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परिषदीय विद्यालय के नौनिहालों ने की देववाणी में वार्ता
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फोटो-10-उच्च प्राथमिक विद्यालय बहोरवा में उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ के तत्वावधान में आयो?
- फोटो : HARDOI
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संस्कृत भारतीय उपमहाद्वीप की एक भाषा है। इसे देववाणी या सुरभारती भी कहा जाता है। यह विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है। इसको सम्मान दिलाने के लिए हम सभी को न सिर्फ इसे जानना होगा बल्कि इसे अपनी आम बोल चाल में भी प्रयोग करना होगा।
उच्च प्राथमिक विद्यालय बहोरवा में उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ के तत्वावधान में शुक्रवार को आयोजित चुन्नू मुन्नू संस्कारशाला में संस्कृत प्रशिक्षण देते हुए प्रशिक्षक नम्रता शुक्ला ने उक्त बात कही।
उन्होंने कहा कि सच यही है कि विश्व की सबसे प्राचीन भाषा से हम सभी दूर हो गए हैं। अब तो आलम यह है कि मौजूदा हालातों में हम सब इस भाषा के प्रयोग से बचने लगे हैं।
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उन्होंने छात्रों को संस्कृत भाषा मे वार्तालाप करना, गीत, कहानी आदि कहना सिखाया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में दैनिक क्रियाकलापों में संस्कृत का प्रयोग करने का प्रशिक्षण छात्रों को नि:शुल्क दिया जा रहा है। छात्र आपस में संस्कृत भाषा में संभाषण करना भी सीख रहे हैं।
यह प्रशिक्षण 25 मार्च तक जारी रहेगा। विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजाराम प्रजापति, शिक्षक वेदप्रकाश कुशवाहा, ग्राम प्रधान अंजली आदि मौजूद रहे।
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उच्च प्राथमिक विद्यालय बहोरवा में उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ के तत्वावधान में शुक्रवार को आयोजित चुन्नू मुन्नू संस्कारशाला में संस्कृत प्रशिक्षण देते हुए प्रशिक्षक नम्रता शुक्ला ने उक्त बात कही।
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उन्होंने कहा कि सच यही है कि विश्व की सबसे प्राचीन भाषा से हम सभी दूर हो गए हैं। अब तो आलम यह है कि मौजूदा हालातों में हम सब इस भाषा के प्रयोग से बचने लगे हैं।
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उन्होंने छात्रों को संस्कृत भाषा मे वार्तालाप करना, गीत, कहानी आदि कहना सिखाया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में दैनिक क्रियाकलापों में संस्कृत का प्रयोग करने का प्रशिक्षण छात्रों को नि:शुल्क दिया जा रहा है। छात्र आपस में संस्कृत भाषा में संभाषण करना भी सीख रहे हैं।
यह प्रशिक्षण 25 मार्च तक जारी रहेगा। विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजाराम प्रजापति, शिक्षक वेदप्रकाश कुशवाहा, ग्राम प्रधान अंजली आदि मौजूद रहे।