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कार्बन मोनो आक्साइड बन गई जानलेवा!
Hathras
Updated Fri, 20 Dec 2013 05:42 AM IST
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हाथरस। जिस तरह से धुएं से दम घुटने से दो मौत हुई, ऐसी घटनाएं अक्सर लापरवाही के साथ-साथ अज्ञानता की वजह से भी होती हैं। मेंडू की घटना में तो धुआं अंदर ऐसे कमरे में जाता रहा, जिसमें हवा के आने-जाने का साधन ही नहीं था। इसी वजह से यह हादसा हुआ। वैसे भी सर्दी के मौसम में लोग अंगीठी या हीटर जलाकर कमरे को बंद करके सो जाते हैं। यह भी बेहद खतरनाक है और यदि खिड़की, जंगला न हो तो बड़ी घटना हो सकती है।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.वीपी गुप्ता कहना है कि मेंडू में जो घटना हुई है, वह कार्बन मोनो ऑक्साइड बनने की वजह से हुई होगी। उनका कहना है कि कार्बन डाई ऑक्साइड तो तब बनती है, जब उसे बाहरी हवा मिलती रहे, लेकिन कार्बन मोनो ऑक्साइड ऐसी स्थिति में बनती है, जब हवा की निकासी का कोई साधन न हो। उनका कहना है कि कार्बन डाई ऑक्साईड की वजह से पीड़ित को शुरू में दम घुटने का अहसास हो जाता है और उसे खांसी आदि आती है, लेकिन कार्बन मोनो आक्साइड एक तरह से जहरीली गैस है और उसके संपर्क में आकर पीड़ित बेहोश हो जाता है और उसकी जान चली जाती है। उनका यह भी कहना है कि अब सर्दी के मौसम में लोग अंगीठी आदि जलाकर तो बिल्कुल न सोएं। कमरा गरम करने के बाद जब सोएं तो अंगीठी और हीटर आदि को कमरे से अलग कर दें। कमरे में खुली हवा के लिए थोड़ी-बहुत जगह जरूर होनी चाहिए।
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वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.वीपी गुप्ता कहना है कि मेंडू में जो घटना हुई है, वह कार्बन मोनो ऑक्साइड बनने की वजह से हुई होगी। उनका कहना है कि कार्बन डाई ऑक्साइड तो तब बनती है, जब उसे बाहरी हवा मिलती रहे, लेकिन कार्बन मोनो ऑक्साइड ऐसी स्थिति में बनती है, जब हवा की निकासी का कोई साधन न हो। उनका कहना है कि कार्बन डाई ऑक्साईड की वजह से पीड़ित को शुरू में दम घुटने का अहसास हो जाता है और उसे खांसी आदि आती है, लेकिन कार्बन मोनो आक्साइड एक तरह से जहरीली गैस है और उसके संपर्क में आकर पीड़ित बेहोश हो जाता है और उसकी जान चली जाती है। उनका यह भी कहना है कि अब सर्दी के मौसम में लोग अंगीठी आदि जलाकर तो बिल्कुल न सोएं। कमरा गरम करने के बाद जब सोएं तो अंगीठी और हीटर आदि को कमरे से अलग कर दें। कमरे में खुली हवा के लिए थोड़ी-बहुत जगह जरूर होनी चाहिए।
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