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हाथरस : हाथरस में कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई है सपा
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हाथरस : सपा जिलाध्यक्ष जसवंत सिंह यादव। संवाद
- फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
प्रदेश में कई बार सत्ता में काबिज रहने वाली सपा इस जिले में अभी तक कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई है। विस चुनाव में हाथरस सीट से तो आज तक सपा को जीत हासिल नहीं हुई है। सादाबाद और सिकंदराराऊ में भी पार्टी अभी तक केवल एक-बार ही जीत हासिल कर सकी है। इस बार सपा इस कोशिश में लगी है कि तयशुदा माने जाने वाले सपा-रालोद गठबंधन के तहत हाथरस और सिकंदराराऊ सीट पर अपने प्रत्याशी उतारे जाएं और दोनों सीटों पर भाजपा को परास्त किया जाए। इसके लिए सपा जोर-शोर से तैयारी भी कर रही है।
यदि इस जिले के चुनावी इतिहास पर निगाह डालें तो हाथरस विधानसभा सीट पर आज तक सपा जीत नहीं सकी है। कई बार सपा ने इस सीट पर गठबंधन के तहत प्रत्याशी नहीं उतारे और अपने सहयोगी दलों के प्रत्याशियों को समर्थन दे दिया, लेकिन सपा समर्थित उम्मीदवार भी यहां से विजय हासिल नहीं कर सके। सिकंदराराऊ विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 1993 में सपा का जब बसपा से गठबंधन था, तब सपा के उम्मीदवार अमर सिंह यादव ने सिकंदराराऊ सीट पर जीत हासिल की थी। इसके बाद सपा को इस सीट पर फिर जीत हासिल नहीं हुई, अलबत्ता वर्ष 2012 के चुनाव में सपा प्रत्याशी यशपाल सिंह चौहान ने रामवीर उपाध्याय को कड़ी टक्कर दी थी।
रामवीर उपाध्याय को 9,4471 वोट मिले थे तो चौहान को 93408 वोट मिले थे। इस तरह से 1063 वोटों से सपा इस चुनाव में हार गई थी। पिछले विधानसभा चुनाव में इस सीट पर सपा को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। इसी तरह सादाबाद विधानसभा सीट पर सपा अभी तक वर्ष 2012 में ही जीत सकी है। तब सपा के उम्मीदवार देवेंद्र अग्रवाल ने जीत हासिल की थी और उन्होंने बसपा उम्मीदवार सतेंद्र शर्मा को करीब पांच हजार वोटों से हराया था। इसके अलावा वहां सपा कभी जीत हासिल नहीं कर सकी। इस बार यह माना जा रहा है कि सपा और रालोद का गठबंधन होगा और सादाबाद की सीट रालोद के खाते में जाएगी। दोनों पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं ने इसका संकेत भी दे दिया है। इसी हिसाब से दोनो पार्टियां तैयारी भी कर रही हैं। संवाद
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कई नेताओं ने की है सपा में वापसी
हाथरस। सपा में सबसे ज्यादा दावेदार सिकंदराराऊ में सामने आ रहे हैं। कई नेताओं ने पिछले दिनों पार्टी में वापसी भी की है। पूर्व एमएलसी डॉ. राकेश सिंह राना और पूर्व विधायकअमर सिंह यादव ने घर वापसी की है। यह दोनों पहले भी सपा में रह चुके हैं। इसके अलावा कई और नेता भी वहां से दावेदारी कर रहे हैं। यह नेता काफी समय से वहां पार्टी और अपना प्रचार कर रहे हैं। हसायन की पूर्व ब्लॉक प्रमुख श्वेता सिंह के पति सुमंत किशोर भी सपा में शामिल हो गए हैं। संवाद
महज 76 वोट से सपा के हाथ से निकल गई थी सीट
हाथरस। वर्ष 2002 के चुनाव की बात करें तो सादाबाद की सीट महज 76 वोटों से सपा के हाथ से निकल गई थी। इस चुनाव में रालोद के प्रत्याशी प्रताप चौधरी को 41972 वोट मिले थे, जबकि सपा के प्रत्याशी डॉ. अनिल चौधरी को 41,896 वोट मिले थे। ऐसे में यह सीट महज 76 वोट से रालोद ने जीत ली थी। संवाद
हमारी पार्टी दोनों सीटों पर दमदारी से चुनाव लड़ेगी। रालोद से गठबंधन तय माना जा रहा है तो सादाबाद से रालोद चुनाव लड़ेगा। पार्टी चुनाव को लेकर पूरी तैयारी कर रही है। पूरी दमदारी से चुनाव लड़ेंगे और सभी सीटों पर जीतेंगे।
-जसवंत सिंह यादव, जिलाध्यक्ष सपा
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प्रदेश में कई बार सत्ता में काबिज रहने वाली सपा इस जिले में अभी तक कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई है। विस चुनाव में हाथरस सीट से तो आज तक सपा को जीत हासिल नहीं हुई है। सादाबाद और सिकंदराराऊ में भी पार्टी अभी तक केवल एक-बार ही जीत हासिल कर सकी है। इस बार सपा इस कोशिश में लगी है कि तयशुदा माने जाने वाले सपा-रालोद गठबंधन के तहत हाथरस और सिकंदराराऊ सीट पर अपने प्रत्याशी उतारे जाएं और दोनों सीटों पर भाजपा को परास्त किया जाए। इसके लिए सपा जोर-शोर से तैयारी भी कर रही है।
यदि इस जिले के चुनावी इतिहास पर निगाह डालें तो हाथरस विधानसभा सीट पर आज तक सपा जीत नहीं सकी है। कई बार सपा ने इस सीट पर गठबंधन के तहत प्रत्याशी नहीं उतारे और अपने सहयोगी दलों के प्रत्याशियों को समर्थन दे दिया, लेकिन सपा समर्थित उम्मीदवार भी यहां से विजय हासिल नहीं कर सके। सिकंदराराऊ विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 1993 में सपा का जब बसपा से गठबंधन था, तब सपा के उम्मीदवार अमर सिंह यादव ने सिकंदराराऊ सीट पर जीत हासिल की थी। इसके बाद सपा को इस सीट पर फिर जीत हासिल नहीं हुई, अलबत्ता वर्ष 2012 के चुनाव में सपा प्रत्याशी यशपाल सिंह चौहान ने रामवीर उपाध्याय को कड़ी टक्कर दी थी।
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रामवीर उपाध्याय को 9,4471 वोट मिले थे तो चौहान को 93408 वोट मिले थे। इस तरह से 1063 वोटों से सपा इस चुनाव में हार गई थी। पिछले विधानसभा चुनाव में इस सीट पर सपा को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। इसी तरह सादाबाद विधानसभा सीट पर सपा अभी तक वर्ष 2012 में ही जीत सकी है। तब सपा के उम्मीदवार देवेंद्र अग्रवाल ने जीत हासिल की थी और उन्होंने बसपा उम्मीदवार सतेंद्र शर्मा को करीब पांच हजार वोटों से हराया था। इसके अलावा वहां सपा कभी जीत हासिल नहीं कर सकी। इस बार यह माना जा रहा है कि सपा और रालोद का गठबंधन होगा और सादाबाद की सीट रालोद के खाते में जाएगी। दोनों पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं ने इसका संकेत भी दे दिया है। इसी हिसाब से दोनो पार्टियां तैयारी भी कर रही हैं। संवाद
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कई नेताओं ने की है सपा में वापसी
हाथरस। सपा में सबसे ज्यादा दावेदार सिकंदराराऊ में सामने आ रहे हैं। कई नेताओं ने पिछले दिनों पार्टी में वापसी भी की है। पूर्व एमएलसी डॉ. राकेश सिंह राना और पूर्व विधायकअमर सिंह यादव ने घर वापसी की है। यह दोनों पहले भी सपा में रह चुके हैं। इसके अलावा कई और नेता भी वहां से दावेदारी कर रहे हैं। यह नेता काफी समय से वहां पार्टी और अपना प्रचार कर रहे हैं। हसायन की पूर्व ब्लॉक प्रमुख श्वेता सिंह के पति सुमंत किशोर भी सपा में शामिल हो गए हैं। संवाद
महज 76 वोट से सपा के हाथ से निकल गई थी सीट
हाथरस। वर्ष 2002 के चुनाव की बात करें तो सादाबाद की सीट महज 76 वोटों से सपा के हाथ से निकल गई थी। इस चुनाव में रालोद के प्रत्याशी प्रताप चौधरी को 41972 वोट मिले थे, जबकि सपा के प्रत्याशी डॉ. अनिल चौधरी को 41,896 वोट मिले थे। ऐसे में यह सीट महज 76 वोट से रालोद ने जीत ली थी। संवाद
हमारी पार्टी दोनों सीटों पर दमदारी से चुनाव लड़ेगी। रालोद से गठबंधन तय माना जा रहा है तो सादाबाद से रालोद चुनाव लड़ेगा। पार्टी चुनाव को लेकर पूरी तैयारी कर रही है। पूरी दमदारी से चुनाव लड़ेंगे और सभी सीटों पर जीतेंगे।
-जसवंत सिंह यादव, जिलाध्यक्ष सपा