Hathras: महाराष्ट्र के नागपुर हादसे में एक और कांवड़िया की मौत, जगदीश का शव गांव पहुंचा, किया अंतिम संस्कार
गत दो जनवरी की दोपहर को नागपुर से 105 किलोमीटर आगे वर्धा जिले के बढ़नेर क्षेत्र में कोयले की खान से आ रहे ट्रक ने कांवडियों को अपनी चपेट में ले लिया था। हादसे में जगदीश की मौके पर ही मौत हो गई थी।
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महाराष्ट्र में दो दिन पहले हादसे का शिकार हुए एक और कांवड़ियां पीयूष ने 3 जनवरी की रात उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। सासनी के गांव समामई के रहने वाले जगदीश की घटना वाले दिन ही मौत हो गई थी, उनका शव रविवार को गांव पहुंचा तो बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ पड़ी। हंगामे की आशंका को देखते हुए यहां भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। इस दौरान बजरंग दल, विहिप और गोरक्षा दल कार्यकर्ता भी गांव समामई पहुंच गए और जयश्रीराम के नारों के गूंजने लगे। पुलिस ने उन्हें समझाया और नारेबाजी करने से रोका। गमगीन माहौल में उनके शव का अंतिम संस्कार किया गया।
सासनी के गांव समामई के रहने वाले जगदीश (45) तीन नवंबर को अपने पुत्र यश (16) , गांव के ही भोला पंडित(28), सुनील(22) और लक्ष्मी नारायण उर्फ बौला(50) के साथ हरिद्वार के लिए निकले थे। पांच नवंबर को हरिद्वार से 51 किलो गंगाजल लेकर यात्रा शुरू की और रामेश्वरम जाकर इन्हें जल चढ़ाना था। कुछ दिन पहले भोला का ममेरा भाई पीयूष दीक्षित उर्फ छोटू निवासी बबूल थाना हाथरस जंक्शन भी इनके साथ शामिल हो गया।
गत दो जनवरी की दोपहर को नागपुर से 105 किलोमीटर आगे वर्धा जिले के बढ़नेर क्षेत्र में कोयले की खान से आ रहे ट्रक ने कांवडियों को अपनी चपेट में ले लिया था। हादसे में जगदीश की मौके पर ही मौत हो गई थी। पीयूष के सिर में गंभीर चोट आई थी। उनका कस्तूरबा अस्पताल, वर्धा में उपचार चल रहा था।
रविवार को जगदीश के शव के आने की सूचना और हंगामे की आशंका पर गांव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। एसडीएम सासनी नीरज शर्मा, सीओ सिटी यागेंद्र कृष्ण नारायण, सीओ सिकंदराराऊ जेएन अस्थाना सहित सासनी, शहर कोतवाली, हाथरस गेट, हाथरस जंक्शन, हसायन व सिकंदराराऊ थाने के अलावा पुलिस लाइंस से भी फोर्स गांव में पहुंच गया। हाईवे से लेकर गांव तक जगह-जगह पर पुलिस तैनात रही। यहां सुबह से ही विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, गोरक्षा दल आदि संगठनों के कार्यकर्ता जमा थे।
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दोपहर को शव आते ही कार्यकर्ताओं व ग्रामीणों ने एंबुलेंस को घेर लिया और जयश्रीराम के नारे लगाने शुरू कर दिए। शव जगदीश के घर तक पहुंंचा। साथ में उनका बेटा यश भी था, जिसका रो-रो कर बुरा हाल था। यश की मां की छह माह पूर्व मृत्यु हो चुकी है। अब पिता के जाने के बाद वह अकेला रह गया है। ग्रामीणों ने प्रशासनिक मदद के लिए हंगामा काटा। एसडीएम व सीओ ने हर संभव मदद का भरोसा दिलाया, जिसके बाद शव का अंतिम संस्कार किया गया।
हादसा दुखद है। मृतक के शव का अंतिम संस्कार शांतिपूर्ण माहौल में हो गया है। हादसे में घायल पीयूष की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई है। प्रशासन इस दुख की घड़ी में प्रभावित परिवारों के साथ है।-नीरज शर्मा, एसडीएम सासनी