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Hariyali Teej: शिव-पार्वती का पूजन कर मनाई हरियाली तीज, महिलाओं ने व्रत रख कर की गौर पूजा

Mon, 28 Jul 2025 01:39 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Mon, 28 Jul 2025 01:39 AM IST
सार

हरियाली तीज पर घर-घर में भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा हुई। शहर के मंदिरों में हरियारे शृंगार के साथ हरियाली छटा छाई रही। मंदिरों में सुबह से ही धार्मिक आयोजन आयोजित किए गए। 

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Hariyali Teej was celebrated by worshipping Shiva-Parvati
इनरव्हील क्लब हाथरस रॉयल के हरियाली तीज कार्यक्रम में शामिल पदाधिकारी - फोटो : स्वयं

विस्तार

हरियाली तीज हाथरस जिले में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। पति की लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने व्रत रखा। गौर के साथ भगवान शिव व पार्वती की पूजा की। महिलाओं ने सोलह शृंगार कर झूलों का आनंद लिया। किला परिसर में आयोजित मेले में महिलाओं ने परिवार के साथ झूला झूलकर परंपरा को कायम रखा। 

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पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ के बाद हरियाली तीज ऐसा त्योहार है, जिसे महिलाएं पूरी श्रद्धा भक्ति के साथ मनाती हैं। इस साल भी हरियाली तीज पर सुबह से ही महिलाओं ने तैयारी शुरू कर दी। शृंगार कर पति की लंबी आयु के लिए भगवान शिव और पार्वती मैया की पूजा की। महिलाओं व युवतियों ने झूला झूलकर सावन की मल्हारें गाईं। एक दिन पहले देर शाम तक महिलाओं ने परिवार के साथ बैठकर मेहंदी लगवाई। वहीं तमाम महिलाएं रात तक ब्यूटी पार्लर आदि पर सजती संवरती दिखाईं दीं। 
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किला परिसर में लगा मेला 
हर साल की भांति इस साल भी किला परिसर में हरियाली तीज का मेला लगा। इस आयोजन में किला परिसर में बने तमाम सामाजिक व राजनीतिक संगठन के शिविरों के द्वार पर झूले लगाए गए। महिलाओं ने झूले झूलने के साथ वहां मौजूद चाट पकौड़ी के ठेलों पर व्यंजनों का आनंद लिया। इसके साथ ही बच्चों ने यहां आए खेल तमाशों का आनंद लिया।

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गड्ढेश्वर महादेव सहित अन्य मंदिरों में किए शृंगार 

हरियाली तीज पर घर-घर में भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा हुई। शहर के मंदिरों में हरियारे शृंगार के साथ हरियाली छटा छाई रही। मंदिरों में सुबह से ही धार्मिक आयोजन आयोजित किए गए। हरियाली तीज को लेकर मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया। कई मंदिरों में भगवान को हरी पोशाक धारण कराई गई। शाम को हरी पत्तियों से शृंगार कराया। भजनों के साथ कीर्तन आदि का आयोजन हुआ। शहर के गड्ढेश्वर महादेव, दाऊजी मंदिर, बिहारी महाराज मंदिर, ठाकुर कन्हैयालाल महाराज मंदिर, गोविंद भगवान मंदिर, खाती खाना के सपरिया वाले मंदिर आदि पर विशेष आयोजन हुए।

समय के साथ बदली हरियाली तीज की रंगत

हरियाली तीज सावन के महीने का महत्वपूर्ण त्योहार है, लेकिन आधुनिकता की चकाचौंध ने इस त्योहार की रंगत भी बदलकर रख दी है। एक समय था जब हरियाली तीज का त्योहार बिना झूलों के अधूरा होता था। महिलाएं और युवतियां सामूहिक रूप से सावन की मल्हारें गाते हुए झूला झूलती थीं।
भारत विकास परिषद की संस्कार शाखा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में तीज कपल को सम्मानित करते अतिथि
इन्हें चहकते देखकर घर का हर सदस्य उल्लास और उमंग से भर जाता था, लेकिन अब शहर में न तो बाग-बगीचे बचे हैं और न हीं त्योहारों के प्रति पहले जैसा उल्लास लोगों में बचा है। पेड़ों पर झूला झूलने की परंपरा यदा कदा ही देखने को मिलती है। मोहल्लों में सामूहिक रूप से मनाया जाने वाला यह त्योहार दूसरे त्योहारों की तरह अब क्लब व किटी पार्टियों में अपनी पैंठ बना चुका है। बुजुर्ग महिलाएं हरियाली तीज से जुड़ीं यादें साझा करते हुए आज भी उल्लास से भर जाती हैं।

पहले प्रेम भाव व सम्मान का प्रतीक थी तीज

शहर से सटे गांव नगला मोठा निवासी माया देवी का कहना है कि हरियाली तीज वक्त के साथ आधुनिक हो गई है। पहले यह त्योहार परिवारों में प्रेम भाव और सम्मान का प्रतीक होता था। देवरानी, जेठानी, सास एक साथ मिलकर त्योहार मनाती थीं, लेकिन अब यह सब बहुत कम देखने को मिलता है। जगह की कमी के कारण मकानों से आंगन खत्म हो गए, मोहल्लों से पेड़ गायब हो गए, अब कहां झूले डाले जाएं। पहले बहुओं के मायके से भाई या पिता सिंघारा लेकर आते थे। 

देवरानी-जेठानी मिलकर झूला झूलती थीं
शहर के पुराना मिल कंपाउंड निवासी ओमवती अग्रवाल बताती हैं कि अब तो पता ही नहीं चलता कि कब त्योहार आए और कब चले गए। मेरे मायके में हरियाली तीज पर शिव-पार्वती के साथ गौर बनाए जाते थे। इनकी रक्षाबंधन तक सुहागिनें हर रोज पूजा करती थीं। परिवार व आस पड़ोस की देवरानी-जेठानी दो झूलों में पैर फंसाकर झूला झूलती थीं। बीना शर्मा बताती हैं कि वह सौभाग्यशाली हैं कि आज उनकी चार बहुएं हैं, जो उन्हें परंपराओं को निभाने में मदद करती हैं। परंपराओं को कायम रखने के लिए संयुक्त परिवारों का होना बहुत जरूरी है। एकल परिवार में यह सब नहीं हो पाता।

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