{"_id":"636e8cfd9ba5216f12163c45","slug":"hathras-know-why-there-is-a-problem-of-salt-water-in-the-villages-of-sadabad-sadabad-news-ali3045258183","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथरस : जानिए क्यों है सादाबाद के गांवों में खारे पानी की समस्या","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथरस : जानिए क्यों है सादाबाद के गांवों में खारे पानी की समस्या
विज्ञापन
हाथरस : गांव मंस्या के समीप बनी टंकी से पानी भरकर ले जाते ग्रामीण। संवाद
- फोटो : SADABAD
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सादाबाद (हाथरस)
जीवन की सबसे बड़ी जरूरत जल है। जब जल ही स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाए तो फिर दुश्वारी का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। क्षेत्र के ऐसे कई गांव हैं, जहां पानी खारा है। यहां लोगों को जीवन जीने के लिए दोहरा श्रम करना पड़ता है। सुबह शाम मीलों दूर से पानी का इंतजाम करना लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।
खारे पानी में बहुत अधिक क्लोराइड की मात्रा होती है, जो शारीरिक विकास को प्रभावित करती है। खारा पानी गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास को रोक देता है। शरीर में आयोडीन की कमी, थायराइड और हाई ब्लड प्रेशर जैसी कई बीमारियां खारे पानी से हो सकती हैं, इसलिए सेहत के मद्देनजर लोगों ने खारे पानी से दूरी बना ली है। जिले की बड़ी पंचायतों में शुमार नौगांव, बिसावर और कुरसंडा में खारे पानी की गंभीर समस्या है। दशकों से यहां के लोग इस समस्या के साथ जीवन जी रहे हैं। इस समस्या को लेकर अब तक जनप्रतिनिधि, प्रशासन और शासन से की गईं शिकायत और सिफारिश बेकार साबित हुई हैं।
कई गांवों में पानी किसी तरह प्रयोग में लाने लायक नहीं हैं। यह पानी इंसान तो दूर, यह जानवरों के पीने लायक भी नहीं है। न जाने कितने सालों से यहां के लोग खारे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने खारे पानी की समस्या पर कभी भी गौर नहीं किया।
विज्ञापन
अब तक आश्वासनों और वादों से ये समस्या दूर होती रही हैं। तत्कालीन विधायक डॉ. अनिल चौधरी के प्रयास से खारे पानी की समस्या को दूर करने के लिए टीटीएसपी योजना के तहत गांव-गांव में पानी की टंकी लगाकर घर-घर जलापूर्ति करने की योजना तैयार की गई थी, लेकिन यह योजना निगरानी के अभाव में परवान न चढ़ सकी। करोड़ों रुपये इस योजना पर पानी की तरह बहा दिया गया।
खारे पानी की समस्या जस की तस है। खारे पानी की समस्या से निपटने के लिए पिछले कुछ सालों से खारे पानी की समस्या से ग्रसित गांवों के लोगों ने तमाम आंदोलन किए, लेकिन समस्या जस की तस है। संवाद
इन ग्राम पंचायतों में है समस्या
मंस्या, नौगांव, अरौठा, गुरसौटी, गीगला, जारऊ, कंजौली, वेदई, जैतई, नानऊ, नौपुरा, मई, अभयपुरा, मिढ़ावली, गहचौली, गुखरौली, गढ़ उमराव, सिथरापुर, जटोई आदि ग्राम पंचायतों के गांवों में खारे पानी की समस्या है, जो लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
ग्रामीणों की वेदना
दशकों से यह समस्या बनी हुई है। आधा जीवन इस समस्या से जूझते हुए निकल गया। सरकार कुछ ऐसा प्रयास करे, जिससे आने वाली पीढ़ी को पानी की सुविधा हो जाए।
-लाल सिंह, कंजौली
दिन के कई घंटे पानी की व्यवस्था करने में लग जाते हैं। परिवार का एक सदस्य पानी के इंतजाम में ही लगा रहता है। खारा पानी पीने से पेट खराब होने के अलावा कई बीमारियां हो जाती हैं।
-गोवर्धन, नगला कलू
समस्या के समाधान के लिए पानी की टंकी लगवाई गई थी, वह भी काम नहीं कर सकी। कई किमी दूर से पानी लाकर काम चलाना पड़ता है। शासन इस समस्या पर ध्यान दे।
-इस्लाम, मंस्या
पूरी पंचायत में पानी बेहद खारा है। वाहनों के माध्यम से काफी दूर से पानी लाना पड़ता है या फिर खरीदना पड़ता है। सरकार इस समस्या पर ध्यान ही नही देती। लोग लगातार शिकायत देते हैं।
-पूरन सिंह, मिढ़ावली
खारे पानी में क्लोराइड की मात्रा ज्यादा होती है, जो गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदेह है। इससे बच्चे का शारीरिक विकास रुकने के अलावा दांत कमजोर हो जाते हैं और बच्चों के हाथ-पैर टेढ़े होने की संभावना रहती है। गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास बाधित हो जाता है। पेट खराब होने के अलावा शरीर में आयोडीन की कमी से अन्य बीमारियां हो सकती हैं। ज्यादा मात्रा में खारा पानी पीने से हाई ब्लड प्रेशर, थायराइड की समस्या होने की प्रबल संभावना रहती है। खारे पानी को नजरअंदाज करना ही बेहतर उपाय है।
-डॉ. मयंक बंसल, प्रभारी चिकित्साधिकारी
जिले के करीब 200 गांव में पीने के पानी के लिए पाइप लाइन योजना के तहत कार्य योजना तैयार हो रही है। इसमें हर ब्लॉक के खारे पानी प्रभावित गांव को भी शामिल किया गया है। वित्तीय स्वीकृति के बाद जल्दी समस्या से निजात मिलेगी।
-मोहम्मद इकबाल, एक्सईएन जल निगम ग्रामीण
विज्ञापन
जीवन की सबसे बड़ी जरूरत जल है। जब जल ही स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाए तो फिर दुश्वारी का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। क्षेत्र के ऐसे कई गांव हैं, जहां पानी खारा है। यहां लोगों को जीवन जीने के लिए दोहरा श्रम करना पड़ता है। सुबह शाम मीलों दूर से पानी का इंतजाम करना लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।
खारे पानी में बहुत अधिक क्लोराइड की मात्रा होती है, जो शारीरिक विकास को प्रभावित करती है। खारा पानी गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास को रोक देता है। शरीर में आयोडीन की कमी, थायराइड और हाई ब्लड प्रेशर जैसी कई बीमारियां खारे पानी से हो सकती हैं, इसलिए सेहत के मद्देनजर लोगों ने खारे पानी से दूरी बना ली है। जिले की बड़ी पंचायतों में शुमार नौगांव, बिसावर और कुरसंडा में खारे पानी की गंभीर समस्या है। दशकों से यहां के लोग इस समस्या के साथ जीवन जी रहे हैं। इस समस्या को लेकर अब तक जनप्रतिनिधि, प्रशासन और शासन से की गईं शिकायत और सिफारिश बेकार साबित हुई हैं।
विज्ञापन
कई गांवों में पानी किसी तरह प्रयोग में लाने लायक नहीं हैं। यह पानी इंसान तो दूर, यह जानवरों के पीने लायक भी नहीं है। न जाने कितने सालों से यहां के लोग खारे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने खारे पानी की समस्या पर कभी भी गौर नहीं किया।
विज्ञापन
अब तक आश्वासनों और वादों से ये समस्या दूर होती रही हैं। तत्कालीन विधायक डॉ. अनिल चौधरी के प्रयास से खारे पानी की समस्या को दूर करने के लिए टीटीएसपी योजना के तहत गांव-गांव में पानी की टंकी लगाकर घर-घर जलापूर्ति करने की योजना तैयार की गई थी, लेकिन यह योजना निगरानी के अभाव में परवान न चढ़ सकी। करोड़ों रुपये इस योजना पर पानी की तरह बहा दिया गया।
खारे पानी की समस्या जस की तस है। खारे पानी की समस्या से निपटने के लिए पिछले कुछ सालों से खारे पानी की समस्या से ग्रसित गांवों के लोगों ने तमाम आंदोलन किए, लेकिन समस्या जस की तस है। संवाद
इन ग्राम पंचायतों में है समस्या
मंस्या, नौगांव, अरौठा, गुरसौटी, गीगला, जारऊ, कंजौली, वेदई, जैतई, नानऊ, नौपुरा, मई, अभयपुरा, मिढ़ावली, गहचौली, गुखरौली, गढ़ उमराव, सिथरापुर, जटोई आदि ग्राम पंचायतों के गांवों में खारे पानी की समस्या है, जो लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
ग्रामीणों की वेदना
दशकों से यह समस्या बनी हुई है। आधा जीवन इस समस्या से जूझते हुए निकल गया। सरकार कुछ ऐसा प्रयास करे, जिससे आने वाली पीढ़ी को पानी की सुविधा हो जाए।
-लाल सिंह, कंजौली
दिन के कई घंटे पानी की व्यवस्था करने में लग जाते हैं। परिवार का एक सदस्य पानी के इंतजाम में ही लगा रहता है। खारा पानी पीने से पेट खराब होने के अलावा कई बीमारियां हो जाती हैं।
-गोवर्धन, नगला कलू
समस्या के समाधान के लिए पानी की टंकी लगवाई गई थी, वह भी काम नहीं कर सकी। कई किमी दूर से पानी लाकर काम चलाना पड़ता है। शासन इस समस्या पर ध्यान दे।
-इस्लाम, मंस्या
पूरी पंचायत में पानी बेहद खारा है। वाहनों के माध्यम से काफी दूर से पानी लाना पड़ता है या फिर खरीदना पड़ता है। सरकार इस समस्या पर ध्यान ही नही देती। लोग लगातार शिकायत देते हैं।
-पूरन सिंह, मिढ़ावली
खारे पानी में क्लोराइड की मात्रा ज्यादा होती है, जो गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदेह है। इससे बच्चे का शारीरिक विकास रुकने के अलावा दांत कमजोर हो जाते हैं और बच्चों के हाथ-पैर टेढ़े होने की संभावना रहती है। गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास बाधित हो जाता है। पेट खराब होने के अलावा शरीर में आयोडीन की कमी से अन्य बीमारियां हो सकती हैं। ज्यादा मात्रा में खारा पानी पीने से हाई ब्लड प्रेशर, थायराइड की समस्या होने की प्रबल संभावना रहती है। खारे पानी को नजरअंदाज करना ही बेहतर उपाय है।
-डॉ. मयंक बंसल, प्रभारी चिकित्साधिकारी
जिले के करीब 200 गांव में पीने के पानी के लिए पाइप लाइन योजना के तहत कार्य योजना तैयार हो रही है। इसमें हर ब्लॉक के खारे पानी प्रभावित गांव को भी शामिल किया गया है। वित्तीय स्वीकृति के बाद जल्दी समस्या से निजात मिलेगी।
-मोहम्मद इकबाल, एक्सईएन जल निगम ग्रामीण