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Hardoi News: जिले में नहीं न्यूरो सर्जन, इलाज के लिए गैर जनपद जाना मजबूरी
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हरदोई। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी के लिए भले ही बड़े दावे किए जा रहे हों लेकिन चिकित्सीय सुविधा में जिला बहुत पिछड़ा है।
मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद गंभीर मरीजों को गैर जनपदों रेफर कर दिया जाता है। कारण, विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी। जिले में न्यूरो सर्जन की तैनाती अभी तक नहीं हुई। ऐसे में मरीजों को गैर जनपद जाकर इलाज कराना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीज तो इलाज ही नहीं करा पाते हैं।
जिले की आबादी करीब 45 लाख की आबादी है। इनके स्वास्थ्य की देखभाल के जिले में एक मेडिकल कॉलेज समेत 100 शैय्या संयुक्त चिकित्सालय के अलावा 21 सीएचसी, 48 पीएचसी, 539 स्वास्थ्य उपकेंद्र और एक ट्रॉमा सेंटर है। वहीं 20 आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी बनाए जा रहे हैं। जिले में लगातार स्वास्थ्य सेवाओं का दावा किया जा रहा है लेकिन मरीजों को बेहतर इलाज के लिए अभी भी दूसरे जनपदों की दौड़ लगानी पड़ रही है।
दुर्घटना सिर की चोट और दिमाग से संबंधित अन्य रोगों के लिए न्यूरो सर्जन का होना अति आवश्यक है लेकिन अभी तक न्यूरो सर्जन की तैनाती न होने से मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। मेडिकल कॉलेज में भी लगातार सुविधाओं को बढ़ाने का दावा किया जा रहा है लेकिन अभी तक वहां भी न्यूरो सर्जन ही तैनाती है। इलाज कराने के लिए मरीज गैर जनपद ही जाते हैं।
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दुर्घटनाग्रस्त मरीजों को भी नहीं मिल पाता इलाज
जिले में ट्रॉमा सेंटर तो है लेकिन वहां भी न्यूरो सर्जन नहीं है। ऐसे में दुर्घटना से सिर में लगी गंभीर चोट के मरीज को इलाज नहीं मिल पाता है। मेडिकल कॉलेज आने पर मरीज को प्राथमिक उपचार दे दिया जाता है और इसके बाद उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। समय से इलाज न मिल पाने पर कई बार मरीज की मृत्यु भी हो जाती है।
न्यूरो सर्जन की तैनाती को लेकर प्रयास किया जा रहा है शासन को भी पत्र भेजा गया है। वहां से ही न्यूरो सर्जन की तैनाती की जाएगी। न्यूरो सर्जन मिलने से जिले में मरीजों को काफी राहत मिलेगी। -डॉ. जेविन बिष्णु गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद गंभीर मरीजों को गैर जनपदों रेफर कर दिया जाता है। कारण, विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी। जिले में न्यूरो सर्जन की तैनाती अभी तक नहीं हुई। ऐसे में मरीजों को गैर जनपद जाकर इलाज कराना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीज तो इलाज ही नहीं करा पाते हैं।
जिले की आबादी करीब 45 लाख की आबादी है। इनके स्वास्थ्य की देखभाल के जिले में एक मेडिकल कॉलेज समेत 100 शैय्या संयुक्त चिकित्सालय के अलावा 21 सीएचसी, 48 पीएचसी, 539 स्वास्थ्य उपकेंद्र और एक ट्रॉमा सेंटर है। वहीं 20 आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी बनाए जा रहे हैं। जिले में लगातार स्वास्थ्य सेवाओं का दावा किया जा रहा है लेकिन मरीजों को बेहतर इलाज के लिए अभी भी दूसरे जनपदों की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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दुर्घटना सिर की चोट और दिमाग से संबंधित अन्य रोगों के लिए न्यूरो सर्जन का होना अति आवश्यक है लेकिन अभी तक न्यूरो सर्जन की तैनाती न होने से मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। मेडिकल कॉलेज में भी लगातार सुविधाओं को बढ़ाने का दावा किया जा रहा है लेकिन अभी तक वहां भी न्यूरो सर्जन ही तैनाती है। इलाज कराने के लिए मरीज गैर जनपद ही जाते हैं।
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दुर्घटनाग्रस्त मरीजों को भी नहीं मिल पाता इलाज
जिले में ट्रॉमा सेंटर तो है लेकिन वहां भी न्यूरो सर्जन नहीं है। ऐसे में दुर्घटना से सिर में लगी गंभीर चोट के मरीज को इलाज नहीं मिल पाता है। मेडिकल कॉलेज आने पर मरीज को प्राथमिक उपचार दे दिया जाता है और इसके बाद उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। समय से इलाज न मिल पाने पर कई बार मरीज की मृत्यु भी हो जाती है।
न्यूरो सर्जन की तैनाती को लेकर प्रयास किया जा रहा है शासन को भी पत्र भेजा गया है। वहां से ही न्यूरो सर्जन की तैनाती की जाएगी। न्यूरो सर्जन मिलने से जिले में मरीजों को काफी राहत मिलेगी। -डॉ. जेविन बिष्णु गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज