फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Wheat farmers forced to sell at a loss

नुकसान पर गेहूं बेचने को मजबूर किसान

Fri, 15 Apr 2016 11:25 PM IST
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 15 Apr 2016 11:25 PM IST
विज्ञापन
हाथरस। किसान का गेहूं क्रय केंद्रों पर नहीं खरीदे जाने से किसानों को सरकार की न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकार ने किसानों को उनके गेहूं का उचित मूल्य मिल सके, इसके लिए 1525 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया है। किसानों को अपना गेहूं कृषि उत्पादन मंडी समिति हाथरस में 1400 रुपये प्रति क्विंटल में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। किसानों के साथ हो रही इस खुली नाइंसाफी को रोकने में प्रशासन और खाद्य विभाग नाकाम साबित हो रहा है। क्रय एजेंसियों की इस मनमानी का पूरा फायदा माफिया उठा रहे हैं और किसानों का गेहूं तेजी से समर्थन मूल्य से बेहद कम रेट पर बटोर रहे हैं। किसान की मजबूरी यह है कि फसल कटने के बाद उसे कर्ज चुकाने के अलावा अन्य जरूरतों के लिए पैसे की सख्त जरूरत है, इसलिए वह जल्दबाजी में अपनी फसल व्यापारियों और आढ़तियों को कम रेट पर बेचने को मजबूर है। गौरतलब है कि पिछले साल भी क्रय एजेंसियों की इस लापरवाही और माफिया से उनकी मिलीभगत से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत जिले में लक्ष्य के मुकाबले गेहूं की खरीद नहीं हो सकी थी। इस बार भी हालात ऐसे ही नजर आ रहे हैं।  
विज्ञापन


बोले किसान
जिले में कोई गेहूं क्रय केंद्र संचालित नहीं हो रहा है। गेहूं लेकर जाओ तो कई तरह के बहाने बनाए जा रहे हैं। कोई कहता है कि वारदाना नहीं है तो कोई गेहूं में नमी ज्यादा बताता है।
विज्ञापन

रमेशचंद, पिंछौती

जिला प्रशासन ने सिर्फ दिखावे भर के लिए जिले में गेहूं क्रय केंद्रों का संचालन कर रखा है। जब यहां गेहूं लेकर जाओ तो तरह-तरह के खर्च बताए जा रहे हैं। इसके बाद भी गेहूं बेचने के बाद पैसे के लिए एक माह तक इंतजार करना पडे़गा।
विज्ञापन
विज्ञापन

-सुरेशचंद्र, वाद नगला अठवरिया

-गेहूं खरीद केंद्रों के संचालक जानब ूझकर गेहूं की खरीद करना ही नहीं चाहते। जब उनसे गेहूं खरीदने के लिए कहो तो वह गेहूं को मानक के प्रतिकूल बता देते हैं।
-सर्वेश कुमार, जैनी गढ़ी

-गेहूं खरीद शुरू ही नहीं हो रही है। जहां भी जाओ, वहां कोई न कोई बहाना बता दिया जाता है, जिससे पैसे की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मंडी में सस्ते में गेहूं बेचना मजबूरी है।
-वीरपाल सिंह, मांगरू

11 दिन में एक भी दाना नहीं खरीदा
गेहूं खरीद में लापरवाही का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि जिले में 52 क्रय केंद्र होने के बावजूद एक दाना गेहूं की भी खरीद नहीं हो सकी है। क्रय केंद्र वाले बहाना बना रहे हैं कि उनके यहां अभी तक किसान ही नहीं आ रहे हैं, जबकि असलियत में क्रय केंद्रों से किसानों को लौटाया जा रहा है और वह मजबूरी में अपना गेहूं आढ़तियों और व्यापारियों को कम दाम पर बेच रहे हैं। अगर यही हाल रहा तो जिले में इस बार भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा होना मुश्किल है। फिर से जिले को गेहूं के लिए दूसरे जिलों के आगे हाथ पसारने पड़ सकते हैं।


खरीद पर खर्चों का मांगा ब्योरा
खाद्य विपणन विभाग ने क्रय केंद्रों पर किसानों से गेहूं खरीद पर वसूले जाने वाले खर्चों का ब्योरा मांगा है। उन्होंने पूछा है कि नियमानुसार मंडी में कितनी पल्लेदारी, छनाई, उतराई, सफाई आदि पर कितना खर्चा लिया जाना चाहिए। खर्चों की यही दर क्रय केंद्रों पर लागू होगी। इससे ज्यादा क्रय केंद्र वाले किसान से वसूली नहीं कर सकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed