{"_id":"585822ad4f1c1bd663e3945d","slug":"internal-relationship-between-the-bjp-sp-nasimuddin","type":"story","status":"publish","title_hn":"भाजपा-सपा के बीच अंदरूनी रिश्ते: नसीमुद्दीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भाजपा-सपा के बीच अंदरूनी रिश्ते: नसीमुद्दीन
अमर उजाला, हाथरस
Updated Mon, 19 Dec 2016 11:58 PM IST
विज्ञापन
सम्मेलन को संबोधित करते बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी व मंचासीन अतिथि।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा व सपा के बीच अंदरूनी रिश्ते हैं। इससे जब-जब प्रदेश में सपा की सरकार होती है, भाजपा खुद व खुद मजबूत हो जाती है। इसके एक नहीं, अनगिनत सबूत दिए जा सकते हैं। ये दोनों दल प्रदेश में सांप्रदायिक दंगे कराने का भी काम करते हैें ताकि भोली-भाली जनता को दंगों की आग में झोंककर राजनीतिक लाभ उठाया जा सके।
सपा सरकार के मौजूदा कार्यकाल में 400 से अधिक दंगे हो चुके हैं। जिसमें हजारों बेगुनाहों को अपनी जान माल की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी हैं। यह बसपा के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सोमवार को बसपा के अल्पसंख्यक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में कहा।
उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव जनसंघ के सहयोग से जसवंतनगर से पहली बार विधायक बने। वे पहली बार मुख्यमंत्री भाजपा के गठबंधन में बने। इनके मुख्यमंत्री रहते ही दो सांसदों वाली भाजपा के 88 सांसद जीत गए।
विज्ञापन
2014 का लोकसभा चुनाव भी सपा के कार्यकाल में हुआ। इसमें प्रदेश के 80 में से 73 सांसद भाजपा के जीते हैं। दिल्ली में सपा मुखिया के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह मौजूद रहते हैं। उन्होंने सवाल किया कि इन हालातों में समाजवादी पार्टी मुसलमानों के रहनुमा कैसे हो सकती है ?
बीजेपी पर तंज कसते हुए बसपा महासचिव ने कहा कि वह कितने ही सर्वे करा ले, लेकिन उत्तर प्रदेश में इनकी अब दाल गलने वाली नहीं हैं। 1977 में इमरजेंसी के बाद कांग्रेस को भी सर्वे में 90 प्रतिशत मत प्राप्त हो रहे थे।
इसी प्रकार नोटबंदी के बाद इनको भी 90 प्रतिशत मत मिलने के दावे किए जा रहे हैं। कैश न मिलने से परेशान जनता सिर्फ मतदान का इंतजार कर रही है, इनको असलियत बता देगी। सम्मेलन को लोक लेखा समिति के अध्यक्ष एवं विधायक रामवीर उपाध्याय, जोनल कोआर्डिनेटर सुनील चित्तौड़, हाजी अब्दुल सिद्दीकी, गजराज सिंह विमल, संघरत्न सेठी, हाथरस से प्रत्याशी बृजमोहन राही, सिकंदराराऊ से प्रत्याशी बनी सिंह बघेल ने भी संबोधित किया। सम्मेलन की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष दिनेश देशमुख ने की।
वहीं सपा के टिकट पर बांदा से चुनाव लड़ रहे मेरे भाई हसनुद्दीन सिद्दीकी से 2010 से ही मेरा व मेरे परिवार का कोई रिश्ता नहीं हैं। वह पिछले चुनाव में मेरे बेटे के खिलाफ चुनाव लड़ने वालों के समर्थन में प्रचार भी कर चुके हैं। बहुजन समाज पार्टी दलित, मुस्लिम, पिछडे़ व गरीबों एवं शोषितों का एक आंदोलन है।
इस मिशन से जो भी भटकेगा, पार्टी उसे बर्दाश्त नहीं करेगी। बसपा अल्पसंख्यक सम्मेलन के बाद प्रेसवार्ता में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन नेे यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि संविधान का निर्माण कर डॉ. भीमराव अंबेडकर ने दलितों, पिछड़ों, और गरीबों को वोट का अधिकार देकर मिशन की शुरुआत की थी, इसको बसपा के संस्थापक मान्यवर कांशीराम ने आगे बढ़ाया। अब बसपा सुप्रीमो बहन मायावती इस आंदोलन को आगे बढ़ा रही हैं।
चाहे विधायक हो या फिर पार्टी में कोई और, इस मिशन से भटकेगा, उसे बहुजन समाज पार्टी में किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए ही बसपा ने लोगों को विधायक बनाया, उनमें से कई गद्दारी करने लगे। इस पर राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया। अब वह कहीं भी जाएं, इससे हमें कोई लेना देना नहीं हैं। बसपा को कमजोर कर पाने की इन लोगों की कोई हैसियत नहीं है।
विज्ञापन
सपा सरकार के मौजूदा कार्यकाल में 400 से अधिक दंगे हो चुके हैं। जिसमें हजारों बेगुनाहों को अपनी जान माल की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी हैं। यह बसपा के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सोमवार को बसपा के अल्पसंख्यक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में कहा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव जनसंघ के सहयोग से जसवंतनगर से पहली बार विधायक बने। वे पहली बार मुख्यमंत्री भाजपा के गठबंधन में बने। इनके मुख्यमंत्री रहते ही दो सांसदों वाली भाजपा के 88 सांसद जीत गए।
विज्ञापन
2014 का लोकसभा चुनाव भी सपा के कार्यकाल में हुआ। इसमें प्रदेश के 80 में से 73 सांसद भाजपा के जीते हैं। दिल्ली में सपा मुखिया के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह मौजूद रहते हैं। उन्होंने सवाल किया कि इन हालातों में समाजवादी पार्टी मुसलमानों के रहनुमा कैसे हो सकती है ?
बीजेपी पर तंज कसते हुए बसपा महासचिव ने कहा कि वह कितने ही सर्वे करा ले, लेकिन उत्तर प्रदेश में इनकी अब दाल गलने वाली नहीं हैं। 1977 में इमरजेंसी के बाद कांग्रेस को भी सर्वे में 90 प्रतिशत मत प्राप्त हो रहे थे।
इसी प्रकार नोटबंदी के बाद इनको भी 90 प्रतिशत मत मिलने के दावे किए जा रहे हैं। कैश न मिलने से परेशान जनता सिर्फ मतदान का इंतजार कर रही है, इनको असलियत बता देगी। सम्मेलन को लोक लेखा समिति के अध्यक्ष एवं विधायक रामवीर उपाध्याय, जोनल कोआर्डिनेटर सुनील चित्तौड़, हाजी अब्दुल सिद्दीकी, गजराज सिंह विमल, संघरत्न सेठी, हाथरस से प्रत्याशी बृजमोहन राही, सिकंदराराऊ से प्रत्याशी बनी सिंह बघेल ने भी संबोधित किया। सम्मेलन की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष दिनेश देशमुख ने की।
वहीं सपा के टिकट पर बांदा से चुनाव लड़ रहे मेरे भाई हसनुद्दीन सिद्दीकी से 2010 से ही मेरा व मेरे परिवार का कोई रिश्ता नहीं हैं। वह पिछले चुनाव में मेरे बेटे के खिलाफ चुनाव लड़ने वालों के समर्थन में प्रचार भी कर चुके हैं। बहुजन समाज पार्टी दलित, मुस्लिम, पिछडे़ व गरीबों एवं शोषितों का एक आंदोलन है।
इस मिशन से जो भी भटकेगा, पार्टी उसे बर्दाश्त नहीं करेगी। बसपा अल्पसंख्यक सम्मेलन के बाद प्रेसवार्ता में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन नेे यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि संविधान का निर्माण कर डॉ. भीमराव अंबेडकर ने दलितों, पिछड़ों, और गरीबों को वोट का अधिकार देकर मिशन की शुरुआत की थी, इसको बसपा के संस्थापक मान्यवर कांशीराम ने आगे बढ़ाया। अब बसपा सुप्रीमो बहन मायावती इस आंदोलन को आगे बढ़ा रही हैं।
चाहे विधायक हो या फिर पार्टी में कोई और, इस मिशन से भटकेगा, उसे बहुजन समाज पार्टी में किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए ही बसपा ने लोगों को विधायक बनाया, उनमें से कई गद्दारी करने लगे। इस पर राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया। अब वह कहीं भी जाएं, इससे हमें कोई लेना देना नहीं हैं। बसपा को कमजोर कर पाने की इन लोगों की कोई हैसियत नहीं है।