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हाथरस : समय की चाल के साथ शहर करेगा उन्नति
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गौरव भारद्वाज, हाथरस।
घंटाघर की चार घड़ी, चारों में जंजीर पड़ी, जब-जब घंटा बजता था खड़ा मुसाफिर हंसता था। अब बदलते समय में जंजीर रहित इलेक्ट्रोनिक घड़ियों के साथ लोग अपनी चाल को तय करेंगे। शहर के आधा दर्जन से अधिक चौराहों पर सौंदर्यीकरण के साथ घड़ियां लगाई जाएंगी। घंटाघर पर काम चल रहा है। पालिका प्रशासन द्वारा पुरानी घड़ियों को भी दुरुस्त कराया जा रहा है।
कहते हैं कि जब घड़ी बंद हो जाए तो अशुभ माना जाता है। समय की चाल रुक नहीं सकती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए पालिका प्रशासन ने घड़ियों के सहारे शहर को उन्नति के रास्ते पर ले जाने की कवायद शुरू कर दी है। पालिका द्वारा शहर के घंटाघर पर लगी घड़ियों को जल्द चालू कराया जाएगा।
घंटाघर सौंदर्यीकरण का काम तेजी से चल रहा है। इसके अलावा शहर में मुख्य चौराहों पर जहां जरूरत होगी, उन चौराहों का सौंदर्यीकरण कराने के साथ आधा दर्जन से अधिक नई इलेक्ट्रोनिक घड़ियां लगाई जाएंगी। नए साल में इस कार्य के पूरा होने की उम्मीद है।
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शहर में दो घंटाघर, दोनों की घड़ियां पड़ी बंद
शहर के अधिकांश लोगों को नहीं पता शहर में दो घंटाघर है। एक शहर का मुख्य घंटाघर, जिसके नीचे से सात रास्ते निकल रहे हैं। जो शहर के मुख्य बाजारों को जोड़ते हैं। दूसरा शहर की पुरानी कलक्ट्रेट में घंटाघर है। इन दोनों घंटाघरों की घड़ियां बंद पड़ी हैं। पहले हाथरस में मिलें थी। इन मिलों में दो शिफ्टों में श्रमिक कार्य करते थे। कानपुर के बाद हाथरस का औद्योगिक क्षेत्र में दूसरा नंबर था। शहर को गूंजता गलियारा कहा जाता था। अब समय के साथ सब कुछ बदल गया है। घड़ियां खामोश हैं।
दाऊ के दरबार में भी हो एक घड़ी स्थापित
शहर के एतिहासिक किला परिसर स्थित दाऊजी मंदिर पर्यटन में शामिल हैं। पुरातत्व विभाग द्वारा यहां विकास के लिए कोई विशेष कदम नहीं उठाए गए हैं। हर साल यहां महोत्सव का आयोजन होता है। बीते दो साल से कोरोना के चलते मेले का आयोजन नहीं हो रहा है।
पालिका प्रशासन पुरातत्व विभाग से अनुमति लेकर दाऊजी मंदिर में एक घड़ी की स्थापना करानी चाहिए। ताकि मेले में आने वाले लोगों को समय की सही जानकारी मिल सके। हाल ही में पालिका प्रशासन ने लाखों रुपये की लागत से शहर के अलीगढ़ रोड पर इलेक्ट्रोनिक घड़ी लगवाई है। जिसे देखने के लिए शहर के लोग पहुंचते हैं।
शहर में आधा दर्जन से अधिक चौराहों पर जहां जरूरत होगी वहां घड़ियां चौराहों पर लगवाई जाएंगी। घड़ियों की मदद से लोग समय देख सकेंगे। समय की चाल से ही शहर की उन्नति होगी। आशीष शर्मा, पालिकाध्यक्ष नगर पालिका हाथरस।
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घंटाघर की चार घड़ी, चारों में जंजीर पड़ी, जब-जब घंटा बजता था खड़ा मुसाफिर हंसता था। अब बदलते समय में जंजीर रहित इलेक्ट्रोनिक घड़ियों के साथ लोग अपनी चाल को तय करेंगे। शहर के आधा दर्जन से अधिक चौराहों पर सौंदर्यीकरण के साथ घड़ियां लगाई जाएंगी। घंटाघर पर काम चल रहा है। पालिका प्रशासन द्वारा पुरानी घड़ियों को भी दुरुस्त कराया जा रहा है।
कहते हैं कि जब घड़ी बंद हो जाए तो अशुभ माना जाता है। समय की चाल रुक नहीं सकती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए पालिका प्रशासन ने घड़ियों के सहारे शहर को उन्नति के रास्ते पर ले जाने की कवायद शुरू कर दी है। पालिका द्वारा शहर के घंटाघर पर लगी घड़ियों को जल्द चालू कराया जाएगा।
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घंटाघर सौंदर्यीकरण का काम तेजी से चल रहा है। इसके अलावा शहर में मुख्य चौराहों पर जहां जरूरत होगी, उन चौराहों का सौंदर्यीकरण कराने के साथ आधा दर्जन से अधिक नई इलेक्ट्रोनिक घड़ियां लगाई जाएंगी। नए साल में इस कार्य के पूरा होने की उम्मीद है।
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शहर में दो घंटाघर, दोनों की घड़ियां पड़ी बंद
शहर के अधिकांश लोगों को नहीं पता शहर में दो घंटाघर है। एक शहर का मुख्य घंटाघर, जिसके नीचे से सात रास्ते निकल रहे हैं। जो शहर के मुख्य बाजारों को जोड़ते हैं। दूसरा शहर की पुरानी कलक्ट्रेट में घंटाघर है। इन दोनों घंटाघरों की घड़ियां बंद पड़ी हैं। पहले हाथरस में मिलें थी। इन मिलों में दो शिफ्टों में श्रमिक कार्य करते थे। कानपुर के बाद हाथरस का औद्योगिक क्षेत्र में दूसरा नंबर था। शहर को गूंजता गलियारा कहा जाता था। अब समय के साथ सब कुछ बदल गया है। घड़ियां खामोश हैं।
दाऊ के दरबार में भी हो एक घड़ी स्थापित
शहर के एतिहासिक किला परिसर स्थित दाऊजी मंदिर पर्यटन में शामिल हैं। पुरातत्व विभाग द्वारा यहां विकास के लिए कोई विशेष कदम नहीं उठाए गए हैं। हर साल यहां महोत्सव का आयोजन होता है। बीते दो साल से कोरोना के चलते मेले का आयोजन नहीं हो रहा है।
पालिका प्रशासन पुरातत्व विभाग से अनुमति लेकर दाऊजी मंदिर में एक घड़ी की स्थापना करानी चाहिए। ताकि मेले में आने वाले लोगों को समय की सही जानकारी मिल सके। हाल ही में पालिका प्रशासन ने लाखों रुपये की लागत से शहर के अलीगढ़ रोड पर इलेक्ट्रोनिक घड़ी लगवाई है। जिसे देखने के लिए शहर के लोग पहुंचते हैं।
शहर में आधा दर्जन से अधिक चौराहों पर जहां जरूरत होगी वहां घड़ियां चौराहों पर लगवाई जाएंगी। घड़ियों की मदद से लोग समय देख सकेंगे। समय की चाल से ही शहर की उन्नति होगी। आशीष शर्मा, पालिकाध्यक्ष नगर पालिका हाथरस।