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हत्या में सात लोगों को आजीवन कारावास

Wed, 21 Sep 2016 11:38 PM IST
अमर उजाला, हाथरस
अमर उजाला, हाथरस Updated Wed, 21 Sep 2016 11:38 PM IST
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Killing seven people to life imprisonment
कोर्ट - फोटो : डेमो फोटो
अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने हत्या के सात आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने इन सभी को सश्रम अजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने यह व्यवस्था भी दी है कि अभियुक्तों को अर्थदंड अदा नहीं करने पर दस-दस माह का अतिरिक्त कारावास भी भोगना होगा। अर्थदंड की 70 प्रतिशत धनराशि मृतक के माता-पिता को प्रतिकर के रूप में दिए जाने के भी आदेश न्यायालय ने दिए हैं।
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कोतवाली सिकंदराराऊ पुलिस को सुंदरी देवी निवासी नगला बैनी थाना कासगंज जिला कासगंज ने 10 अप्रैल, 2006 को एक तहरीर दी, जिसमें आरोप लगाया कि उसका पुत्र मुकेश और सतीश मेरठ में रहकर मजदूरी करते थे। उनके साथ बड्डा उर्फ रामअवतार पुत्र डालचंद्र निवासी नगला बैनी थाना कासगंज एटा भी मेरठ में नौकरी करता था। मेरे पुत्रों का इनके साथ आना-जाना था, परंतु दो माह पूर्व रामअवतार के चाचा लाखन की पुत्री ओमवती अपने चचेरे भाई रामअवतार के साथ मेरठ घूमने पहुंच गई। मेरठ में रहने के कारण लाखन सिंह को वादिया के पुत्र मुकेश पर यह शक था कि लड़की मुकेश के साथ चली गई है।
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इस आधार पर लाखन सिंह ने उसके पुत्र के खिलाफ थाना कासगंज में इस लड़की को गायब करने की तहरीर दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर जांच की। लड़की की बरामदगी के बाद उसके बयान के आधार पर मामला रफा-दफा कर दिया गया।  शक के आधार पर बड़ा उर्फ रामअवतार, कमल सिंह और नन्नू निवासी नगला बैनी थाना कासगंज उसके पुत्र से रंजिश मानने लगे। इन लोगों ने उसके पुत्र मुकेश को फोन कर बहला-फुसला कर बुला लिया।
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जब मुकेश वापस नहीं पहुंचा तो उसके भाई सतीश ने गांव में फोन कर पता किया। जब उसकी तलाश की तो उसका कुछ पता नहीं चला। इस दौरान सिकंदराराऊ पुलिस को 10 मार्च, 2006 को                मुगलगढ़ी सिकंदराराऊ के पास एक लाश होने की जानकारी दी गई, जिसके कपड़ों से मुकेश के हत्या होने की पुष्टि हुई। पुलिस ने जांच के बाद लाखन सिंह, अनोखेलाल, नन्नू सिंह, रामअवतार, रामप्रसाद और कमल सिंह निवासीगण नगला बैनी थाना कासगंज और धर्मवीर सिंह निवासी नगला मसंद थाना सिकंदराराऊ के खिलाफ न्यायालय ने आरोप पत्र दाखिल किया। न्यायालय ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना।

एडीजीसी राजेंद्र वार्ष्णेय ने आरोपियों के अधिवक्ताओं द्वारा दी गई दलीलों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। न्यायालय ने आरोपियों को दोषी माना। 

 न्यायालय ने 201,120बी और 364 आदि के तहत भी अलग-अलग सजाओं का प्राविधान करते हुए सभी सजाओं के एक साथ चलने और जेल में बिताई गई अवधि को भी सजा में शामिल करने के आदेश दिए हैं। 
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