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हाथरस: किला राजा दयाराम, मंदिर श्रीदाऊजी महाराज क्षेत्र पर्यटन स्थल के रूप में नहीं हो सके विकसित
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हाथरस: ऐतिहासिक किला क्षेत्र में हो रहा अतिक्रमण।
- फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
पुरातन महत्व के किला राजा दयाराम व मंदिर श्रीदाऊजी महाराज को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की कई योजनाएं दम तोड़ गईं। यह स्थल यूपी पर्यटन निगम के नक्शे पर तो है, लेकिन पिछले पांच वर्ष से इस स्थल पर कोई काम नहीं हुआ। पर्यटन निगम ने शुरू में करोड़ों की योजनाएं बनाईं और लाखों रुपये खर्च भी किए, लेकिन उसके बाद इन योजनाओं को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। निगम की यह योजना थी कि इस स्थल को रमणीक बनाया जाए, जिससे यहां पर्यटक आएं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब यह स्थान लगातार अतिक्रमण की चपेट में आ रहा है और इसके करीब 60 फीसदी हिस्से पर अवैध कब्जा है।
हाथरस में ऐतिहासिक किला राजा दयाराम और मंदिर श्रीदाऊजी महाराज काफी पुराना इतिहास समेटे हुए है। करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन पर फैले एक एतिहासिक स्थल को रमणीक पर्यटक स्थल बनवाने के लिए करीब ढाई दशक पहले वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश कुमार शर्मा ने पैरवी की। वह इस मामले को लेकर हाईकोर्ट भी गए। हाईकोर्ट ने वर्ष 2004 में शासन-प्रशासन को इस बारे में निर्देशित किया। इससे परिणामस्वरूप पुरातत्व विभाग, पर्यटन विभाग, स्थानीय प्रशासन चेता। पुरातत्व विभाग ने वहां चहारदीवारी भी कराई। पर्यटन विभाग ने कई योजनाएं बनाईं और उसके लिए धनराशि भी आवंटित की।
वहां हाईमास्क लाइटें भी लगवाई गईं। किला क्षेत्र के लिए जाने वाले मार्गों पर द्वार भी बनवाए गए। पानी की टंकी भी बनवाई गईं। कुछ कमरे और शौचालय भी बनवाए गए। इन सुविधाओं का उद्देश्य वहां पर्यटकों को आकर्षित करना था। बैंचें भी लगाई गईं। इसके बाद शहर के मुख्य मार्गों पर साइनेज बोर्ड भी लगाए गए, जिस पर संरक्षित किला राजा दयाराम स्थल की दूरी लिखी है। इसके बाद यूपी पर्यटन निगम यहां का विकास कराना भूल गया। स्थानीय प्रशासन ने भी इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। ऐसे में अतिक्रमणकारी इस पुरातन स्थल पर और ज्यादा हावी हो गए। वर्तमान में इस स्थल की करीब 60 फीसदी भूमि पर अवैध कब्जा है। पर्यटन की दृष्टि से इस स्थल को और विकसित करने की कई योजनाएं फाइलों में दबी हैं।
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बातचीत--
इस स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। मेला श्रीदाऊजी महाराज के फंड में ही काफी धनराशि है, जो यहां लगाई जा सकती है। इसके अलावा जिला योजना में इसके लिए प्रस्ताव लाया जा सकता है। पांच वर्ष से तो पर्यटन की दृष्टि से यहां कोई काम ही नहीं हुआ है। सबसे पहले जरूरत इस बात ही है कि इस पौराणिक स्थल से अवैध कब्जे हटाए जाएं।
-हरीश कुमार शर्मा एडवोकेट वरिष्ठ अधिवक्ता
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पुरातन महत्व के किला राजा दयाराम व मंदिर श्रीदाऊजी महाराज को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की कई योजनाएं दम तोड़ गईं। यह स्थल यूपी पर्यटन निगम के नक्शे पर तो है, लेकिन पिछले पांच वर्ष से इस स्थल पर कोई काम नहीं हुआ। पर्यटन निगम ने शुरू में करोड़ों की योजनाएं बनाईं और लाखों रुपये खर्च भी किए, लेकिन उसके बाद इन योजनाओं को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। निगम की यह योजना थी कि इस स्थल को रमणीक बनाया जाए, जिससे यहां पर्यटक आएं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब यह स्थान लगातार अतिक्रमण की चपेट में आ रहा है और इसके करीब 60 फीसदी हिस्से पर अवैध कब्जा है।
हाथरस में ऐतिहासिक किला राजा दयाराम और मंदिर श्रीदाऊजी महाराज काफी पुराना इतिहास समेटे हुए है। करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन पर फैले एक एतिहासिक स्थल को रमणीक पर्यटक स्थल बनवाने के लिए करीब ढाई दशक पहले वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश कुमार शर्मा ने पैरवी की। वह इस मामले को लेकर हाईकोर्ट भी गए। हाईकोर्ट ने वर्ष 2004 में शासन-प्रशासन को इस बारे में निर्देशित किया। इससे परिणामस्वरूप पुरातत्व विभाग, पर्यटन विभाग, स्थानीय प्रशासन चेता। पुरातत्व विभाग ने वहां चहारदीवारी भी कराई। पर्यटन विभाग ने कई योजनाएं बनाईं और उसके लिए धनराशि भी आवंटित की।
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वहां हाईमास्क लाइटें भी लगवाई गईं। किला क्षेत्र के लिए जाने वाले मार्गों पर द्वार भी बनवाए गए। पानी की टंकी भी बनवाई गईं। कुछ कमरे और शौचालय भी बनवाए गए। इन सुविधाओं का उद्देश्य वहां पर्यटकों को आकर्षित करना था। बैंचें भी लगाई गईं। इसके बाद शहर के मुख्य मार्गों पर साइनेज बोर्ड भी लगाए गए, जिस पर संरक्षित किला राजा दयाराम स्थल की दूरी लिखी है। इसके बाद यूपी पर्यटन निगम यहां का विकास कराना भूल गया। स्थानीय प्रशासन ने भी इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। ऐसे में अतिक्रमणकारी इस पुरातन स्थल पर और ज्यादा हावी हो गए। वर्तमान में इस स्थल की करीब 60 फीसदी भूमि पर अवैध कब्जा है। पर्यटन की दृष्टि से इस स्थल को और विकसित करने की कई योजनाएं फाइलों में दबी हैं।
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इस स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। मेला श्रीदाऊजी महाराज के फंड में ही काफी धनराशि है, जो यहां लगाई जा सकती है। इसके अलावा जिला योजना में इसके लिए प्रस्ताव लाया जा सकता है। पांच वर्ष से तो पर्यटन की दृष्टि से यहां कोई काम ही नहीं हुआ है। सबसे पहले जरूरत इस बात ही है कि इस पौराणिक स्थल से अवैध कब्जे हटाए जाएं।
-हरीश कुमार शर्मा एडवोकेट वरिष्ठ अधिवक्ता