{"_id":"5f4a96818ebc3e17644c24d7","slug":"waiting-for-munsif-court-from-18-year-hardoi-news-knp5795840111","type":"story","status":"publish","title_hn":"18 साल से इंतजार, नहीं शुरु हुआ मुंसिफ कोर्ट का संचालन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
18 साल से इंतजार, नहीं शुरु हुआ मुंसिफ कोर्ट का संचालन
विज्ञापन
रजनी तिवारी। संवाद
- फोटो : HARDOI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शाहाबाद। तहसील मुख्यालय पर मुंसिफ कोर्ट के लिए भवन का निर्माण हुए 18 साल बीत गए लेकिन इसका संचालन शुरू नहीं हो सका। इसके कारण लोगों को सुलभ न्याय दिलाने की सरकार की मंशा भी पूरी नहीं हो पा रही है। वादकारियों को न्यायिक मामलों की सुनवाई के लिए कलक्ट्रेट तक 70 किलोमीटर लंबी दौड़ लगानी पड़ती है। लोगों ने जल्द कोर्ट के संचालन की मांग की है।
ब्रिटिश हुकूमत के दौरान 1937 तक तहसील मुख्यालय में मुंसिफ कोर्ट का संचालन होता रहा, लेकिन इसके बाद कोर्ट किसी कारण बंद कर दी गई। तब से क्षेत्र से संबंधित गांव के लोगों को दीवानी व फौजदारी मामलों के निस्तारण के लिए जिला मुख्यालय स्थित कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते हैं। आमजन को सुलभ ढंग से न्याय मिल सके, इसके लिए वर्ष 2002 में सरकार ने तहसील मुख्यालय पर फिर से मुंसिफ कोर्ट का संचालन किए जाने की घोषणा की थी। सरकार के निर्देश पर तहसील मुख्यालय पर 27 लाख रुपये की लागत से मुंसिफ कोर्ट भवन का निर्माण कराया गया। भवन का निर्माण होने के बाद लोगों को जल्द इसका संचालन शुरू होने की आस जगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। भवन का निर्माण हुए लगभग 18 वर्ष गए लेकिन आज तक यहां न्यायिक कार्य शुरू नहीं हो सके।
एक साल पूर्व अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों द्वारा न्यायिक अधिकारियों से इसका संचालन शुरू कराने की मांग की गई थी। इस पर न्यायिक अधिकारियों ने नए भवन का निरीक्षण किया था। यहां न्यायाधीशों के लिए आवास की व्यवस्था न होने की बात सामने आई थी। इस संबंध में निर्देश मिलने के बाद पालिका प्रशासन द्वारा नगर में ही बा स्कूल के पास न्यायाधीश आवास के लिए भूमि उपलब्ध करा दी गई थी। इतना सब होने के बाद मामला फिर से जहां का तहां अटक गया। क्षेत्र के अधिवक्ताओं व वादकारियों का कहना है कि मुंसिफ कोर्ट का संचालन शुरू होना आवश्यक है, इससे बड़ी संख्या में लोगों को सुविधा मिलेगी।
विज्ञापन
सीएम को प्रस्ताव भेजा जा चुका : विधायक रजनी
शाहाबाद विधायक रजनी तिवारी ने कहा कि मुंसिफ भवन में न्यायिक कार्य शुरू करने के लिए गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि प्रदेश में मुंसिफ कोर्ट के संचालन में शाहाबाद को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रयास कर जल्द ही न्यायिक कार्य शुरू कराए जाएंगे।
अधिवक्ता संघ लगातार प्रयासरत : ओमप्रकाश
शाहाबाद अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि ये जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का परिणाम है। जिसके कारण लोगों को सुलभ न्याय नहीं मिल पा रहा है। अधिवक्ता संघ मुंसिफ भवन में न्यायिक कार्य शुरू कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। जल्द ही इस संबंध में प्रभावी रणनीति तय की जाएगी। ।
कस्बा निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता मसरूर अली खां ने बताया कि अंग्रेजी शासन काल में यहां पर मुंसिफ कोर्ट की सुविधा मुहैया थी, लेकिन ये दुर्भाग्य है कि आजाद भारत में इसका संचालन अब तक नहीं शुरू किया जा सका। वकील इसके लिए प्रयासरत हैं।
अधिवक्ता संघ शाहाबाद के महामंत्री अमित मिश्रा अमितेश ने बताया कि मुंसिफ कोर्ट में न्यायिक कार्य शुरू कराने के लिए अधिवक्ता संघ पूरी तरह से सजग है। इस दिशा में लंबे समय से प्रयास जारी है। उम्मीद है कि संघ को इसमें जल्द ही सफलता मिलेगी।
अधिवक्ता अमित गुप्ता ने बताया कि मुंसिफ कोर्ट भवन के निर्माण पर लाखों रुपये खर्च हुए हैं। लेकिन 18 साल गुजरने पर भी यहां न्यायिक कार्य शुरू नहीं हो सके। ये चिंता का विषय है। वकीलों व वादकारियों के हित में कोर्ट का संचालन शुरू होना जरूरी है।
विज्ञापन
ब्रिटिश हुकूमत के दौरान 1937 तक तहसील मुख्यालय में मुंसिफ कोर्ट का संचालन होता रहा, लेकिन इसके बाद कोर्ट किसी कारण बंद कर दी गई। तब से क्षेत्र से संबंधित गांव के लोगों को दीवानी व फौजदारी मामलों के निस्तारण के लिए जिला मुख्यालय स्थित कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते हैं। आमजन को सुलभ ढंग से न्याय मिल सके, इसके लिए वर्ष 2002 में सरकार ने तहसील मुख्यालय पर फिर से मुंसिफ कोर्ट का संचालन किए जाने की घोषणा की थी। सरकार के निर्देश पर तहसील मुख्यालय पर 27 लाख रुपये की लागत से मुंसिफ कोर्ट भवन का निर्माण कराया गया। भवन का निर्माण होने के बाद लोगों को जल्द इसका संचालन शुरू होने की आस जगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। भवन का निर्माण हुए लगभग 18 वर्ष गए लेकिन आज तक यहां न्यायिक कार्य शुरू नहीं हो सके।
विज्ञापन
एक साल पूर्व अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों द्वारा न्यायिक अधिकारियों से इसका संचालन शुरू कराने की मांग की गई थी। इस पर न्यायिक अधिकारियों ने नए भवन का निरीक्षण किया था। यहां न्यायाधीशों के लिए आवास की व्यवस्था न होने की बात सामने आई थी। इस संबंध में निर्देश मिलने के बाद पालिका प्रशासन द्वारा नगर में ही बा स्कूल के पास न्यायाधीश आवास के लिए भूमि उपलब्ध करा दी गई थी। इतना सब होने के बाद मामला फिर से जहां का तहां अटक गया। क्षेत्र के अधिवक्ताओं व वादकारियों का कहना है कि मुंसिफ कोर्ट का संचालन शुरू होना आवश्यक है, इससे बड़ी संख्या में लोगों को सुविधा मिलेगी।
विज्ञापन
सीएम को प्रस्ताव भेजा जा चुका : विधायक रजनी
शाहाबाद विधायक रजनी तिवारी ने कहा कि मुंसिफ भवन में न्यायिक कार्य शुरू करने के लिए गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि प्रदेश में मुंसिफ कोर्ट के संचालन में शाहाबाद को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रयास कर जल्द ही न्यायिक कार्य शुरू कराए जाएंगे।
अधिवक्ता संघ लगातार प्रयासरत : ओमप्रकाश
शाहाबाद अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि ये जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का परिणाम है। जिसके कारण लोगों को सुलभ न्याय नहीं मिल पा रहा है। अधिवक्ता संघ मुंसिफ भवन में न्यायिक कार्य शुरू कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। जल्द ही इस संबंध में प्रभावी रणनीति तय की जाएगी। ।
कस्बा निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता मसरूर अली खां ने बताया कि अंग्रेजी शासन काल में यहां पर मुंसिफ कोर्ट की सुविधा मुहैया थी, लेकिन ये दुर्भाग्य है कि आजाद भारत में इसका संचालन अब तक नहीं शुरू किया जा सका। वकील इसके लिए प्रयासरत हैं।
अधिवक्ता संघ शाहाबाद के महामंत्री अमित मिश्रा अमितेश ने बताया कि मुंसिफ कोर्ट में न्यायिक कार्य शुरू कराने के लिए अधिवक्ता संघ पूरी तरह से सजग है। इस दिशा में लंबे समय से प्रयास जारी है। उम्मीद है कि संघ को इसमें जल्द ही सफलता मिलेगी।
अधिवक्ता अमित गुप्ता ने बताया कि मुंसिफ कोर्ट भवन के निर्माण पर लाखों रुपये खर्च हुए हैं। लेकिन 18 साल गुजरने पर भी यहां न्यायिक कार्य शुरू नहीं हो सके। ये चिंता का विषय है। वकीलों व वादकारियों के हित में कोर्ट का संचालन शुरू होना जरूरी है।