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हाथरस : जब तक यह राणा जिंदा है, मेवाड़ गुलाम नहीं होगा...
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कवि सम्मेलन को सुनते श्रोता। संवाद
- फोटो : SIKANDHRA RAHU
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संवाद न्यूज एजेंसी, सिकंदराराऊ।
सरला नारायण ट्रस्ट के बैनर तले शनिवार को नगर के हुमैरा मैरिज होम के सभागार में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस मौके पर श्रोता कई घंटे तक काव्य गंगा में डुबकी लगाते रहे। यश भारती से सम्मानित डॉ. विष्णु सक्सेना द्वारा स्थापित ट्रस्ट के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षक सम्मान सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य रहे तारेश अग्निहोत्री को विमला विश्वनाथ सहाय शिक्षक सम्मान दिया गया।
यह पूरा कार्यक्रम नगर के वरिष्ठ कवि स्वर्गीय श्री कृष्णकांत देव गर्ग को समर्पित था। उनके परिवार के समस्त सदस्यों का शाल ओढ़ाकर और फूलमालाएं पहनाकर स्वागत किया गया। प्रथम सत्र में अध्यक्ष सोम ठाकुर, मुख्य अतिथि डॉ. राजेंद्र पैंसिया उपाध्यक्ष आगरा विकास प्राधिकरण, समाजसेवी उदय पुंढीर एवं विशिष्ट अतिथि शहर कोतवाल अशोक कुमार सिंह थे।
संचालन मुख्य ट्रस्टी सारांश सक्सेना ने किया। मुख्य सचिव चित्रांश सक्सेना ने वर्ष भर की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। हाथरस से आए डॉ. नितिन मिश्रा ने हमारी याद करके सिसकियों से काम लेती है, सुना है आजकल वो हिचकियों से काम लेती है, हमें मालूम है वो चाहती है देखना, लेकिन दरों को बंद करके खिड़कियों से काम लेती है, सुनाकर तालियां बटोरीं।
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सागवाड़ा राजस्थान के विपिन वत्सल ने सारे सागर को स्याही कर दे हम, शब्द सारे कलम को धर दे हम, प्यार क्या है बता नही सकते, चाहे अंबर को लिख के भर दे हम, सुनाई। झारखंड के विद्या वैभव भारद्वाज ने जिंदगी खूबसूरत हुई, जब से ये दास्तां हो गई, उनसे मिलकर लगा एक पल हर खुशी मेहरबां हो गई, जो जवानी में थे सोचते लड़कियां खेल की चीज हैं, आज खुद से ही डरने लगे बेटियां जब जवां हो गईं।
औरैया के अजय अंजाम ने बस एक प्रार्थना है स्वामी दुश्मन का सिद्ध षड्यंत्र न हो, जब तक चेतक की याद रहे मेवाड़ मेरा परतंत्र न हो, चेतक तेरी सौगंध मुझे दुश्मन का नाम नहीं होगा, जब तक यह राणा जिंदा है, मेवाड़ गुलाम नहीं होगा, सुनाकर रोमांचित कर दिया। सोनरूपा विशाल ने जो मिला ही नहीं वो खोता क्या, कोई बंजर जमी पे बोता क्या, प्यार है तो है ये जहां कायम प्यार होता नहीं तो होता क्या, सुनाकर तालियां बटोरीं।
संचालक सतीश मधु ने ये धरा अब राजधानी बन गई शैतान की, जान की रक्षा स्वयं ही कीजिए हे जानकी सुनाई। सुमन दुबे ने दर्द का दिल में कोई रतन रख लिया गीत गा गा के दुनिया का मन रख लिया, इस कदर हमको कांटे चुभोए गए, नाम हमने भी अपना सुमन रख लिया, सुनाकर वाहवाही लूटी।
ग्वालियर के व्यंग के कवि तेज नारायण शर्मा बेचैन ने चुटकुले सुनाकर सबको गुदगुदाया। अंत में गीत ऋषि सोम ठाकुर ने अपनी प्रतिनिधि कविता सुनाई। अंत में डॉ. विष्णु सक्सेना ने आभार व्यक्त किया।
हाजी उमर, विपिन वार्ष्णेय, विजय भारत, डॉ. अरविंद सारस्वत, भगवानदास गुप्ता, भद्रपाल सिंह, सच्चिदानंद, डॉ. विजय प्रकाश, मुकुल गुप्ता, सूरज वार्ष्णेय, पंकज राठी संजीव माहेश्वरी, तरुण माहेश्वरी, गौरीशंकर गुप्ता एडवोकेट, मीरा माहेश्वरी, अनिल प्रताप, रानू पंडित, देवेंद्र दीक्षित शूल आदि मौजूद थे।
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सरला नारायण ट्रस्ट के बैनर तले शनिवार को नगर के हुमैरा मैरिज होम के सभागार में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस मौके पर श्रोता कई घंटे तक काव्य गंगा में डुबकी लगाते रहे। यश भारती से सम्मानित डॉ. विष्णु सक्सेना द्वारा स्थापित ट्रस्ट के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षक सम्मान सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य रहे तारेश अग्निहोत्री को विमला विश्वनाथ सहाय शिक्षक सम्मान दिया गया।
यह पूरा कार्यक्रम नगर के वरिष्ठ कवि स्वर्गीय श्री कृष्णकांत देव गर्ग को समर्पित था। उनके परिवार के समस्त सदस्यों का शाल ओढ़ाकर और फूलमालाएं पहनाकर स्वागत किया गया। प्रथम सत्र में अध्यक्ष सोम ठाकुर, मुख्य अतिथि डॉ. राजेंद्र पैंसिया उपाध्यक्ष आगरा विकास प्राधिकरण, समाजसेवी उदय पुंढीर एवं विशिष्ट अतिथि शहर कोतवाल अशोक कुमार सिंह थे।
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संचालन मुख्य ट्रस्टी सारांश सक्सेना ने किया। मुख्य सचिव चित्रांश सक्सेना ने वर्ष भर की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। हाथरस से आए डॉ. नितिन मिश्रा ने हमारी याद करके सिसकियों से काम लेती है, सुना है आजकल वो हिचकियों से काम लेती है, हमें मालूम है वो चाहती है देखना, लेकिन दरों को बंद करके खिड़कियों से काम लेती है, सुनाकर तालियां बटोरीं।
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सागवाड़ा राजस्थान के विपिन वत्सल ने सारे सागर को स्याही कर दे हम, शब्द सारे कलम को धर दे हम, प्यार क्या है बता नही सकते, चाहे अंबर को लिख के भर दे हम, सुनाई। झारखंड के विद्या वैभव भारद्वाज ने जिंदगी खूबसूरत हुई, जब से ये दास्तां हो गई, उनसे मिलकर लगा एक पल हर खुशी मेहरबां हो गई, जो जवानी में थे सोचते लड़कियां खेल की चीज हैं, आज खुद से ही डरने लगे बेटियां जब जवां हो गईं।
औरैया के अजय अंजाम ने बस एक प्रार्थना है स्वामी दुश्मन का सिद्ध षड्यंत्र न हो, जब तक चेतक की याद रहे मेवाड़ मेरा परतंत्र न हो, चेतक तेरी सौगंध मुझे दुश्मन का नाम नहीं होगा, जब तक यह राणा जिंदा है, मेवाड़ गुलाम नहीं होगा, सुनाकर रोमांचित कर दिया। सोनरूपा विशाल ने जो मिला ही नहीं वो खोता क्या, कोई बंजर जमी पे बोता क्या, प्यार है तो है ये जहां कायम प्यार होता नहीं तो होता क्या, सुनाकर तालियां बटोरीं।
संचालक सतीश मधु ने ये धरा अब राजधानी बन गई शैतान की, जान की रक्षा स्वयं ही कीजिए हे जानकी सुनाई। सुमन दुबे ने दर्द का दिल में कोई रतन रख लिया गीत गा गा के दुनिया का मन रख लिया, इस कदर हमको कांटे चुभोए गए, नाम हमने भी अपना सुमन रख लिया, सुनाकर वाहवाही लूटी।
ग्वालियर के व्यंग के कवि तेज नारायण शर्मा बेचैन ने चुटकुले सुनाकर सबको गुदगुदाया। अंत में गीत ऋषि सोम ठाकुर ने अपनी प्रतिनिधि कविता सुनाई। अंत में डॉ. विष्णु सक्सेना ने आभार व्यक्त किया।
हाजी उमर, विपिन वार्ष्णेय, विजय भारत, डॉ. अरविंद सारस्वत, भगवानदास गुप्ता, भद्रपाल सिंह, सच्चिदानंद, डॉ. विजय प्रकाश, मुकुल गुप्ता, सूरज वार्ष्णेय, पंकज राठी संजीव माहेश्वरी, तरुण माहेश्वरी, गौरीशंकर गुप्ता एडवोकेट, मीरा माहेश्वरी, अनिल प्रताप, रानू पंडित, देवेंद्र दीक्षित शूल आदि मौजूद थे।

कवि सम्मेलन में दीप प्रज्ज्वलित करते गीतकर सोम ठाकुर, डॉ. विष्णु सक्सेना। संवाद- फोटो : SIKANDHRA RAHU