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चौथे दिन भी टीम को छकाता रहा बाघ
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पिहानी के बूढ़ा गांव के बाहर बाघ की खोजबीन करती पीलीभीत से आई टीम।
- फोटो : HARDOI
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पिहानी। क्षेत्र में दहशत फैलाए बाघ ने करौंधी गांव में एक दिन आराम फरमाने के बाद धोबिया आश्रम के जंगलों का रुख कर लिया है। सोमवार को टाइगर रिजर्व पीलीभीत से आई टीम के साथ वन विभाग की स्थानीय टीम ने आठ किमी तक पंजों के निशान देखकर बाघ की तलाश की। लेकिन बाघ का पता नहीं चला।
टीम का कहना है कि बाघ करौंधी से दुल्हापुर होते हुए बूढ़ागांव की सीमा पर पहुंच गया है। यहां से धोबिया आश्रम का जंगल महज तीन किमी दूर है। विशेषज्ञ प्रेम चंद व बाघ मित्र अतुल सिंह के साथ वन विभाग की टीम के रेंजर शीतला प्रसाद, विजय शंकर शुक्ला, कन्हैया लाल वर्मा, वन रक्षक राहुल व विपिन ने बताया कि एक दिन बाग में पनाह लेने के बाद बाघ फिर उत्तर दिशा की तरफ निकला है।
प्रेम चंद ने बताया कि बाघ ने करौंधी का इलाका छोड़ दिया। अब उसका रुख उत्तर दिशा की ओर है। पिछले चार दिनों में बाघ ने अब तक सबसे ज्यादा दूरी तय की है। बाघ गन्ने के खेत और झाड़ियों भरे रास्ते पर ही चल रहा है, जिसके कारण टीम को उसकी झलक भी नहीं मिली है।
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सुरक्षित ठिकाने की तलाश में है बाघ
टीम के विशेषज्ञ प्रेम चंद ने बताया कि बाघ के रुख से लगता है कि अब वह सुरक्षित ठिकाने की तलाश में है। उसका रुख धोबिया आश्रम के जंगल की ओर है। यहीं से थोड़े फासले पर गोमती नदी बहती है। बूढ़ागांव की सरहद में दाखिल होने के बाद बाघ धोबिया के जंगल तक सफर तय कर सकता है। वह यहां ठहर भी सकता है और यदि गोमती का तटीय रास्ता पकड़ लेता है तो आगे भी जा सकता है। गोमती के रास्ते वह खीरी के जंगलों की ओर भी जा सकता है। फिलहाल टीम यहां डेरा डालकर बाघ की हरकत भांप रही है।
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टीम का कहना है कि बाघ करौंधी से दुल्हापुर होते हुए बूढ़ागांव की सीमा पर पहुंच गया है। यहां से धोबिया आश्रम का जंगल महज तीन किमी दूर है। विशेषज्ञ प्रेम चंद व बाघ मित्र अतुल सिंह के साथ वन विभाग की टीम के रेंजर शीतला प्रसाद, विजय शंकर शुक्ला, कन्हैया लाल वर्मा, वन रक्षक राहुल व विपिन ने बताया कि एक दिन बाग में पनाह लेने के बाद बाघ फिर उत्तर दिशा की तरफ निकला है।
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प्रेम चंद ने बताया कि बाघ ने करौंधी का इलाका छोड़ दिया। अब उसका रुख उत्तर दिशा की ओर है। पिछले चार दिनों में बाघ ने अब तक सबसे ज्यादा दूरी तय की है। बाघ गन्ने के खेत और झाड़ियों भरे रास्ते पर ही चल रहा है, जिसके कारण टीम को उसकी झलक भी नहीं मिली है।
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सुरक्षित ठिकाने की तलाश में है बाघ
टीम के विशेषज्ञ प्रेम चंद ने बताया कि बाघ के रुख से लगता है कि अब वह सुरक्षित ठिकाने की तलाश में है। उसका रुख धोबिया आश्रम के जंगल की ओर है। यहीं से थोड़े फासले पर गोमती नदी बहती है। बूढ़ागांव की सरहद में दाखिल होने के बाद बाघ धोबिया के जंगल तक सफर तय कर सकता है। वह यहां ठहर भी सकता है और यदि गोमती का तटीय रास्ता पकड़ लेता है तो आगे भी जा सकता है। गोमती के रास्ते वह खीरी के जंगलों की ओर भी जा सकता है। फिलहाल टीम यहां डेरा डालकर बाघ की हरकत भांप रही है।