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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   The outer districts of the milk will not meet its target

बाहरी जनपदों के दूध से नहीं होगा लक्ष्य पूरा

Wed, 20 Apr 2016 12:14 AM IST
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 20 Apr 2016 12:14 AM IST
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अलीगढ़। कलस्टर योजना में हाथरस, एटा एवं कासगंज की डेयरियों को अलीगढ़ के सासनी प्लांट में मर्ज कर एक लाख लीटर प्रतिदिन दूध कलेक्शन का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को पाने के लिए अन्य जनपदों की बात छोड़ दी जाए तो जनपद में ही दूध कलेक्शन में तमाम दिक्कतें सामने आनी तय हैं। सबसे अहम होगा डेयरी से पृथक हुई जनपद की 292 तो हाथरस की 300 समितियों को जोड़ना। 
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वर्ष 1996 में दुग्ध संघ अलीगढ़ ने सासनी में 60 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता का डेयरी प्लांट स्थापित किया था। वर्ष 1996 से 1999 तक लगभग 700 दुग्ध समितियों के माध्यम से करीब 80 हजार लीटर प्रतिदिन का दुग्ध उत्पादन था। इनमें अलीगढ़ की 400 तो हाथरस की 300 समितियां शामिल थी। इसके बाद बजट के अभाव, दुधारू पशुओं की कमी एवं निजी डेयरियों के आगमन के बाद स्थिति बिगड़ गई। वर्ष 2008 आते आते स्थिति इस कदर विकट हो गई कि अधिकांश समितियों ने पेमेंट न मिलने एवं अन्य अनियमितताओं से परेशान होकर पराग डेयरी से नाता तोड़ लिया और दूध के अभाव में सासनी प्लांट बंद हो गया। वर्ष 2013 में पराग डेयरी के दोेबारा खुलने के बाद वर्तमान में करीब 108 समितियां तो अस्तित्व में हैं। शेष 292 समितियां अभी निष्क्रिय पड़ी हैं। हाथरस की भी 300 समितियों को दोबारा जोड़ने के लिये तमाम पापड़ बेलने होंगे। बताते चलें कि सासनी प्लांट करीब चार माह में रिनोवेट होने के आसार हैं। 
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निजी डेयरियों से होगी टक्कर
अलीगढ़। अमूल समेत अन्य दुग्ध डेयरियों ने गांव गांव कलेक्शन सेंटर खोलकर सरकारी डेयरी सिस्टम को कड़ी चुनौती दे रखी है। पराग से विमुख हुई समितियां भी इन्हीं की छत्रछाया में फ लफूल रही हैं। ऐसे में इन समितियों को दोबारा वापस लाने के लिये डेयरी प्रबंधन को पैसा तो ज्यादा खर्च करना ही होगा, बल्कि तमाम दांव पेंच खेलने होंगे। 
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पुनर्गठन के लिये बजट का इंतजार
अलीगढ़। पराग डेयरी के विपणन अधिकारी जेपी गोस्वामी ने बताया कि इस बार अलीगढ़ की जिला योजना में समिति पुनर्गठन समेत अन्य कामों के लिये 6.50 करोड़ तो हाथरस में 1.95 करोड़ के बजट को स्वीकृति दी गई है। बजट मिलते ही समितियों के पुनर्गठन का काम शुरू हो जाएगा।  
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