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...यहां हुआ था अन्ना हजारे का ‘पुर्नजन्म’
बुलंदशहर/ब्यूरो
Updated Sun, 14 Apr 2013 01:26 AM IST
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क्या आप जानते हैं कि समाजसेवी अन्ना हजारे का ‘पुर्नजन्म’ हुआ है। इस बात को खुद अन्ना भी मानते हैं कि वर्ष 1965 में पाकिस्तान से युद्ध के दौरान हुई एक घटना के बाद उन्होंने अपना जीवन देश और समाज को समर्पित करने का निर्णय लिया था।
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अन्ना हजारे ने बताया कि वर्ष 1965 में पोखरन में पाकिस्तान से युद्ध चल रहा था। युद्ध के समय उनका एक-एक साथी दुश्मन की गोली का शिकार हो गया। मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि मैं जिंदा हूं और जिंदा हूं तो इसके पीछे क्या कारण है?
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इसी मंथन के बाद मैंने निर्णय लिया कि आज के बाद का अपना पूरा जीवन देश और समाज पर न्योछावर कर दूंगा। इसीलिए मैंने शादी नहीं की और 40 वर्ष से अपने गांव और घर नहीं गया और मंदिर में रहता हूं।
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मेरे पास एक बिस्तर और खाने के बर्तन के अलावा कुछ भी नहीं है। इसके बावजूद में महाराष्ट्र में दो बार सरकार गिरा चुका हूं और छह मंत्रियों और चालीस अफसरों के विकेट गिरा चुका हूं।
लौकी की सब्जी-सादी रोटी पसंद
नुमाइश ग्राउंड से लौटने के बाद अन्ना हजारे भूड़ रोड स्थित होटल में पहुंचे। यहां अन्ना हजारे और उनकी टीम के खाने का प्रबंध किया गया था, लेकिन उन्होंने हलवाई का बनाया हुआ खाना नहीं खाया।
अन्ना टीम के राजीव ने बताया कि अन्ना हजारे को लौकी और सादी रोटी पसंद है। इसलिए अधिवक्ता रेखा शर्मा अपने घर से उनका पसंदीदा भोजन बनाकर लाईं थीं।