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हाथरस: संवरेगी गोशालाओं की सूरत, 10 करोड़ से होंगे 73 कार्य, गोबर से आय बढ़ाने की भी तैयारी

Tue, 01 Sep 2026 05:24 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Tue, 01 Sep 2026 05:24 PM IST
सार

गोशालाओं को केवल खर्च आधारित व्यवस्था के बजाय आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा। गोबर से लट्ठे, वर्मी कंपोस्ट और बायोगैस तैयार करने के साथ दुग्ध उत्पादन और उपयुक्त स्थानों पर मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों से आय के स्रोत विकसित किए जाएंगे।

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10.19 crore for 21 cow shelters in Hathras
गोशाला - फोटो : प्रतीकात्मक

विस्तार

निराश्रित गोवंश के संरक्षण और गो-आश्रय स्थलों को बेहतर बनाने के लिए हाथरस जिले में करीब 10.19 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत 21 प्रमुख गो-आश्रय स्थलों को चिन्हित कर 73 अवस्थापना कार्य प्रस्तावित किए गए हैं। इन कार्यों से गोशालाओं की क्षमता बढ़ाने के साथ उन्हें सुरक्षित, सुव्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर रहेगा।

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प्रशासन ने गो-आश्रय स्थलों का निरीक्षण और समीक्षा कर उनका पुनर्गठन किया है। प्रस्तावित कार्यों में बड़े टिन शेड, चरही, प्रीकास्ट चारदीवारी, भूसा भंडारण शेड, गोपालक और केयरटेकर कक्ष तथा बीमार व छोटे गोवंश के लिए अलग आइसोलेशन वार्ड शामिल हैं।
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छोटी गोशालाओं का बड़ी में होगा समायोजन
प्रशासन की योजना चयनित गो-आश्रय स्थलों को बड़ी क्षमता वाले केंद्र के रूप में विकसित करने की है। छोटी और कम उपयोग वाली गोशालाओं के गोवंश को नजदीकी बड़ी गोशालाओं में समायोजित किया जाएगा। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा और गोवंश की देखभाल भी प्रभावी तरीके से की जा सकेगी।

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सादाबाद में 1.73 करोड़, हाथरस में 1.88 करोड़ के काम
विकासखंड सादाबाद में करीब 1.73 करोड़, सहपऊ में 1.68 करोड़, सासनी में 84.28 लाख, हसायन में 1.81 करोड़, मुरसान में 1.19 करोड़, सिकंदराराऊ में 1.05 करोड़ और हाथरस में करीब 1.88 करोड़ रुपये के कार्य प्रस्तावित हैं। कुरसंडा, कंजौली, कजरौटी, उघैना, महरारा, सिरखरा, नगला गढ़ू, खेड़ा सुल्तानपुर, नगरिया पट्टी देवरी, धात्रा खुर्द, गोजिया और लहरा समेत अन्य गो-आश्रय स्थलों पर जरूरत के अनुसार निर्माण कार्य होंगे।

गोबर से आय बढ़ाने की भी तैयारी
गोशालाओं को केवल खर्च आधारित व्यवस्था के बजाय आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा। गोबर से लट्ठे, वर्मी कंपोस्ट और बायोगैस तैयार करने के साथ दुग्ध उत्पादन और उपयुक्त स्थानों पर मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों से आय के स्रोत विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा गोवंश के लिए पर्याप्त भूसा और हरा चारा, केयरटेकर की तैनाती, शत-प्रतिशत ईयर टैगिंग और नर गोवंश का बधियाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

सीएसआर से भी जुटाई जाएगी धनराशि
गो-आश्रय स्थलों के विकास के लिए प्रस्तावित बजट के अतिरिक्त सीएसआर के माध्यम से भी धनराशि खर्च करने की योजना है। जिलाधिकारी ने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और वित्तीय मितव्ययिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि चयनित गो-आश्रय स्थल आने वाले समय में अधिक क्षमता वाले सुरक्षित और आत्मनिर्भर केंद्र के रूप में विकसित हों।

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