{"_id":"5c3a33eebdec22736c04b28d","slug":"41547318254-jalaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अन्ना गायों के गोपाला बने कोतवाल शिव गोपाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अन्ना गायों के गोपाला बने कोतवाल शिव गोपाल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उरई। चोरों को पकड़कर हवालात में बंद करती पुलिस को तो सभी ने देखा होगा पर क्या कभी कोई ऐसा पुलिस कर्मी दिखाई दिया जो किसानों के लिए सिरदर्द बने अन्ना मवेशियों को पकड़कर बाड़े में बंद कर रहा हो, यदि नहीं तो फिर जनपद में कोतवाल के पद पर कार्यरत शिव गोपाल के बारे में जानना बेहद जरूरी हो जाता है। शिव गोपाल इन दिनों अन्ना मवेशियों के गोपाला बने हुए हैं। नदीगांव, रेंढर और अब उरई कोतवाली में तैनाती होने पर अपराधियों के साथ साथ अन्ना मवेशियों का भी पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। जहां पर भी उन्हें अन्ना मवेशी दिखता है तो उसे पकड़कर बाड़े तक पहुंचाकर ही दम लेते हैं। वर्दी के साथ मवेशियों की धरपकड़ के उनके इन कार्यों की जनपद में काफी चर्चा है। महकमे के अधिकारी भी शिव गोपाल के कार्य की सराहना कर रहे हैं।
बता दें कि अन्ना मवेशी इन दिनों जनपद के किसानों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। खेतों की फसलें और हाईवे का यातायात चौपट करने के साथ-साथ किसानों की आत्महत्या की वजह तक बन रहे हैं। यहां तक कि मवेशियों को हांकने को लेकर किसानों का लड़ाई झगड़ा अब चौकी थानों तक पहुंचने लगा।
वर्तमान में उरई कोतवाली में तैनात एवं मूल रूप से फतेहपुर निवासी कोतवाल शिव गोपाल ने बताया कि पांच माह पूर्व जब सीतापुर से उनकी पहली पोस्टिंग जनपद के रेंढर थाने में हुई तो कोतवाली की बैठकों में सबसे अधिक समस्याएं किसान अन्ना मवेशी की ही लेकर आते थेे। बस, यहीं से कोतवाल शिव गोपाल ने भी मन बनाया कि वे इस समस्या से भी किसानों को निजात दिलाने का प्रयास करेंगे।
विज्ञापन
क्षेत्र में खलिहान की जमीन तलाशते हैं, फिर किसानों को एकत्र करते हैं। इसके बाद चंदा कराकर अपने इष्ट मित्रों से आर्थिक मदद लेकर लोहे के पिलर और तारों की व्यवस्था कराकर छोटे छोटे बाड़े बनवाते हैं, जहां पर खेतों में घूम रहे मवेशियों को पहुंचवाते हैं। किसानों को चारे पानी की व्यवस्था कराने के लिए कहा जाता है। इस चंदे में वह भी अपने हिस्से की धनराशि देते हैं। जब बाड़े में संख्या अधिक हो जाती है तो मवेशियों को गोशाला तक भेजने का भी इंतजाम किया जाता है।
नदीगांव में तैयार कराया 1 लाख का बाड़ा
शिव गोपाल ने बताया कि उनका प्रयास था कि नदीगांव क्षेत्र को अन्ना से पूरी तरह से मुक्त कराया जाए। इसके लिए राजीपुरा गांव में सबसे बड़ा बाड़ा बनवाया। जिसको बनवाने में करीब 1 लाख रुपये का खर्च आया। वहां अभी भी 150 से 200 मवेशी मौजूद हैं। जल्द डीएम से बाड़े का उद्घाटन कराने का भी प्रयास किया जाएगा।
तीन कोतवाली, 80 बाड़े, 2000 अन्ना मवेशी
शिव गोपाल ने बताया कि वे अभी तक उरई कोतवाली क्षेत्र के मड़ोरा, गढ़न, उसरगांव, कुठौंदा, बरहा, बरसेसी के अलावा नदीगांव के अकनीवा, पजौनिया, तूमरा, रुपपुरा और रेंढ़र के कुदारी, खकसीस, कमसेरा, डीहा आदि गांवों में 70 से 80 बाड़े बनवा चुके हैं। जिनमें करीब 2000-2500 मवेशियों को पहुंचाया जा चुका है।
एसडीएम और एसपी ने भी किया प्रोत्साहित
शिव गोपाल ने बताया कि अन्ना मवेशियों की धरपकड़ के लिए उनका एसपी अरविंद चतुर्वेदी और एसडीएम कोंच गुलाब सिंह ने पूरी तरह से प्रोत्साहन किया। एसडीएम ने उनसे कहा कि वे अभियान शुरू करें, हर मदद की जाएगी। एसपी ने भी क्षेत्र में अन्ना मवेशियों की समस्या के निदान पर उनके प्रयासों को सराहा है।
किसानों के लिए दिनचर्या के 7 घंटे भी दे रहे
शिव गोपाल के मुताबिक, आज भी वे उरई कोतवाली में रहते हुए दोपहर के 2 से 4 बजे का समय ग्रामीण इलाकों में जाकर किसानों के बीच देते हैं और समस्या पर चर्चा करते हैं। इसके अलावा किसानों से बोल रखा है कि रात 9 से 2 बजे तक कभी भी उनसे फोन पर बात कर अपनी समस्या रख सकते हैं।
विज्ञापन
बता दें कि अन्ना मवेशी इन दिनों जनपद के किसानों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। खेतों की फसलें और हाईवे का यातायात चौपट करने के साथ-साथ किसानों की आत्महत्या की वजह तक बन रहे हैं। यहां तक कि मवेशियों को हांकने को लेकर किसानों का लड़ाई झगड़ा अब चौकी थानों तक पहुंचने लगा।
विज्ञापन
वर्तमान में उरई कोतवाली में तैनात एवं मूल रूप से फतेहपुर निवासी कोतवाल शिव गोपाल ने बताया कि पांच माह पूर्व जब सीतापुर से उनकी पहली पोस्टिंग जनपद के रेंढर थाने में हुई तो कोतवाली की बैठकों में सबसे अधिक समस्याएं किसान अन्ना मवेशी की ही लेकर आते थेे। बस, यहीं से कोतवाल शिव गोपाल ने भी मन बनाया कि वे इस समस्या से भी किसानों को निजात दिलाने का प्रयास करेंगे।
विज्ञापन
क्षेत्र में खलिहान की जमीन तलाशते हैं, फिर किसानों को एकत्र करते हैं। इसके बाद चंदा कराकर अपने इष्ट मित्रों से आर्थिक मदद लेकर लोहे के पिलर और तारों की व्यवस्था कराकर छोटे छोटे बाड़े बनवाते हैं, जहां पर खेतों में घूम रहे मवेशियों को पहुंचवाते हैं। किसानों को चारे पानी की व्यवस्था कराने के लिए कहा जाता है। इस चंदे में वह भी अपने हिस्से की धनराशि देते हैं। जब बाड़े में संख्या अधिक हो जाती है तो मवेशियों को गोशाला तक भेजने का भी इंतजाम किया जाता है।
नदीगांव में तैयार कराया 1 लाख का बाड़ा
शिव गोपाल ने बताया कि उनका प्रयास था कि नदीगांव क्षेत्र को अन्ना से पूरी तरह से मुक्त कराया जाए। इसके लिए राजीपुरा गांव में सबसे बड़ा बाड़ा बनवाया। जिसको बनवाने में करीब 1 लाख रुपये का खर्च आया। वहां अभी भी 150 से 200 मवेशी मौजूद हैं। जल्द डीएम से बाड़े का उद्घाटन कराने का भी प्रयास किया जाएगा।
तीन कोतवाली, 80 बाड़े, 2000 अन्ना मवेशी
शिव गोपाल ने बताया कि वे अभी तक उरई कोतवाली क्षेत्र के मड़ोरा, गढ़न, उसरगांव, कुठौंदा, बरहा, बरसेसी के अलावा नदीगांव के अकनीवा, पजौनिया, तूमरा, रुपपुरा और रेंढ़र के कुदारी, खकसीस, कमसेरा, डीहा आदि गांवों में 70 से 80 बाड़े बनवा चुके हैं। जिनमें करीब 2000-2500 मवेशियों को पहुंचाया जा चुका है।
एसडीएम और एसपी ने भी किया प्रोत्साहित
शिव गोपाल ने बताया कि अन्ना मवेशियों की धरपकड़ के लिए उनका एसपी अरविंद चतुर्वेदी और एसडीएम कोंच गुलाब सिंह ने पूरी तरह से प्रोत्साहन किया। एसडीएम ने उनसे कहा कि वे अभियान शुरू करें, हर मदद की जाएगी। एसपी ने भी क्षेत्र में अन्ना मवेशियों की समस्या के निदान पर उनके प्रयासों को सराहा है।
किसानों के लिए दिनचर्या के 7 घंटे भी दे रहे
शिव गोपाल के मुताबिक, आज भी वे उरई कोतवाली में रहते हुए दोपहर के 2 से 4 बजे का समय ग्रामीण इलाकों में जाकर किसानों के बीच देते हैं और समस्या पर चर्चा करते हैं। इसके अलावा किसानों से बोल रखा है कि रात 9 से 2 बजे तक कभी भी उनसे फोन पर बात कर अपनी समस्या रख सकते हैं।