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हाथरस: मुडिया पूर्णिमा मेला स्थगित होने से रोडवेज को होगा नुकसान
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
कोरोना की काली छाया इस बार बृज के प्रसिद्ध मुड़िया पूर्णिमा मेले पर भी पड़ गई है। मथुरा जिला प्रशासन ने कोरोना काल के चलते इस बार मुड़िया पूर्णिमा मेले को स्थगित कर दिया गया है। मेला स्थगित होने से अकेले रोडवेज के हाथरस डिपो को ही लाखों रुपये का नुकसान होने का अनुमान है, क्योंकि मेले में हाथरस डिपो की 50 प्रतिशत बसों का संचालन होता था। मेला अवधि के दौरान चालक परिचालकों के अवकाश भी निरस्त कर दिए जाते थे।
उल्लेखनीय है जुलाई माह में पड़ने वाली पूर्णिमा पर गोवर्धन में हर वर्ष बड़े स्तर पर मेला लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु देश के कोने-कोने से जमा होते हैं। इसके लिए परिवहन निगम द्वारा विशेष इंतजाम किए जाते थे। अलीगढ़ रीजन से करीब दो सौ बसों को मेले में लगाया जाता था, जिसमें हाथरस डिपो से अलग-अलग तिथि में 50 प्रतिशत बसों का संचालन होता था। इस बार मेला स्थगित होने से हाथरस डिपो को लाखों का नुकसान होना तय है।
घाटे से उबरने की आस टूटी
हाथरस डिपो कई महीने से घाटे से जूझ रहा है। डिपो के अधिकारियों को मुड़िया पूर्णिमा मेले से आमदनी की आस थी। मेला स्थगित होने से डिपो के अरमानों पर पानी फिर गया है। अब सहालगों पर भी विराम लग गया है, इसलिए इस वर्ष डिपो की आमदनी सुधरने की उम्मीद कम लग रही है।
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इस बार लोकल पैसेंजर ट्रेन का संचालन नहीं
रेलवे प्रशासन ने कोरोना काल के चलते हालांकि अभी मथुरा कासगंज रूट पर संचालित होने वाली पैंसेंजर ट्रेनों का संचालन नहीं किया है। मेले को लेकर स्पेशल ट्रेन का संचालन हर साल किया जाता था। इस बार संचालन होने से रेलवे को भी अच्छा खासा नुकसान होगा।
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कोरोना की काली छाया इस बार बृज के प्रसिद्ध मुड़िया पूर्णिमा मेले पर भी पड़ गई है। मथुरा जिला प्रशासन ने कोरोना काल के चलते इस बार मुड़िया पूर्णिमा मेले को स्थगित कर दिया गया है। मेला स्थगित होने से अकेले रोडवेज के हाथरस डिपो को ही लाखों रुपये का नुकसान होने का अनुमान है, क्योंकि मेले में हाथरस डिपो की 50 प्रतिशत बसों का संचालन होता था। मेला अवधि के दौरान चालक परिचालकों के अवकाश भी निरस्त कर दिए जाते थे।
उल्लेखनीय है जुलाई माह में पड़ने वाली पूर्णिमा पर गोवर्धन में हर वर्ष बड़े स्तर पर मेला लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु देश के कोने-कोने से जमा होते हैं। इसके लिए परिवहन निगम द्वारा विशेष इंतजाम किए जाते थे। अलीगढ़ रीजन से करीब दो सौ बसों को मेले में लगाया जाता था, जिसमें हाथरस डिपो से अलग-अलग तिथि में 50 प्रतिशत बसों का संचालन होता था। इस बार मेला स्थगित होने से हाथरस डिपो को लाखों का नुकसान होना तय है।
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घाटे से उबरने की आस टूटी
हाथरस डिपो कई महीने से घाटे से जूझ रहा है। डिपो के अधिकारियों को मुड़िया पूर्णिमा मेले से आमदनी की आस थी। मेला स्थगित होने से डिपो के अरमानों पर पानी फिर गया है। अब सहालगों पर भी विराम लग गया है, इसलिए इस वर्ष डिपो की आमदनी सुधरने की उम्मीद कम लग रही है।
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इस बार लोकल पैसेंजर ट्रेन का संचालन नहीं
रेलवे प्रशासन ने कोरोना काल के चलते हालांकि अभी मथुरा कासगंज रूट पर संचालित होने वाली पैंसेंजर ट्रेनों का संचालन नहीं किया है। मेले को लेकर स्पेशल ट्रेन का संचालन हर साल किया जाता था। इस बार संचालन होने से रेलवे को भी अच्छा खासा नुकसान होगा।