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नौहे पढ़ते हुए निकाला मातमी जुलूस
अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Sun, 09 Oct 2016 11:38 PM IST
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मातमी अलम का जलूस निकालते मुस्लिम समाज के लोग।
- फोटो : amar ujala
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हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में ऑल इंडिया शिया सोसायटी की सरपरस्ती में अंजुमने हैदरी की जानिब से पहली मुहर्रम से मजलिसों का दौर जारी है। मजलिस के बाद किला गेट से अलम का जुलूस निकाला गया।
जुलूस में नौहे पढ़ते और मातम करते हुए विभिन्न रास्तों पर होकर निकाला गया। भ्रमण के बाद मातमी जुलूस इमाम बारगाह पहुंचकर समाप्त हुआ। मौलाना सज्जाद ने कहा कि कर्बला की जंग सत्य और असत्य की जंग थी। जुल्म के खिलाफ जंग थी। यजीद जुल्म करके इंसानियत और इस्लाम के उसूलों को खत्म कर देना चाहता था।
हजरत इमाम हुसैन जालिम के आगे झुके नहीं और अपने इंसानियत और दीन के उसूलों के खातिर अपनी और 72 जानिसारों की कर्बला के मैदान में तीन दिन भूख और प्यास की हालत में शहादत दी। नवासे रसूल का गम कभी भुलाया नहीं जा सकता। जुलूस में सदर हसन मोहम्मद, मुबीन, कमर, तनवीर, सफदर, जाहिद हुसैन, एजाज मेहंदी, चांद मियां, आविद हुसैन, शब्बू मियां, रईसुल हसन, रिजवान, वसीम, रजा, ऐनुल, कायम सहित काफी लोग शामिल थे।
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वहीं सहपऊ कस्बे में मोहर्रम की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मोहर्रम की सातवीं तारीख को पहला अलम जुलूस निकाला गया। अलम जुलूस शक्यिआना से प्रारंभ होकर कस्बे के मुख्य मार्ग एवं बाजार से होता हुआ पुराना थाना पर जाकर सम्पन्न हुआ। कस्बे में अलम जुलूस दो दिन निकलता है।
इसके बाद ताजियां निकाले जाते हैं । दशहरा एवं ताजियों के मद्देनजर कस्बे में अतिरिक्त पुलिस फोर्स बुलाया गया है। जुलूस में कोतवाली पुलिस प्रभारी मुहम्मद असलम के नेतृत्व में पुलिसबल साथ था।
साथ ही सासनी में हजरत इमाम हुसैन एवं उनके नवासों की शहादत में मातमी अलम का जलूस कस्बा में निकाला गया। मोहल्ला कस्सावान से शुरू होकर विष्णुपुरी से आगरा-अलीगढ़ रोड़ होकर बस स्टैंड से कमला बाजार, गांधी चौक, बजरिया, मोहल्ला बारह सैनी होकर कन्या इंटर कालेज मार्ग से वापस मोहल्ला कस्सावान पहुंची। मुस्लिम बस्तियों में रंजोगम का माहौल बना रहा। इससे पहले पुलिस प्रशासन ने थाने में बैठक कर शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की।
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जुलूस में नौहे पढ़ते और मातम करते हुए विभिन्न रास्तों पर होकर निकाला गया। भ्रमण के बाद मातमी जुलूस इमाम बारगाह पहुंचकर समाप्त हुआ। मौलाना सज्जाद ने कहा कि कर्बला की जंग सत्य और असत्य की जंग थी। जुल्म के खिलाफ जंग थी। यजीद जुल्म करके इंसानियत और इस्लाम के उसूलों को खत्म कर देना चाहता था।
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हजरत इमाम हुसैन जालिम के आगे झुके नहीं और अपने इंसानियत और दीन के उसूलों के खातिर अपनी और 72 जानिसारों की कर्बला के मैदान में तीन दिन भूख और प्यास की हालत में शहादत दी। नवासे रसूल का गम कभी भुलाया नहीं जा सकता। जुलूस में सदर हसन मोहम्मद, मुबीन, कमर, तनवीर, सफदर, जाहिद हुसैन, एजाज मेहंदी, चांद मियां, आविद हुसैन, शब्बू मियां, रईसुल हसन, रिजवान, वसीम, रजा, ऐनुल, कायम सहित काफी लोग शामिल थे।
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वहीं सहपऊ कस्बे में मोहर्रम की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मोहर्रम की सातवीं तारीख को पहला अलम जुलूस निकाला गया। अलम जुलूस शक्यिआना से प्रारंभ होकर कस्बे के मुख्य मार्ग एवं बाजार से होता हुआ पुराना थाना पर जाकर सम्पन्न हुआ। कस्बे में अलम जुलूस दो दिन निकलता है।
इसके बाद ताजियां निकाले जाते हैं । दशहरा एवं ताजियों के मद्देनजर कस्बे में अतिरिक्त पुलिस फोर्स बुलाया गया है। जुलूस में कोतवाली पुलिस प्रभारी मुहम्मद असलम के नेतृत्व में पुलिसबल साथ था।
साथ ही सासनी में हजरत इमाम हुसैन एवं उनके नवासों की शहादत में मातमी अलम का जलूस कस्बा में निकाला गया। मोहल्ला कस्सावान से शुरू होकर विष्णुपुरी से आगरा-अलीगढ़ रोड़ होकर बस स्टैंड से कमला बाजार, गांधी चौक, बजरिया, मोहल्ला बारह सैनी होकर कन्या इंटर कालेज मार्ग से वापस मोहल्ला कस्सावान पहुंची। मुस्लिम बस्तियों में रंजोगम का माहौल बना रहा। इससे पहले पुलिस प्रशासन ने थाने में बैठक कर शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की।