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हाथरस : अमृत योजना की पाइप लाइन फटी, पांच मकान क्षतिग्रस्त

Mon, 22 Aug 2022 12:05 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 22 Aug 2022 12:05 AM IST
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Hathras: Amrit Yojana pipeline burst, five houses damaged
नगला भोजा में मकान की छत में पड़ी दरार। संवाद - फोटो : HATHRAS
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
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शहर के नगला भोजा में अमृत योजना लोगों के लिए मुसीबत बन रही है। शनिवार की शाम को अमृत योजना की लीकेज पाइप लाइन फटने से पांच मकानों में दरारें पड़ गई। कुछ की दीवारें धसक गई। यह पाइप लंबे समय से लीकेज कर रही थी और इसकी वजह से इन मकानों की नींव में पानी जा रहा था। स्थिति यह हो गई कि यह मकान गिरासू हो गए। लोगों ने अपने सामान घरों से बाहर निकाल लिए। लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी। नगर पालिकाध्यक्ष स्थिति का जायजा लेने के लिए वहां पहुंचे। उन्होंने इस बारे में डीएम को अवगत कराया है।
शहर में अमृत योजना की पाइप लाइनें बिछी हैं लेकिन ज्यादातर इलाकों में यह जर्जर हालत में हैं। इन पाइप लाइनों से काफी इलाकों में जलापूर्ति भी नहीं हो रही। शहर के नगला भोजा में भी काफी समय से यही स्थिति थी। यहां पानी केवल मुख्य पाइप लाइन में ही आ रहा था लेकिन घरों में पानी नहीं पहुंच रहा था।
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यह पाइप लाइन लीकेज हो रही थी। इसकी वजह से यह पानी जमीन के अंदर जा रहा था और आसपास के घरों की नींव तक पहुंच रहा था। शनिवार की देर शाम यह पाइप लाइन एक धमाके के साथ फट गई। पांच मकानों की दीवारें, छत आदि में दरारें पड़ गई। कुछ की दीवारें नींव से ही दरक गई और सड़क के नीचे जमीन खोखली हो गई। इसमें कंचन सिंह, ललतेश कुमार, रामकिशन, हरि सिंह व पप्पू सिंह के मकान शामिल हैं।
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पालिकाध्यक्ष ने इस मामले में डीएम को अवगत कराया है। उनका कहना है कि नगर में जल निगम ने जो पाइप लाइनें डाली हैं, वह लीक हो रही हैं। इस सिलसिले में शनिवार की शाम से जल निगम के अधिशासी अभियंता को फोन लगा रहे हैं लेकिन वह फोन नहीं उठा रहे।
खुले आसमान के नीचे बिताई रात
पीड़ित लोगों ने अपनी पूरी रात घर के बाहर खुले में बिताई। लोगों को यह डर सता रहा है कि उनकी मकानों में दरारें लगातार बढ़ती जा रही हैं। रविवार की शाम को जल निगम के कुछ अधिकारी वहां आए तो लोगों से उनकी नोक-झोंक भी हुई। जल निगम के एक अधिकारी ने जब यह सलाह दी कि इन मकानों की दरारों में सीमेंट आदि भरकर रहना शुरू कर दें तो लोगों ने उन्हें खरी खोटी सुनाई। बाद में अधिकारी वहां से लौट गए।
- मैं 70 वर्षीय बुजुर्ग हूं और मजदूरी करते जैसे-तैसे जीवन यापन करता हूं। मेरे मकान में जल निगम की लापरवाही की वजह से दरार आ गई है। इसकी वजह की हमें खुले आसमान के नीचे रहना पड़ रहा है। अभी तक किसी भी अधिकारी ने सुध नहीं ली है। - हरी सिंह
- पूरा मकान क्षतिग्रस्त हो गया है और दूसरे मकान पर एक तरह से टिक गया है। यह कभी भी पूरा गिर सकता है। बच्चों को लेकर खुले आसमान के नीचे रहना पड़ रहा है। अधिकारियों को अवगत करा दिया है लेकिन कोई आया ही नहीं है। - कंचन सिंह

- चार अगस्त को मेरे यहां बेटी का जन्म हुआ। मकान में दरार आने की वजह से छोटे बच्चे को लेकर खुले आसमान के नीचे रहना पड़ रहा है। जिसकी लापरवाही हो, उसके खिलाफ कार्यवाही की जाए और हमें मुआवजा दिलाया जाए। - ललतेश।
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