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सत्य और स्नेह की प्रतीक थीं जगदंबा सरस्वती
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प्रजापिता ब्रह्मकुमारी आश्रम में अव्यक्त दिवस पर नाटक का मंचन करते बच्चे।
- फोटो : SADABAD
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संवाद न्यूज एजेंसी, सादाबाद।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सादाबाद में बृहस्पतिवार को ब्रह्माकुमारीज संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती जी का 56वां अव्यक्त स्मृति दिवस मनाया गया। सर्वप्रथम मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती के छवि चित्र के समक्ष सभी भाई-बहनों ने दीप प्रज्ज्वलित व पुष्प अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका सादाबाद प्रभारी ब्रह्माकुमारी भावना बहन ने कहा जब-जब संसार में दिव्यता की कमी, धर्म की ग्लानि, समाज में अन्याय, अत्याचार, चरित्र में गिरावट व विश्व में अशांति के बीज पनपने लगते हैं, तब-तब इन बुराइयों को समाप्त करने के लिए किसी महान विभूति का जन्म होता है। इन्हीं में से एक महान विभूति थीं जगदंबा सरस्वती (मम्मा)।
इनका बचपन का नाम राधे था। अपने ज्ञान, योग, पवित्रता के बल से विश्व की सेवा करते हुए मम्मा-सरस्वती ने 24 जून 1965 को अंतिम सांस ली। कार्यक्रम के मध्य में नाटक के माध्यम से मातेश्वरी जगदंबा के जीवन चरित्र का वर्णन किया गया। मौके पर ब्रह्माकुमारी सीमा बहन के अलावा बहन गीता गौड़, भ्राता पवन, बीके बबिता बहन, हीरा लाल भाई, रनवीर भाई, मिथलेश बहन, कमलेश बहन, महेश भाई, रश्मि बहन, रामबाबू भाई, सोनम बहन, महेश भाई, राधा बहन थीं।
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सादाबाद में बृहस्पतिवार को ब्रह्माकुमारीज संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती जी का 56वां अव्यक्त स्मृति दिवस मनाया गया। सर्वप्रथम मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती के छवि चित्र के समक्ष सभी भाई-बहनों ने दीप प्रज्ज्वलित व पुष्प अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका सादाबाद प्रभारी ब्रह्माकुमारी भावना बहन ने कहा जब-जब संसार में दिव्यता की कमी, धर्म की ग्लानि, समाज में अन्याय, अत्याचार, चरित्र में गिरावट व विश्व में अशांति के बीज पनपने लगते हैं, तब-तब इन बुराइयों को समाप्त करने के लिए किसी महान विभूति का जन्म होता है। इन्हीं में से एक महान विभूति थीं जगदंबा सरस्वती (मम्मा)।
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इनका बचपन का नाम राधे था। अपने ज्ञान, योग, पवित्रता के बल से विश्व की सेवा करते हुए मम्मा-सरस्वती ने 24 जून 1965 को अंतिम सांस ली। कार्यक्रम के मध्य में नाटक के माध्यम से मातेश्वरी जगदंबा के जीवन चरित्र का वर्णन किया गया। मौके पर ब्रह्माकुमारी सीमा बहन के अलावा बहन गीता गौड़, भ्राता पवन, बीके बबिता बहन, हीरा लाल भाई, रनवीर भाई, मिथलेश बहन, कमलेश बहन, महेश भाई, रश्मि बहन, रामबाबू भाई, सोनम बहन, महेश भाई, राधा बहन थीं।
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