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हाथरस : विधानसभा चुनाव : निर्दलीयों ने भी कई बार मारी है बाजी
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले में कई बार निर्दलीय प्रत्याशी बड़े-बड़े दलों का गणित बिगाड़ चुके हैं। जिले की सिकंदराराऊ और सादाबाद सीट पर कई बार निर्दलीय प्रत्याशी जीत हासिल कर चुके हैं और पूरा जोर लगाने के बाद भी कई बड़े दलों के प्रत्याशी उनसे पीछे रहे हैं। निर्दलीय चुनाव जीतकर इन नेताओं ने साबित कर दिया है कि यदि शख्सियत में दम हो तो निर्दलीय भी जीत हासिल की जा सकती है।
बात यदि सिकंदराराऊ सीट की करें तो अब तक जिले में यहां चार बार निर्दलीय प्रत्याशी जीत हासिल कर चुके हैं। सिकंदराराऊ विधानसभा सीट से वर्ष 1962 में निर्दलीय नेकराम शर्मा ने जीत हासिल की। अगली बार वर्ष 1967 के विधानसभा चुनाव में नेकराम शर्मा ने फिर निर्दलीय जीत हासिल की और उन्होंने कांग्रेस के ओ सिंह को हराया। वर्ष 1969 में निर्दलीय जगदीश गांधी ने आरपीआई के फरजंद अली खां को करीब पांच हजार वोटोें से परास्त किया।
इसके बाद वर्ष 2002 में निर्दलीय प्रत्याशी अमर सिंह यादव ने भाजपा के यशपाल सिंह चौहान को चुनाव में पटखनी दी। इसी तरह सादाबाद विधानसभा सीट से वर्ष 1957 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में टीकाराम पुजारी चुनाव लड़े और उन्होंने कांग्रेस के अशरफ अली खां को मात दी। हालांकि हाथरस सीट पर अभी तक किसी निर्दलीय ने जीत हासिल नहीं की है, लेकिन कई बड़े दलों के समीकरण जरूर बिगाड़े हैं। संवाद
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जिले में कई बार निर्दलीय प्रत्याशी बड़े-बड़े दलों का गणित बिगाड़ चुके हैं। जिले की सिकंदराराऊ और सादाबाद सीट पर कई बार निर्दलीय प्रत्याशी जीत हासिल कर चुके हैं और पूरा जोर लगाने के बाद भी कई बड़े दलों के प्रत्याशी उनसे पीछे रहे हैं। निर्दलीय चुनाव जीतकर इन नेताओं ने साबित कर दिया है कि यदि शख्सियत में दम हो तो निर्दलीय भी जीत हासिल की जा सकती है।
बात यदि सिकंदराराऊ सीट की करें तो अब तक जिले में यहां चार बार निर्दलीय प्रत्याशी जीत हासिल कर चुके हैं। सिकंदराराऊ विधानसभा सीट से वर्ष 1962 में निर्दलीय नेकराम शर्मा ने जीत हासिल की। अगली बार वर्ष 1967 के विधानसभा चुनाव में नेकराम शर्मा ने फिर निर्दलीय जीत हासिल की और उन्होंने कांग्रेस के ओ सिंह को हराया। वर्ष 1969 में निर्दलीय जगदीश गांधी ने आरपीआई के फरजंद अली खां को करीब पांच हजार वोटोें से परास्त किया।
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इसके बाद वर्ष 2002 में निर्दलीय प्रत्याशी अमर सिंह यादव ने भाजपा के यशपाल सिंह चौहान को चुनाव में पटखनी दी। इसी तरह सादाबाद विधानसभा सीट से वर्ष 1957 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में टीकाराम पुजारी चुनाव लड़े और उन्होंने कांग्रेस के अशरफ अली खां को मात दी। हालांकि हाथरस सीट पर अभी तक किसी निर्दलीय ने जीत हासिल नहीं की है, लेकिन कई बड़े दलों के समीकरण जरूर बिगाड़े हैं। संवाद
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