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Hardoi News: 19 साल से आरोपी को खोजने में पुलिस नाकाम, कोर्ट ने बंद की फाइल

Sun, 15 Feb 2026 10:57 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 15 Feb 2026 10:57 PM IST
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Police failed to find the accused for 19 years, court closed the file
हरदोई। धोखाधड़ी के 33 साल पुराने मामले में गैरजमानती वारंट जारी होने के बाद 19 साल से फरार आरोपी को खोजने में पुलिस नाकाम रही। आरोपी को स्थायी रूप से फरार मानते हुए सिविल जज जूनियर डिवीजन (एफटीसी महिला) लवलेश कुमार ने केस फाइल बंद कर दी है। मामले में एक अन्य आरोपी की मौत हो चुकी है जबकि पुलिस जमानतदारों को भी नहीं ढूंढ सकी है।
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कोतवाली देहात क्षेत्र के पेनीपुरवा निवासी मुकेश ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि गांव के प्रकाश ने दिनेश के मकान को 50 हजार रुपये में उसको दिलवाने का सौदा किया था। मुकेश से 24 जनवरी 1992 को प्रकाश ने 25 हजार रुपये बयाने (अग्रिम भुगतान) के तौर पर ले लिए थे। इसके बाद न तो मकान बेचा और न ही रुपये वापस किए।
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मुकेश के पूछताछ करने पर प्रकाश ने रुपये गायब हो जाने की बात कही। पुलिस ने मुकेश की शिकायत पर प्रकाश, उसकी पत्नी जयदेवी और बेटी रेखा के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। जांच के बाद पुलिस ने प्रकाश और उसकी बेटी रेखा के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए थे जबकि जयदेवी का नाम हटा दिया था।
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24 अगस्त 1995 को दोनों आरोपी प्रकाश और रेखा को जमानत मिल गई। चार अक्तूबर 1996 को आरोप तय हुए। इसके बाद से मामला गवाही में चलता रहा लेकिन प्रकाश और रेखा कोर्ट में पेश नहीं हुए। 20 मार्च 2007 को प्रकाश और रेखा के खिलाफ न्यायालय से गैरजमानती वारंट जारी हो गया। इसके बाद से दोनों न्यायालय में हाजिर नहीं हुए। जांच के दौरान पता चला कि मुख्य आरोपी प्रकाश की मौत हो चुकी है जबकि उसकी बेटी रेखा गांव छोड़कर चली गई है। जमानतदार दिनेश और बनवारी को भी पुलिस नहीं तलाश पाई। इसके बाद न्यायालय ने रेखा को फरार घोषित कर दिया था। अब इस मामले में सिविल जज जूनियर डिवीजन लवलेश कुमार ने रेखा के खिलाफ स्थायी वारंट जारी करते हुए मुकदमे की फाइल बंद कर दी है।




कोर्ट का सख्त रुख, भविष्य में गिरफ्तारी पर फिर सुनवाई

मामले पर टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने कहा कि मामला अत्यंत पुराना हो चुका है। आरोपी लंबे समय से फरार है और उसके मिलने की कोई संभावना नहीं दिखती। अभियोजन पक्ष भी कोई गवाह प्रस्तुत नहीं कर सका। इसलिए स्थायी वारंट जारी करते हुए फाइल बंद की जा रही है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में आरोपी की गिरफ्तारी होती है तो मुकदमे पर दोबारा विचारण किया जाएगा। आदेश की एक प्रति जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को भी भेजने के निर्देश दिए।
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