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तीन दशकों से कांग्रेस से दूर रही लोकसभा सीट
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उरई/कालपी। गरौठा जालौन भोगनीपुर लोकसभा सुरक्षित सीट पर इस वक्त भाजपा का कब्जा है, लेकिन कभी यही सीट कांग्रेस की मानी जाती थी। इस सीट पर कांग्रेस की उपस्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक हुए 16 लोकसभा चुनावों में 7 बार कांग्रेस को जीत मिली है। 1984 के बाद फिर कभी इस सीट पर कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला।
बता दें कि आजादी के बाद यहां सबसे पहले चुनाव 1952 में हुआ था। जिसमें कांग्रेस के लोटन राम लोकसभा के पहले सांसद बने थे। इसके बाद 1957 में हुए लोक सभा चुनाव में इसी परिवार के लच्छीराम ने जीत दर्ज कर कांग्रेस का दबदबा बनाया। 1962 में हुए लोक सभा चुनाव में कांग्रेस के रामसेवक ने बाजी मारी। इसके बाद हैट्रिक लगाते हुए चौधरी राम सेवक 1967 और 1971 में भी सांसद चुने गए। इसके बाद इमरजेंसी के आक्रोश की आग के बाद इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा टूटा और पहली बार 1977 के चुनाव में कांग्रेस को इस सीट पर हार मिली।
1977 में हुए चुनाव में भारतीय लोकदल के टिकट पर लड़े रामचरण यहां से सांसद चुने गए। इसके बाद 1980 और 1984 के चुनावों में यहां पर कांग्रेस ने एक बार फिर वापसी की और दोनों बार यहां से कांग्रेस के नाथूराम व लच्छीराम ने चुनाव जीता। इसके बाद 1989 में यहां जनता दल ने खाता खोला और जीत दर्ज की। इसके बाद इस सीट पर दोबारा कभी कांग्रेस ने वापसी नहीं की। हालांकि 1991 के चुनाव में जनता दल से भाजपा ने यह सीट छीन ली और बीजेपी के गया प्रसाद कोरी सांसद बने।
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इसके बाद 1996 और 1998 दोनों ही चुनावों में यहां भाजपा ही जीती और भानु प्रताप वर्मा सांसद बने, लेकिन 1999 में यहां तख्ता पलट हुआ और बसपा के ब्रजलाल खाबरी ने भानु प्रताप वर्मा को हैट्रिक पूरी नहीं करने दी लेकिन साल 2004 के चुनाव में एक बार फिर से बीजेपी ने वापसी की और भानु प्रताप सिंह ने जीत दर्ज की। वर्ष 2009 में यहां पहली बार सपा ने खाता खोला और घनश्याम अनुरागी चुनाव जीते, लेकिन 2014 में फिर से ये सीट भाजपा के खाते में गई और भानु प्रताप सिंह सांसद चुने गए। भानु प्रताप वर्मा ने बसपा के प्रत्याशी ब्रजलाल खाबरी को 2,87,202 वोटों से हराकर इस सीट पर कब्जा किया था।
अब तक चुने गए सांसद
वर्ष - सांसद राजनीतिक पार्टी
2014 - भानु प्रताप वर्मा - भारतीय जनता पार्टी
2009 - घनश्याम अनुरागी - समाजवादी पार्टी
2004 - भानु प्रताप वर्मा - भारतीय जनता पार्टी
1999 - बृजलाल खाबरी - बहुजन समाज पार्टी
1998 - भानु प्रताप वर्मा - भारतीय जनता पार्टी
1996 - भानु प्रताप वर्मा - भारतीय जनता पार्टी
1991 - गया प्रसाद कोरी - भारतीय जनता पार्टी
1989 - राम सेवक भाटिया - जनता दल
1984 - लच्छी राम - कांग्रेस
1980 - नाथूराम शाक्यवार - कांग्रेस
1977 - रामचरण - भारतीय लोकदल
1971 - चौधरी राम सेवक - कांग्रेस
1967 - चौधरी रामसेवक - कांग्रेस
1962 - चौधरी रामसेवक - कांग्रेस
1957- लच्छी राम - कांग्रेस
1952- लोटन राम - कांग्रेस
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बता दें कि आजादी के बाद यहां सबसे पहले चुनाव 1952 में हुआ था। जिसमें कांग्रेस के लोटन राम लोकसभा के पहले सांसद बने थे। इसके बाद 1957 में हुए लोक सभा चुनाव में इसी परिवार के लच्छीराम ने जीत दर्ज कर कांग्रेस का दबदबा बनाया। 1962 में हुए लोक सभा चुनाव में कांग्रेस के रामसेवक ने बाजी मारी। इसके बाद हैट्रिक लगाते हुए चौधरी राम सेवक 1967 और 1971 में भी सांसद चुने गए। इसके बाद इमरजेंसी के आक्रोश की आग के बाद इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा टूटा और पहली बार 1977 के चुनाव में कांग्रेस को इस सीट पर हार मिली।
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1977 में हुए चुनाव में भारतीय लोकदल के टिकट पर लड़े रामचरण यहां से सांसद चुने गए। इसके बाद 1980 और 1984 के चुनावों में यहां पर कांग्रेस ने एक बार फिर वापसी की और दोनों बार यहां से कांग्रेस के नाथूराम व लच्छीराम ने चुनाव जीता। इसके बाद 1989 में यहां जनता दल ने खाता खोला और जीत दर्ज की। इसके बाद इस सीट पर दोबारा कभी कांग्रेस ने वापसी नहीं की। हालांकि 1991 के चुनाव में जनता दल से भाजपा ने यह सीट छीन ली और बीजेपी के गया प्रसाद कोरी सांसद बने।
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इसके बाद 1996 और 1998 दोनों ही चुनावों में यहां भाजपा ही जीती और भानु प्रताप वर्मा सांसद बने, लेकिन 1999 में यहां तख्ता पलट हुआ और बसपा के ब्रजलाल खाबरी ने भानु प्रताप वर्मा को हैट्रिक पूरी नहीं करने दी लेकिन साल 2004 के चुनाव में एक बार फिर से बीजेपी ने वापसी की और भानु प्रताप सिंह ने जीत दर्ज की। वर्ष 2009 में यहां पहली बार सपा ने खाता खोला और घनश्याम अनुरागी चुनाव जीते, लेकिन 2014 में फिर से ये सीट भाजपा के खाते में गई और भानु प्रताप सिंह सांसद चुने गए। भानु प्रताप वर्मा ने बसपा के प्रत्याशी ब्रजलाल खाबरी को 2,87,202 वोटों से हराकर इस सीट पर कब्जा किया था।
अब तक चुने गए सांसद
वर्ष - सांसद राजनीतिक पार्टी
2014 - भानु प्रताप वर्मा - भारतीय जनता पार्टी
2009 - घनश्याम अनुरागी - समाजवादी पार्टी
2004 - भानु प्रताप वर्मा - भारतीय जनता पार्टी
1999 - बृजलाल खाबरी - बहुजन समाज पार्टी
1998 - भानु प्रताप वर्मा - भारतीय जनता पार्टी
1996 - भानु प्रताप वर्मा - भारतीय जनता पार्टी
1991 - गया प्रसाद कोरी - भारतीय जनता पार्टी
1989 - राम सेवक भाटिया - जनता दल
1984 - लच्छी राम - कांग्रेस
1980 - नाथूराम शाक्यवार - कांग्रेस
1977 - रामचरण - भारतीय लोकदल
1971 - चौधरी राम सेवक - कांग्रेस
1967 - चौधरी रामसेवक - कांग्रेस
1962 - चौधरी रामसेवक - कांग्रेस
1957- लच्छी राम - कांग्रेस
1952- लोटन राम - कांग्रेस