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सैनिक की मौत पर राजनीति गलत कागजों पर सीमित रह जाते हैं वादे

Fri, 04 Nov 2016 11:34 PM IST
अमर उजाला, हाथरस
अमर उजाला, हाथरस Updated Fri, 04 Nov 2016 11:34 PM IST
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Soldier's death wrong politics promises on paper are restricted
Indian Army - फोटो : File Photo
वन रैंक वन पेंशन योजना से असंतुष्ट भिवानी के पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल की मौत पर कस्बा व क्षेत्र के पूर्व सैनिकों में भी गहरा आक्रोश है। अमर उजाला ने जब कुछ सैनिकों से बातचीत की तो उनका दर्द उनकी जुबां पर आ गया।
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सैनिकों ने साफ कहा एक सैनिक के मरने के बाद उसे कुछ नहीं मिलता, सरकार वायदे तो खूब करती है, लेकिन वह सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाते हैं। उसके बच्चे उसकी पत्नी एवं उसके परिवार के अन्य सदस्य सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाते ही रहते हैं, मिलता कुछ भी नहीं है।
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पूर्व सैनिकों ने दर्द बयां करते हुए कहा कि  किसी ने ग्लेशियर पर जाकर देखा हो तो उन्हें पता लगे कि वहां रहना मरने से कम नहीं है। अधिकतर फौजी वहां से अंगभंग होकर आते हैं। किसी ने सीमा पर जाकर देखा है दोनों स्थानों हर समय मौत से लड़ना पड़ता है।
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सरकार उनके लिए क्या करती है? सातवां वेतन कब से लागू हो गया। सिविल में नौकरी करने वालों ने कई बार वेतन भी ले लिया। लेकिन रिटायर्ड सैनिकों को अभी तक कुछ नहीं मिला है। वन रैंक वन पेंशन का लाभ भी अभी तक नहीं मिल पाया है। रामकिशन ग्रेवाल की मौत सेना में नौकरी कर रहे जवानों की आर्थिक स्थिति को भी दर्शाती है। 

सूबेदार रामकिशन द्वारा आत्यहत्या करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है । शायद वह रिटायर्ड सैनिकों का दर्द सहन न कर सके। आखिर इस जमाने में कोई भी इतने कम वेतन और अपनी जान पर खेलकर देश की सुरक्षा नहीं कर सकता। 
-जवाहर सिंह, रिटायर्ड सैनिक, सहपऊ

- सूबेदार रामकिशन की आत्महत्या रिटायर्ड सैनिकों का दर्द बयां करती है। सैनिकों का दर्द सैनिक को ही मालूम है अन्य को नहीं। सरकार ने दो प्रतिशत डीए भी दे दिया है, लेकिन उसका भी पता नहीं, आखिर कब मिलेगा।  

- प्रकाशचन्द्र दुबे, अवकाश प्राप्त सैनिक, सहपऊ

- एक सैनिक ने आत्महत्या कर ली और राजनीतिक पार्टियां उसकी चिता पर रोटी सेक रही हैं। यह वाकई दुर्भाग्य पूर्ण है। सरकार को वन रैंक वन पेंशन का लाभ जल्द देना चाहिए। नहीं तो आगे भी कोई दुखद घटना घट सकती है।
- मुकेश शर्मा, पूर्व सैनिक, सहपऊ। 
 
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