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तीन किमी सड़क में गड्ढे ही गड्ढे
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हरियावां। शाहपुर-हरियावां की मुख्य सड़क में तीन साल से गड्ढे ही गड्ढे है। इसके बाद भी इसकी मरम्मत नहीं कराई गई। इससे वाहन चालक ही नहीं पैदल निकलने वाले राहगीरों को भी परेशानियाें का सामना करना पड़ रहा है। जरा सी बारिश होते ही सफर और मुसीबतों भरा हो जाता है।
इसी मार्ग से अधिकांश किसानों की गन्ना लोड ट्रॉली निकलती हैं। सड़क पर अधिक गहरे गड्ढे होने के कारण कई बार गन्ने की ट्रॉली पलट भी चुकी हैं। कई जगह पर लोगों ने खुद बड़े गड्ढों को बंद कर चलने लायक बनाया है।
हरियावां-शाहपुर मार्ग की दूरी लगभग 3 किलोमीटर है। इस तीन किमी की दूरी तय करने के लिए गन्ने की ट्रॉली को लगभग 40 से 50 मिनट लग जाते हैं। ट्रैक्टर की जरा सी रफ्तार बढ़ाने पर ट्रॉली के पलट जाने की आशंका बनी रहती है।
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कोरिंगावा गांव के बृजकिशोर बताते हैं कि इस सड़क पर बहुत पहले गिट्टी ठेकेदारों लाई गई थी, जिसे बाद में भरकर वापस चले गए। तब से यह मार्ग ऐसे ही पड़ा हुआ है।
रिगावा के बबलू और रणवीर ने बताया कि इससे अच्छी तो कच्ची ही सड़क रहे। शाहपुर के दिनेश ने बताया कि हरियावां कस्बा गांव से महज तीन किलोमीटर दूरी पर है, जहां सामान लेने बाजार जाना रहता है।
खराब सड़क के चलते काफी परेशानी होती है। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से सड़क बनवाने की मांग की है।
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इसी मार्ग से अधिकांश किसानों की गन्ना लोड ट्रॉली निकलती हैं। सड़क पर अधिक गहरे गड्ढे होने के कारण कई बार गन्ने की ट्रॉली पलट भी चुकी हैं। कई जगह पर लोगों ने खुद बड़े गड्ढों को बंद कर चलने लायक बनाया है।
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हरियावां-शाहपुर मार्ग की दूरी लगभग 3 किलोमीटर है। इस तीन किमी की दूरी तय करने के लिए गन्ने की ट्रॉली को लगभग 40 से 50 मिनट लग जाते हैं। ट्रैक्टर की जरा सी रफ्तार बढ़ाने पर ट्रॉली के पलट जाने की आशंका बनी रहती है।
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कोरिंगावा गांव के बृजकिशोर बताते हैं कि इस सड़क पर बहुत पहले गिट्टी ठेकेदारों लाई गई थी, जिसे बाद में भरकर वापस चले गए। तब से यह मार्ग ऐसे ही पड़ा हुआ है।
रिगावा के बबलू और रणवीर ने बताया कि इससे अच्छी तो कच्ची ही सड़क रहे। शाहपुर के दिनेश ने बताया कि हरियावां कस्बा गांव से महज तीन किलोमीटर दूरी पर है, जहां सामान लेने बाजार जाना रहता है।
खराब सड़क के चलते काफी परेशानी होती है। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से सड़क बनवाने की मांग की है।