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धान खरीद में बाधा, किसान परेशान
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फोटो-35- मंडी स्थित विपणन विभाग के क्रय केंद्र प्रथम पर नमी मापक यंत्र से किसान द्वारा लाए गए धान की
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। एक अक्तूबर से धान खरीद शुरू हो गई है लेकिन अब तक सरकारी खरीद केंद्रों पर नाम मात्र की खरीद हुई है। इसकी प्रमुख वजह सरकार द्वारा क्रय के लिए निर्धारित मानक बताए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि धान अधिक नम और अधोमानक बताकर केंद्र प्रभारी खरीदने से मना कर देते हैं। इसके कारण उनके सामने व्यापारियों का कम दाम पर धान बेचने की मजबूरी है।
किसानों की मांग पर जिले में इस बार एक अक्तूबर से सात एजेेंसियों के 60 क्रय केंद्रों पर धान की खरीद शुरू की गई थी। सितंबर में हुई बारिश के बाद धान की फसल तैयार होने में अधिक समय लग गया, जिसके चलते अक्तूबर में जिले में क्रय केंद्रों पर नाम मात्र की धान की खरीद हुई। नवंबर शुरू होते ही बाजार में धान की आवक बढ़ने के बाद भी अब तक मात्र 56 हजार क्विंटल धान की खरीद की जा सकी है। इसकी बड़ी वजह बाजार में आ रहे अधिकांश धान को मानकविहीन बताया जाना है।
औसत के मुताबिक प्रति क्रय केंद्र पर प्रतिदिन दो से तीन किसान उपज लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन उनकी उपज कहीं नमी तो कहीं गुणवत्ता में कमी का हवाला देकर लौर्टाई जा रही है। एडीएम संजय कुमार सिंह ने बताया कि शासन से तय मानक से खराब धान न क्रय किए जाने के निर्देश हैं। तहसील स्तर पर मानकों की जांच के लिए कमेटी भी गठित है। अगर किसी किसान की इस संबंध में कोई शिकायत मिलती है, तो जांच कराई जाएगी।
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ये हैं शासन द्वारा निर्धारित मानक
हरदोई। शासन द्वारा धान खरीद के लिए निर्धारित मानकों में स्पष्ट किया गया है कि केंद्र पर आने वाला धान पांच प्रतिशत से अधिक क्षतिग्रस्त, बदरंग, अंकुरित व घुना हुआ नहीं होना चाहिए। धान तीन प्रतिशत से अधिक अपरिपक्व व संकुचित नहीं होना चाहिए, उसके दाने सिकुड़े नहीं होने चाहिए। धान में छह प्रतिशत से अधिक अधोमानक प्रजाति का मिश्रण नहीं होना चाहिए। धान में नमी 17 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
देविया फत्तेपुर निवासी किसान वीर शिवाजी ने बताया कि सरकार का समर्थन मूल्य अधिक है, लेकिन केंद्रों पर धान बेचना काफी परेशानी भरा है। केंद्रों पर कर्मचारी मानक का हवाला देकर किसान को वापस कर देते हैं, इसलिए कम दाम पर ही मंडी में अपनी उपज बेच दी।
टड़ियावां निवासी किसान मुन्ना खां ने बताया कि टड़ियावां क्षेत्र में क्रय केंद्र नहीं है। हरदोई मंडी में क्रय केंद्र हैं, लेकिन वहां भी धान बेचने के लिए पहले कागज, इसके बाद मानकों की मार झेलो। यह काफी परेशानी भरा है, इसलिए मंडी में व्यापारी को धान बेच दिया।
टड़ियावां के ग्राम पेंग निवासी रामनिवास ने बताया कि धान बेचने के लिए मंडी स्थित क्रय केंद्र पर गए थे, लेकिन केंद्र प्रभारी ने जांच के बाद धान मानक से अधिक नम बताया। इसके बाद धान लेकर मंडी आए और व्यापारी को बेच दिया।
कोटरा गांव निवासी मोहम्मद हनीफ ने बताया कि मंडी में व्यापारी को धान बेचने से पहले क्रय केंद्र गए थे। रजिस्ट्रेशन से लेकर मानक तक की जो शर्तें बताईं गईं, उन्हें पूरा करना मुश्किल था। इसलिए क्रय केंद्र पर धान नहीं बेचा।
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किसानों की मांग पर जिले में इस बार एक अक्तूबर से सात एजेेंसियों के 60 क्रय केंद्रों पर धान की खरीद शुरू की गई थी। सितंबर में हुई बारिश के बाद धान की फसल तैयार होने में अधिक समय लग गया, जिसके चलते अक्तूबर में जिले में क्रय केंद्रों पर नाम मात्र की धान की खरीद हुई। नवंबर शुरू होते ही बाजार में धान की आवक बढ़ने के बाद भी अब तक मात्र 56 हजार क्विंटल धान की खरीद की जा सकी है। इसकी बड़ी वजह बाजार में आ रहे अधिकांश धान को मानकविहीन बताया जाना है।
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औसत के मुताबिक प्रति क्रय केंद्र पर प्रतिदिन दो से तीन किसान उपज लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन उनकी उपज कहीं नमी तो कहीं गुणवत्ता में कमी का हवाला देकर लौर्टाई जा रही है। एडीएम संजय कुमार सिंह ने बताया कि शासन से तय मानक से खराब धान न क्रय किए जाने के निर्देश हैं। तहसील स्तर पर मानकों की जांच के लिए कमेटी भी गठित है। अगर किसी किसान की इस संबंध में कोई शिकायत मिलती है, तो जांच कराई जाएगी।
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ये हैं शासन द्वारा निर्धारित मानक
हरदोई। शासन द्वारा धान खरीद के लिए निर्धारित मानकों में स्पष्ट किया गया है कि केंद्र पर आने वाला धान पांच प्रतिशत से अधिक क्षतिग्रस्त, बदरंग, अंकुरित व घुना हुआ नहीं होना चाहिए। धान तीन प्रतिशत से अधिक अपरिपक्व व संकुचित नहीं होना चाहिए, उसके दाने सिकुड़े नहीं होने चाहिए। धान में छह प्रतिशत से अधिक अधोमानक प्रजाति का मिश्रण नहीं होना चाहिए। धान में नमी 17 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
देविया फत्तेपुर निवासी किसान वीर शिवाजी ने बताया कि सरकार का समर्थन मूल्य अधिक है, लेकिन केंद्रों पर धान बेचना काफी परेशानी भरा है। केंद्रों पर कर्मचारी मानक का हवाला देकर किसान को वापस कर देते हैं, इसलिए कम दाम पर ही मंडी में अपनी उपज बेच दी।
टड़ियावां निवासी किसान मुन्ना खां ने बताया कि टड़ियावां क्षेत्र में क्रय केंद्र नहीं है। हरदोई मंडी में क्रय केंद्र हैं, लेकिन वहां भी धान बेचने के लिए पहले कागज, इसके बाद मानकों की मार झेलो। यह काफी परेशानी भरा है, इसलिए मंडी में व्यापारी को धान बेच दिया।
टड़ियावां के ग्राम पेंग निवासी रामनिवास ने बताया कि धान बेचने के लिए मंडी स्थित क्रय केंद्र पर गए थे, लेकिन केंद्र प्रभारी ने जांच के बाद धान मानक से अधिक नम बताया। इसके बाद धान लेकर मंडी आए और व्यापारी को बेच दिया।
कोटरा गांव निवासी मोहम्मद हनीफ ने बताया कि मंडी में व्यापारी को धान बेचने से पहले क्रय केंद्र गए थे। रजिस्ट्रेशन से लेकर मानक तक की जो शर्तें बताईं गईं, उन्हें पूरा करना मुश्किल था। इसलिए क्रय केंद्र पर धान नहीं बेचा।