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विनोद उपाध्याय की गिरफ्तारी पर एक दिन के लिए रोक
hathras
Updated Wed, 06 Jan 2016 11:46 PM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। हाईकोर्ट ने हाथरस से जिला पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशी विनोद उपाध्याय को चुनाव लड़ने और मतदान करने से रोकने की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने विनोद के खिलाफ दर्ज जानलेवा हमले के मुकदमे में एक दिन के लिए उनकी गिरफ्तारी पर भी रोक लगाई है। विनोद उपाध्याय पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई हैं। आरोप है कि वह मतदाताओं को प्रभावित कर रहे हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर सपा प्रत्याशी ओमवती ने विनोद के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति मुख्तार अहमद की खंडपीठ ने इस पर सुनवाई की। विनोद उपाध्याय की ओर से अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने दोनों याचिकाओं पर पक्ष रखते हुए कहा कि सारा मामला राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का है। जिला पंचायत अध्यक्ष पर नामांकन करने की वजह से याची के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कराकर उसे चुनाव लड़ने से रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
गिरफ्तारी पर रोक के मामले में न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति एएस चौहान की पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने इस प्रकरण पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि चुनाव के समय ही इस प्रकार की प्राथमिकियां क्यों दर्ज कराई जाती हैं। विनोद उपाध्याय की गिरफ्तारी पर एक दिन (सात जनवरी तक) रोक लगाते हुए कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह से हलफनामा मांगा है। सहायक शासकीय अधिवक्ता को निर्देश दिया है कि आदेश की जानकारी संबंधित जिले के डीएम और एसएसपी को तत्काल उपलब्ध कराई जाए।
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर सपा प्रत्याशी ओमवती ने विनोद के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति मुख्तार अहमद की खंडपीठ ने इस पर सुनवाई की। विनोद उपाध्याय की ओर से अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने दोनों याचिकाओं पर पक्ष रखते हुए कहा कि सारा मामला राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का है। जिला पंचायत अध्यक्ष पर नामांकन करने की वजह से याची के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कराकर उसे चुनाव लड़ने से रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
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गिरफ्तारी पर रोक के मामले में न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति एएस चौहान की पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने इस प्रकरण पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि चुनाव के समय ही इस प्रकार की प्राथमिकियां क्यों दर्ज कराई जाती हैं। विनोद उपाध्याय की गिरफ्तारी पर एक दिन (सात जनवरी तक) रोक लगाते हुए कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह से हलफनामा मांगा है। सहायक शासकीय अधिवक्ता को निर्देश दिया है कि आदेश की जानकारी संबंधित जिले के डीएम और एसएसपी को तत्काल उपलब्ध कराई जाए।
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