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दूसरे दिन भी हुंकारे मनरेगा कर्मी
Hathras
Updated Sat, 23 Feb 2013 05:30 AM IST
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हाथरस। ऑल इंडिया मनरेगा इंपलाइज एसोसिएशन के बैनर तले कर्मियों ने शुक्रवार को दूसरे दिन भी पुरानी कलेक्ट्रेट पर विभिन्न समस्याओं को लेकर नारेबाजी के बीच प्रदर्शन किया। चेतावनी दी कि अगर जल्द ही उनकी सुनवाई नहीं की गई तो बजट के बाद उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।
इस मौके पर हुई सभा में जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार ने कहा कि मनरेगा कर्मियों को पारिश्रमिक के रूप में वेतन के बजाय प्रशासनिक मद से मानदेय दिया जाता है। प्रशासनिक मद आधारित मानदेय व्यवस्था के कारण समय पर भुगतान नहीं हो पाता। जो मानदेय दिया जाता है, वह स्थाई कर्मचारियों की तुलना में महंगाई और काम के स्तर को देखते हुए बहुत कम है। अधिकांश राज्यों में बीमा एवं पीएफ की कोई सुविधा नहीं है। इसके बावजूद मनरेगा को धरातल पर लागू करने के लिए जी-जान से समर्पित हैं। मनरेगा का यह स्टाफ पिछले छह सालों से योजना की रीढ बना हुआ है। इन्हें बदतर स्थिति में रखने और सहायक कर्मचारी बना देने से स्कीम का संचालन बेहतर ढंग से नहीं हो पा रहा है। स्थाई अधिकारी और कर्मियों द्वारा इनका शोषण किया जा रहा है। केंद्रीय रोजगार गारंटी परिषद की सदस्य अनुणा राय इन कर्मियों को नियमित करने का प्रस्ताव रख चुकी हैं, लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। फरवरी 2010 से इस आशय का प्रस्ताव लोकसभा और राज्यसभा में लंबित है।
कर्मियों ने मनरेगा एक्ट की धारा 31(1) में प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मनरेगा कर्मियों को नियमित करने की मांग उठाई।
इस मौके पर रविकांत शर्मा, जितेंद्र दीक्षित, राहुल कौशिक, विमल कुमार, कोमल सिंह, एमपी सिंह, हरिप्रसाद गोला, गीता मिश्रा, नीतेश शर्मा, किशन शर्मा, मालती देवी, निखिल कुमार, रेनू मौर्य, गगन कुमार, अशोक कुमार समेत बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मी मौजूद थे।
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इस मौके पर हुई सभा में जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार ने कहा कि मनरेगा कर्मियों को पारिश्रमिक के रूप में वेतन के बजाय प्रशासनिक मद से मानदेय दिया जाता है। प्रशासनिक मद आधारित मानदेय व्यवस्था के कारण समय पर भुगतान नहीं हो पाता। जो मानदेय दिया जाता है, वह स्थाई कर्मचारियों की तुलना में महंगाई और काम के स्तर को देखते हुए बहुत कम है। अधिकांश राज्यों में बीमा एवं पीएफ की कोई सुविधा नहीं है। इसके बावजूद मनरेगा को धरातल पर लागू करने के लिए जी-जान से समर्पित हैं। मनरेगा का यह स्टाफ पिछले छह सालों से योजना की रीढ बना हुआ है। इन्हें बदतर स्थिति में रखने और सहायक कर्मचारी बना देने से स्कीम का संचालन बेहतर ढंग से नहीं हो पा रहा है। स्थाई अधिकारी और कर्मियों द्वारा इनका शोषण किया जा रहा है। केंद्रीय रोजगार गारंटी परिषद की सदस्य अनुणा राय इन कर्मियों को नियमित करने का प्रस्ताव रख चुकी हैं, लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। फरवरी 2010 से इस आशय का प्रस्ताव लोकसभा और राज्यसभा में लंबित है।
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कर्मियों ने मनरेगा एक्ट की धारा 31(1) में प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मनरेगा कर्मियों को नियमित करने की मांग उठाई।
इस मौके पर रविकांत शर्मा, जितेंद्र दीक्षित, राहुल कौशिक, विमल कुमार, कोमल सिंह, एमपी सिंह, हरिप्रसाद गोला, गीता मिश्रा, नीतेश शर्मा, किशन शर्मा, मालती देवी, निखिल कुमार, रेनू मौर्य, गगन कुमार, अशोक कुमार समेत बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मी मौजूद थे।
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