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21 साल पहले हुई बस अड्डा प्रबंधक की हत्या में एक को कैद
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हरदोई। 21 वर्ष पुराने हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-6 अनिल कुमार पंचम ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। दो लोगों को दोषमुक्त किया गया है, जबकि एक आरोपी के विरुद्ध अलग से सुनवाई चल रही है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कृपाल सिंह राठौर ने बताया कि अतरौली थाना क्षेत्र के ग्राम भटपुर निवासी राजेंद्र सिंह भटपुर बस अड्डे के प्रबंधक थे। 30 जुलाई 2000 की सुबह वह भटपुर बस अड्डे पर पान की दुकान पर बैठे थे। इसी दौरान भरावन की तरफ से टेंपो से आए देवकीनंदन, चंदनलाल, छुटकुन्नू और श्रीकृष्ण निवासीगण भटपुर वहां आए।
चंदनलाल ने लाइसेंसी राइफल से, देवकीनंदन ने दोनाली लाइसेंसी बंदूक से और श्रीकृष्ण और छुटकुन्नू ने तमंचों से फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से राजेंद्र सिंह की मौत हो गई। आरोपी राजेंद्र सिंह की लाइसेंसी बंदूक भी उठाकर भाग गए।
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घटना की रिपोर्ट राजेंद्र सिंह के भाई विजय कुमार सिंह ने लिखवाई थी। पूरे मामले की सुनवाई कर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम ने श्रीकृष्ण को हत्या के दोष में आजीवन कारावास की सजा और 10 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया है। इसके अलावा लूट के आरोप में 10 वर्ष की सजा और पांच हजार रुपये का जुर्माना सुनाया है। छुटकुन्नू और देवकीनंदन को दोषमुक्त कर दिया गया है, जबकि चंदनलाल के मामले की सुनवाई अलग चल रही है।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कृपाल सिंह राठौर ने बताया कि अतरौली थाना क्षेत्र के ग्राम भटपुर निवासी राजेंद्र सिंह भटपुर बस अड्डे के प्रबंधक थे। 30 जुलाई 2000 की सुबह वह भटपुर बस अड्डे पर पान की दुकान पर बैठे थे। इसी दौरान भरावन की तरफ से टेंपो से आए देवकीनंदन, चंदनलाल, छुटकुन्नू और श्रीकृष्ण निवासीगण भटपुर वहां आए।
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चंदनलाल ने लाइसेंसी राइफल से, देवकीनंदन ने दोनाली लाइसेंसी बंदूक से और श्रीकृष्ण और छुटकुन्नू ने तमंचों से फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से राजेंद्र सिंह की मौत हो गई। आरोपी राजेंद्र सिंह की लाइसेंसी बंदूक भी उठाकर भाग गए।
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घटना की रिपोर्ट राजेंद्र सिंह के भाई विजय कुमार सिंह ने लिखवाई थी। पूरे मामले की सुनवाई कर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम ने श्रीकृष्ण को हत्या के दोष में आजीवन कारावास की सजा और 10 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया है। इसके अलावा लूट के आरोप में 10 वर्ष की सजा और पांच हजार रुपये का जुर्माना सुनाया है। छुटकुन्नू और देवकीनंदन को दोषमुक्त कर दिया गया है, जबकि चंदनलाल के मामले की सुनवाई अलग चल रही है।