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युवा आईएएस अफसर को मिली ईमानदारी की सजा, निलंबित

Mon, 29 Jul 2013 01:00 PM IST
लखनऊ/ब्यूरो
लखनऊ/ब्यूरो Updated Mon, 29 Jul 2013 01:00 PM IST
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ias officer got punishment to honesty suspended

खनन माफिया के खिलाफ अभियान चलाने के बाद

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सुर्खियों में आईं युवा आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को अपनी ईमानदारी की कीमत चुकानी पड़ी है। अखिलेश सरकार ने शनिवार रात उन्हें निलंबित कर दिया।


सूत्रों के मुताबिक खनन माफिया लाबी के दबाव में यह कार्रवाई की गई है। लेकिन सरकार का कहना है कि उनके खिलाफ यह कार्रवाई एक धार्मिक स्थल की दीवार को गिराने का आदेश देने की वजह से की गई है।

सूत्रों के मुताबिक इस अधिकारी ने माफिया की नाक में दम कर रखा था। सरकार ने नागपाल को अब राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया है और इसे एक प्रशासनिक फैसला बताया है। लेकिन उसकी मंशा पर सवाल उठने लगे हैं।

28 वर्षीय नागपाल पंजाब कैडर की 2009 बैच की आईएएस अफसर हैं। नागपाल को पिछले साल सितंबर में गौतमबुद्ध नगर (सदर) का एसडीएम नियुक्त किया गया था।


नागपाल ने पिछले दिनों अवैध खनन को रोकने के लिए अभियान चलाया था, जिसके कारण खनन माफिया उनके खिलाफ थे।

पिछले हफ्ते ही उन्होंने अवैध खनन के आरोप में 15 लोगों को सलाखों के पीछे पहुंचाया था और 22 के खिलाफ सीजेएम के यहां से गिरफ्तारी वारंट जारी हुए।

अप्रैल से लेकर अब तक अवैध खनन में इस्तेमाल की जा रही करीब 297 गाड़ियों और ट्रैक्टरों को सीज कर खनन पर रोक लगा दी थी। इस दौरान करीब 82.34 लाख रुपये का राजस्व भी सरकारी खजाने में आया।

दरअसल यमुना और हिंडन नदी में अवैध खनन माफियाओं का दबदबा है। इससे एक तरफ सरकार को हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता ही है, साथ ही इससे पर्यावरण पर भी असर पड़ता है।
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प्रशासन माफिया के दबाव और राजनीतिक दखल के चलते उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं पर पाता है लेकिन नागपाल ने सारे दबाव दरकिनार कर अभियान चलाया।

'ईमानदारी का इनाम निलंबन'
बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि दुर्गा शक्ति नागपाल को इसलिए निलंबित किया गया क्योंकि उन्होंने वहां पर खनन माफिया के खिलाफ अभियान चला रखा था। खनन माफिया से उसने लाखों का राजस्व वसूला।
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मीडिया और जनता जहां उनकी तारीफ कर रही थी, वहीं मुख्यमंत्री ने उन्हें निलंबित कर इसका इनाम दिया। इससे पूर्व गोंडा में पशु तस्करी को रोकने वाले एसपी को वहां से हटा दिया गया था और तस्करी के आरोपी को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया।

'यह तो खनन माफिया की जीत है'

भाजपा नेता कलराज मिश्रा ने कहा कि नागपाल के खिलाफ प्रदेश सरकार की कार्रवाई साबित करती है कि वह माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को पसंद नहीं करती है।


आखिर उसने कौन सी गलती की थी। यह समझ से परे है लेकिन यह महसूस होता है कि उन्हें माफिया के दबाव के चलते निलंबित किया गया।

'शिकायत आएगी तो गौर करेंगे'

नागपाल के निलंबन पर उत्तर प्रदेश आईएएस संघ अध्यक्ष आलोक रंजन का कहना हैं कि मैं इस मामले को देखूंगा। रविवार होने के कारण मेरे पास पूरी जानकारी नहीं है। अगर नागपाल इस मामले की शिकायत लेकर आती हैं, तो हम जरूर रास्ता निकालेंगे।

यह प्रशासनिक फैसला है। उन्होंने एक धार्मिक स्थल की दीवार को गिराने का आदेश दिया था।
--मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, ट्विटर पर लिखा

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