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भीतर लाएं आत्मविश्वास फिर बोलें ‘मैं सक्षम हूं’
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उरई। अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स महाभियान के अंतर्गत वंडर प्ले स्कूल और बीआरसी मड़ोरा के संयुक्त तत्वावधान में ‘मैं सक्षम हूं’ विषय पर संगोष्ठी हुई। जिसमें वक्ताओं ने महिलाओं और छात्राओं को बताया कि आज समाज में बेटा-बेटी का फर्क तेजी से खत्म हो रहा है। अब ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जहां नारी अपनी शक्ति का एहसास न करा रही हो। इसलिए छात्राओं को जरूरत है अपने भीतर आत्मविश्वास और साहस लाने की, जिसके बाद उन्हें अपराजिता बनने से कोई रोक नहीं सकेगा।
उरई स्थित वंडर प्ले स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में जिला प्रशिक्षण आयुक्त स्काउट गाइड डॉ. ममता स्वर्णकार ने कहा कि वैसे तो एक नाम के कई इंसान होते हैं, लेकिन उनकी मेहनत और उनके कार्य ही उनकी पहचान बनाते हैं। इसलिए छात्राओं को यदि अपनी पहचान बनानी है तो कुछ अलग करना होगा। आर्थिक रुप से सशक्त होने के लिए अपने पैरों पर खड़ा होना होगा।
इसके लिए सिर्फ स्वयं के भीतर ऊर्जा और काम के प्रति उत्साह लाने की जरूरत है, सिर्फ सफलता छात्राओं की मुट्ठी में होगी। बीआरसी की महिलाओं से डॉ. कल्पना श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें अपने अधिकारों को भी जानना होगा। कभी दूसरों के अनुसार स्वयं को न बदलें बल्कि अपनी योग्यता और अपने व्यक्तित्व की पहचान कर जीवन जीने का प्रयास करें। तभी जिंदगी में कुछ करने का अवसर प्राप्त हो सकेगा। इसके लिए अच्छी पुस्तकों और साहित्य की भी मदद ली जा सकती है। इस मौके पर अभय द्विवेदी, दीक्षा मिश्रा, मुस्कान तिवारी, स्वाती सिंह, सीता, निशी, मिलन आदि रहे।
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शिक्षिका प्रिया का कहना है कि समाज महिलाओं को आसानी से कुछ नहीं देता है, लेकिन अब समय बदल रहा है। लिहाजा बेटियों को भी अपने फैसले स्वयं करने का अधिकार मिलना चाहिए। इस दिशा में अपराजिता का प्रयास सराहनीय है।
राजकुमारी के मुताबिक, कार्यक्रम वाकई काफी अच्छा रहा। कम से कम महिलाओं को कोई मंच तो मिला, जहां पर वे खुलकर अपनी बात रख रही हैं। महिलाओं को न सिर्फ उनके अधिकार ही बल्कि उन्हें पाने के तरीके भी बताए गए।
प्रतीक्षा मिश्रा ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं जब तक हम अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठाएंगे, तब तक महिलाओं की कोई सुनने वाला नहीं है। इसलिए हमें भविष्य के लिए सोचना होगा और अपने अधिकारों को समाज से हासिल करना होगा।
शिक्षिका विनीता के अनुसार, बेटियां किसी से कम नहीं है, छात्राओं को इसे साबित करने की शुरूआत अपने घर से ही करनी होगी। अपने अभिभावकों को समझाएं कि वे भी भाई और पापा की तरह घर से निकलकर कुछ करना चाहती हैं।
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उरई स्थित वंडर प्ले स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में जिला प्रशिक्षण आयुक्त स्काउट गाइड डॉ. ममता स्वर्णकार ने कहा कि वैसे तो एक नाम के कई इंसान होते हैं, लेकिन उनकी मेहनत और उनके कार्य ही उनकी पहचान बनाते हैं। इसलिए छात्राओं को यदि अपनी पहचान बनानी है तो कुछ अलग करना होगा। आर्थिक रुप से सशक्त होने के लिए अपने पैरों पर खड़ा होना होगा।
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इसके लिए सिर्फ स्वयं के भीतर ऊर्जा और काम के प्रति उत्साह लाने की जरूरत है, सिर्फ सफलता छात्राओं की मुट्ठी में होगी। बीआरसी की महिलाओं से डॉ. कल्पना श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें अपने अधिकारों को भी जानना होगा। कभी दूसरों के अनुसार स्वयं को न बदलें बल्कि अपनी योग्यता और अपने व्यक्तित्व की पहचान कर जीवन जीने का प्रयास करें। तभी जिंदगी में कुछ करने का अवसर प्राप्त हो सकेगा। इसके लिए अच्छी पुस्तकों और साहित्य की भी मदद ली जा सकती है। इस मौके पर अभय द्विवेदी, दीक्षा मिश्रा, मुस्कान तिवारी, स्वाती सिंह, सीता, निशी, मिलन आदि रहे।
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शिक्षिका प्रिया का कहना है कि समाज महिलाओं को आसानी से कुछ नहीं देता है, लेकिन अब समय बदल रहा है। लिहाजा बेटियों को भी अपने फैसले स्वयं करने का अधिकार मिलना चाहिए। इस दिशा में अपराजिता का प्रयास सराहनीय है।
राजकुमारी के मुताबिक, कार्यक्रम वाकई काफी अच्छा रहा। कम से कम महिलाओं को कोई मंच तो मिला, जहां पर वे खुलकर अपनी बात रख रही हैं। महिलाओं को न सिर्फ उनके अधिकार ही बल्कि उन्हें पाने के तरीके भी बताए गए।
प्रतीक्षा मिश्रा ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं जब तक हम अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठाएंगे, तब तक महिलाओं की कोई सुनने वाला नहीं है। इसलिए हमें भविष्य के लिए सोचना होगा और अपने अधिकारों को समाज से हासिल करना होगा।
शिक्षिका विनीता के अनुसार, बेटियां किसी से कम नहीं है, छात्राओं को इसे साबित करने की शुरूआत अपने घर से ही करनी होगी। अपने अभिभावकों को समझाएं कि वे भी भाई और पापा की तरह घर से निकलकर कुछ करना चाहती हैं।