक्ति 12 से 18 गांवों में कैसे योजनाओं का संचालन कर सकता है। जबकि शासनादेश में स्पष्ट है कि एक ग्राम विकास अधिकारी को 4 से अधिक पंचायतों का काम न देने का आदेश है। जिले में ग्राम्म विकास अधिकारियों की कमी के वाद भी आखिर भर्ती क्यों नहीं की जा रही है।
वीडीओ संघ के सतीश वर्मा ने कहा कि जनपद के खंड विकास अधिकारियों ने शासनादेश के विपरीत विकास खंड स्तर से ग्राम विकास अधिकारियों की ग्राम पंचायतों का आवंटन कई न्याय पंचायतों में कर दिया है। उनमें एक ग्राम पंचायत से दूसरी ग्राम पंचायतों का आवंटन कई न्याय पंचायतों में कर दिया है। उनमें एक ग्राम पंचायत से दूसरी ग्राम पंचायत की दूरी कम से कम 20 से 25 किलोमीटर है। इससे ग्राम विकास अधिकारियों के समक्ष दायित्वों की अधिकता एवं ग्राम पंचायतों के आपसी समायोजन न होने से विकास कार्य में कई समस्यायें पैदा हो रही है।
बैठक में मनोज गौतम ने बताया कि मनरेगा मांग आधारित अधिनियम है जिसे खंड विकास अधिकारियोें ने योजना में बदल दिया है। इसे लक्ष्य आधारित योजना बना दिया है। राज्य सरकार को मनरेगा के लिये एक ग्राम पंचायत में एक कर्मचारी की व्यवस्था की करनी चाहिए। यदि राज्य सरकार समय से भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ नहीं होती है तो केंद्र सरकार को भी मनरेगा की धनराशि में कटौती करनी चाहिए।
मनीष निरंजन ने बताया कि ग्राम विकास अधिकारियों के पास कई दायित्व होने पर भी जनगणना जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम में ड्यूटी लगा दी जाती है, जब कि जनपद में कई विभाग सिंचाई, नलकूप, राजस्व, स्वास्थ्य, कृषि के कर्मचारियों के पास कार्य कम होने पर ड्यूटी से अलग रखा जाता है। ग्राम्य विकास के कर्मचारियों की ड्यूटी राष्ट्रीय कार्यक्रमों में लगने से मनरेगा जैसी योजना काफी प्रभावित होगी। रमेश दुबे ने बताया कि आज आसमान छूती कमर तोड़ महंगाई में हम वेतन भोगी कर्मचारियों को अपनी गृहस्थी का भार उठाना मुश्किल हो रहा है, ऊपर से भ्रष्टाचार की मार ने हमारी मुश्किलें और भी बढ़ा दी है। ग्राम विकास अधिकारियों के दायित्व अधिक होने के कारण विकास खंड स्तर पर पाथिक, मासिक बैठकें आयोजित की जाये। जिला स्तर पर ग्राम विकास अधिकारियों की समस्याओं के निराकरण के लिये माह निर्देश जारी किये जाते है फिर भी कर्मचारियों के निराकरण के लिये जिलाधिकारी, विभागध्यक्ष द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे है।

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