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किस्तें तो ठीक, महंगाई पर भी हो लगाम
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उरई। मोदी सरकार के अंतरिम बजट में किसानों को सौगात मिली है। बजट में दो हेक्टेयर तक की जमीन के मालिक किसानों को सरकार की ओर से सालाना छह हजार रुपये देनी की बात कही गई है। यह रकम किसानों को तीन किस्तों में मिलेगी। इसके अलावा सरकार ने सभी किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड बनाने का भी एलान किया है। साथ ही समय से भुगतान करने पर तीन प्रतिशत की अतिरिक्त ब्याज माफी का प्रावधान है।
जिले के 2,50,350 किसानों में से 1,92, 012 किसानों को छह हजार रुपये सालाना का लाभ मिलेगा। सरकार ने लघु एवं सीमांत किसानों को निश्चित आय सहायता मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि शुरू करने की घोषणा की है। यह प्रोग्राम एक दिसंबर 2018 से लागू कर दिया गया है। किसानों को 31 मार्च तक किसानों को पहली किस्त मिल भी जाएगी। फिलहाल अंतरिम बजट से कोई खुश तो कोई नाखुश भी नजर आ रहा है। कहना है कि डीजल, बीज खाद के दामों में बढ़ोतरी पर भी अंकुश लगना चाहिए।
भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलराम लंबरदार ने बजट को किसानों के लिए छलावा बताया है। दो हजार रुपये की किस्तों में किसानों का क्या होगा। उन्होंने कहा कि सरकार खेत पर पानी का इंतजाम करें और किसान की उपज को बाजार मूल्य मिले, तभी उसका भला हो सकता है। जिस तरह कांग्रेस ने मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में बिना शर्त किसानों के दो लाख तक के कर्ज माफ किए हैं, उसी तरह यूपी में भी किसानों को लाभ दिया जाए। यूनियन प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह राजपूत ने इसे ऊंट के मुंह में जीरा बताया है।
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कदौरा की किसान चंदारानी का कहना है कि सरकार ने कुछ तो शुरुआत की है, इसका फायदा मिलेगा। हालांकि रकम बहुत कम है। कम से कम पांच हजार रुपये महीने का इंतजाम किया जाए ताकि किसान अपनी जरूरतें पूरी कर सकें और घरेलू समस्याओं से भी निपट सके। उन्होंने कहा कि किसानों विशेषकर महिला किसानों को सरकार विशेष छूट दें ताकि उनकी माली हालत सुधर सके।
मुहम्मदाबाद के किसान आमिर का कहना है कि किसानों को छह हजार रुपये देना अच्छा कदम है लेकिन इतने रुपये से किसान का कुछ नहीं होगा। खाद बीज व डीजल के दाम भी कम होने चाहिए। इन पर किसानों को सब्सिडी मिलनी चाहिए। किसानों को खेत तक पानी का इंतजाम होना चाहिए। इसके अलावा कर्जमाफी में लगी शर्तों को हटाकर एक कलम से सभी किसानों के कर्ज माफ होने चाहिए।
सरावन के किसान शिवपाल कुशवाहा का कहना है कि आजादी के बाद पहली बार किसी सरकार ने इस तरह किसानों के लिए सोचा है। हालांकि यह कम काफी कम है। फिर भी खुशी की बात यह है कि सरकार ने किसानों के लिए शुरूआत की है। वह सरकार के इस कदम की सराहना करते है। साथ ही चाहते हैं कि सरकार इस रकम को बढ़ाकर कम से कम पांच हजार रुपये महीना करे।
सीमांत किसान-1,35,259
लघु सीमांत किसान-56,753
अर्द्ध मध्यम किसान-36,562
मध्यम किसान-20.227
वृहद किसान-1,549
कुल किसान-2,50,350 किसान
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जिले के 2,50,350 किसानों में से 1,92, 012 किसानों को छह हजार रुपये सालाना का लाभ मिलेगा। सरकार ने लघु एवं सीमांत किसानों को निश्चित आय सहायता मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि शुरू करने की घोषणा की है। यह प्रोग्राम एक दिसंबर 2018 से लागू कर दिया गया है। किसानों को 31 मार्च तक किसानों को पहली किस्त मिल भी जाएगी। फिलहाल अंतरिम बजट से कोई खुश तो कोई नाखुश भी नजर आ रहा है। कहना है कि डीजल, बीज खाद के दामों में बढ़ोतरी पर भी अंकुश लगना चाहिए।
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भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलराम लंबरदार ने बजट को किसानों के लिए छलावा बताया है। दो हजार रुपये की किस्तों में किसानों का क्या होगा। उन्होंने कहा कि सरकार खेत पर पानी का इंतजाम करें और किसान की उपज को बाजार मूल्य मिले, तभी उसका भला हो सकता है। जिस तरह कांग्रेस ने मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में बिना शर्त किसानों के दो लाख तक के कर्ज माफ किए हैं, उसी तरह यूपी में भी किसानों को लाभ दिया जाए। यूनियन प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह राजपूत ने इसे ऊंट के मुंह में जीरा बताया है।
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कदौरा की किसान चंदारानी का कहना है कि सरकार ने कुछ तो शुरुआत की है, इसका फायदा मिलेगा। हालांकि रकम बहुत कम है। कम से कम पांच हजार रुपये महीने का इंतजाम किया जाए ताकि किसान अपनी जरूरतें पूरी कर सकें और घरेलू समस्याओं से भी निपट सके। उन्होंने कहा कि किसानों विशेषकर महिला किसानों को सरकार विशेष छूट दें ताकि उनकी माली हालत सुधर सके।
मुहम्मदाबाद के किसान आमिर का कहना है कि किसानों को छह हजार रुपये देना अच्छा कदम है लेकिन इतने रुपये से किसान का कुछ नहीं होगा। खाद बीज व डीजल के दाम भी कम होने चाहिए। इन पर किसानों को सब्सिडी मिलनी चाहिए। किसानों को खेत तक पानी का इंतजाम होना चाहिए। इसके अलावा कर्जमाफी में लगी शर्तों को हटाकर एक कलम से सभी किसानों के कर्ज माफ होने चाहिए।
सरावन के किसान शिवपाल कुशवाहा का कहना है कि आजादी के बाद पहली बार किसी सरकार ने इस तरह किसानों के लिए सोचा है। हालांकि यह कम काफी कम है। फिर भी खुशी की बात यह है कि सरकार ने किसानों के लिए शुरूआत की है। वह सरकार के इस कदम की सराहना करते है। साथ ही चाहते हैं कि सरकार इस रकम को बढ़ाकर कम से कम पांच हजार रुपये महीना करे।
सीमांत किसान-1,35,259
लघु सीमांत किसान-56,753
अर्द्ध मध्यम किसान-36,562
मध्यम किसान-20.227
वृहद किसान-1,549
कुल किसान-2,50,350 किसान