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वैज्ञानिक विधि से नष्ट करें धान की फसल में पैदा हो रहे खरपतवार

Sun, 12 Jul 2020 11:16 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jul 2020 11:16 PM IST
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scientific way for farming
धान की पौध रोपाई का काम लगभग पूरा हो चुका है। ऐसे में अब धान की फसल में खरपतवार पैदा हो रहे हैं, जिन्हें वैज्ञानिक विधि से नष्ट करने की सलाह कृषि विज्ञान केंद्र के वैैज्ञानिक दे रहे हैं।
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कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. श्यौराज सिंह ने कहा है कि जिले में धान की रोपाई का कार्य काफी तेजी से हो रहा है। इस फसल में सबसे पहले खरपतवारों की समस्या आती है। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों को सलाह दी जाती है कि खरपतवारों के द्वारा फसल को 15-20 फीसदी तक क्षति हो जाती है, इसलिए किसान समय रहते इनका प्रबंधन कर लें। धान की फसल में निम्नलिखित खरपतवारों से क्षति पहुंचती है, जिनमें मुख्य रूप से सावा घास, मोथा, जंगली धान, सांवक, धनपापड़, गठजोड़, दूबघास, हिरड घास, बनपटुआ, पान पत्र व मकोय हैं।
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इनके प्रबंधन के लिए प्रेटिलाकलोर 50 ईसी (रिफिट, इरेज), 750 मिली /हेक्टेअर, बासपाइरीबैक सोडियम 10 % एसपी (नोमिनी गोल्ड, अडोरा) 20 -25 ग्राम सक्यि तत्व प्रति हेक्टेयर, या 200-250 मिली प्रति हेक्टेयर को रोपाई के 20-25 दिन बाद 400-450 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें। इथोकसी सल्फयूरांन 15 डब्ल्यूजी ( सनराइज) की 20 ग्राम सकरीय तत्व हेक्टेयर या 132 मिली को 400-450 लीटर पानी में प्रति हेक्टेयर, हेलोसल्फयूरांन 75 डब्लूयूजी (परमिट) की 70 ग्राम दवा को 450 लीटर पानी में घोल बनाकर रोपाई के 15 दिन बाद तक छिड़काव करें। साथ ही स्टीकर जैसे टीपाल, हैप्पजा, एंडोटरान की 1.0 मिलीलीटर मात्रा/लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव दोपहर के बाद करें। अधिक जानकारी के लिए डॉ. एसआर सिंह से 9454346490 पर या कृषि विज्ञान केंद्र पर संपर्क करें।
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